दुबई के लुलु स्टोर्स में बिक रहे झारखंड के आम्रपाली आम, महिला FPOs को मिला 180% ज़्यादा दाम, इस खास योजना से जुड़े हैं बाग

Umang | Jul 08, 2026, 14:04 IST
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झारखंड के गुमला और देवघर से 2 मीट्रिक टन आम्रपाली आम दुबई के लुलु स्टोर्स भेजे गए हैं। एपीईडीए की पहल से हुए इस निर्यात में महिला FPO की अहम भूमिका रही। स्थानीय बाज़ार की तुलना में किसानों को करीब 180 प्रतिशत अधिक कीमत मिली। आम बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत विकसित बागों से लिए गए थे। एपीईडीए ने किसानों को प्रशिक्षण देकर उन्हें अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों और निर्यात प्रक्रिया के लिए भी तैयार किया।

गुमला और देवघर से दुबई पहुँचे आम्रपाली आम
गुमला और देवघर से दुबई पहुँचे आम्रपाली आम
झारखंड के आम्रपाली आम अब विदेशी बाज़ार में भी अपनी पहचान बना रहे हैं। कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीईडीए) की पहल से झारखंड के गुमला और देवघर जिलों से 2 मीट्रिक टन आम्रपाली आम दुबई भेजे गए हैं। यह खेप 3 जुलाई 2026 को रवाना की गई, जिसकी बिक्री दुबई के लुलु स्टोर्स में हो रही है। खास बात यह है कि ये आम जनजातीय और महिला किसानों द्वारा संचालित किसान उत्पादक कंपनियों से खरीदे गए हैं। इससे पहली बार इन किसान समूहों को अंतरराष्ट्रीय बाज़ार तक सीधी पहुँच मिली है।

इस निर्यात का सबसे बड़ा फायदा महिला किसानों को हुआ है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार, आम बेचने वाले किसान उत्पादक कंपनियों के सदस्यों को स्थानीय बाज़ार की तुलना में करीब 180 प्रतिशत अधिक कीमत मिली है। इससे न सिर्फ़ किसानों की आय बढ़ी है, बल्कि यह भी साफ़ हुआ है कि अगर किसानों को विदेशी बाज़ार तक पहुँच मिले तो उनकी आमदनी में बड़ा इज़ाफ़ा हो सकता है। सरकार का मानना है कि यह पहल झारखंड के बागवानी उत्पादों को वैश्विक बाज़ार तक पहुँचाने और महिला तथा आदिवासी किसानों को निर्यात से जोड़ने की दिशा में अहम कदम है।

गुमला और देवघर की महिला किसान कंपनियों से खरीदे गए आम, बिरसा हरित ग्राम योजना से जुड़े हैं बाग


दुबई भेजी गई खेप में उच्च गुणवत्ता वाले आम्रपाली आम शामिल हैं। ये आम पलाश-झारखंड राज्य आजीविका संवर्धन सोसाइटी (जेएसएलपीएस) के सहयोग से बनी तीन महिला किसान उत्पादक कंपनियों से खरीदे गए। इनमें एक मीट्रिक टन आम गुमला जिले की एपीईडीए पंजीकृत एमवीएम बाघिमा पलकोट उत्पादक कंपनी लिमिटेड और रायडीह कृषि उत्पादक कंपनी लिमिटेड से लिए गए, जबकि बाकी एक मीट्रिक टन आम देवघर जिले की मोहनपुर आजीविका महिला किसान उत्पादक सोसाइटी से खरीदे गए।

इन आमों का उत्पादन उन बागों में हुआ है, जिन्हें जनजातीय महिला किसानों ने बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत विकसित किया है। इस योजना को महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के साथ मिलाकर लागू किया गया है और इसे झारखंड सरकार का समर्थन प्राप्त है। इस निर्यात से जुड़ी महिला किसान उत्पादक कंपनियों के सदस्यों को स्थानीय मंडियों के मुकाबले करीब 180 प्रतिशत अधिक कीमत मिली है। इससे यह भी सामने आया है कि निर्यात के अवसर मिलने पर किसानों की आय में बड़ा सुधार हो सकता है। इन तीनों किसान उत्पादक कंपनियों में 1,500 से अधिक शेयरधारक हैं और सामूहिक रूप से ये 50,000 से ज़्यादा किसान सदस्यों का प्रतिनिधित्व करती हैं। ऐसे में इस पहल का लाभ बड़ी संख्या में किसानों तक पहुँचेगा।

किसानों को मिला प्रशिक्षण, महिला उद्यमियों को भी निर्यात की दी गई जानकारी

एपीईडीए ने बताया कि किसानों को विदेशी बाज़ार की ज़रूरतों के अनुरूप तैयार करने के लिए लगातार प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में मई 2026 में गुमला जिले के पालकोट क्षेत्र में आठ किसान उत्पादक कंपनियों के सदस्यों और उनके निदेशक मंडल के लिए प्रशिक्षण आयोजित किया गया। इसमें किसानों को अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों, फसल की कटाई के बाद रखरखाव, पैकिंग और निर्यात प्रक्रिया की जानकारी दी गई, ताकि वे विदेशी बाज़ार की आवश्यकताओं के अनुसार उत्पादन कर सकें।

इस प्रशिक्षण में कृषि, बागवानी, जेएसएलपीएस, जिला उद्योग केंद्र (डीआईसी) और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों ने भी हिस्सा लिया। इससे पहले 19 सितंबर 2025 को एपीईडीए के क्षेत्रीय कार्यालय, कोलकाता ने देवघर जिले के देवपुर ब्लॉक के बसवरिया गाँव में महिला उद्यमियों और स्वयं सहायता समूहों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया था। इसमें करीब 105 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें महिला उद्यमी, स्वयं सहायता समूह, किसान उत्पादक संगठन तथा कृषि, बागवानी, नाबार्ड और एपीईडीए के अधिकारी शामिल थे।

कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को एपीईडीए की योजनाओं, वित्तीय सहायता, निर्यात के अवसरों, निर्यात की प्रक्रिया और वैश्विक कृषि व्यापार में महिला उद्यमियों के लिए उपलब्ध संस्थागत सहयोग की जानकारी दी गई। एपीईडीए का कहना है कि ऐसे प्रयासों से झारखंड के बागवानी उत्पादों को नए विदेशी बाज़ार मिल रहे हैं और महिला किसान समूहों को निर्यात के ज़रिये आर्थिक रूप से मज़बूत बनाने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है।
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