KCC Loan: किसानों को मिलेगा 5 लाख रुपये तक का क़र्ज़, जानिए ब्याज़ और भुगतान से जुड़े नियम
Mansi | Aug 08, 2026, 18:04 IST
किसान क्रेडिट कार्ड की योजना के तहत अब किसानों को पांच लाख रुपये तक का ऋण आसानी से प्राप्त किया जा सकता है। अगर किसान समय पर अपने ऋण का भुगतान करते हैं, तो उन्हें तीन प्रतिशत ब्याज छूट भी मिलेगी। साथ ही, संपत्ति गिरवी रखे बिना ऋण की सीमा को बढ़ाया गया है। इस योजना का लाभ पशुपालन और मछली पालन जैसे क्षेत्रों में भी उठाया जा सकता है।
किसानों के लिए किसान क्रेडिट कार्ड खेती की ज़रूरतों के समय आसान कर्ज़ और कम ब्याज की सुविधा देने वाला अहम सहारा बन रहा है
खेती में हर सीज़न किसान को कई तरह के ख़र्चों का सामना करना पड़ता है। फसल की बुआई से पहले बीज और खाद खरीदने से लेकर सिंचाई, कीटनाशक और दूसरी ज़रूरतों के लिए भी पैसों की व्यवस्था करनी पड़ती है। कई बार आमदनी फसल बिकने के बाद होती है, लेकिन ख़र्च पहले करना पड़ता है। ऐसे समय में किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) किसानों को ज़रूरत के मुताबिक़ क़र्ज़ लेने की सुविधा देता है।
KCC के ज़रिए किसान अपनी स्वीकृत सीमा के भीतर पैसा निकाल सकते हैं। अब इस योजना के तहत 5 लाख रुपये तक का क़र्ज़ लिया जा सकता है। समय पर क़र्ज़ चुकाने वाले पात्र किसानों को ब्याज़ में छूट भी मिलती है, जिससे खेती के दौरान पैसों की कमी को संभालना आसान हो सकता है।
किसान क्रेडिट कार्ड पर सामान्य ब्याज़ दर 7% सालाना है। मॉडिफ़ाइड इंटरेस्ट सबवेंशन स्कीम (MISS) के तहत समय पर भुगतान करने वाले किसानों को 3% की ब्याज़ छूट मिलती है। इस तरह पात्र किसानों के लिए प्रभावी ब्याज़ दर 4% तक रह सकती है।Bबजट 2025-26 में KCC की क़र्ज़ सीमा को 3 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये किया गया। बिना संपत्ति गिरवी रखे मिलने वाले क़र्ज़ की सीमा भी 1.60 लाख रुपये से बढ़ाकर 2 लाख रुपये कर दी गई। ये बदलाव 1 जनवरी 2025 से देशभर में लागू हैं। 3 लाख रुपये तक के क़र्ज़ पर प्रोसेसिंग चार्ज नहीं लिया जाता है। इससे छोटे और सीमांत किसानों के लिए क़र्ज़ लेना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है।
KCC एक रिवॉल्विंग क्रेडिट सुविधा के तौर पर काम करता है। किसान को स्वीकृत सीमा के भीतर जब जितनी राशि की ज़रूरत हो, वह उतना पैसा निकाल सकता है। ब्याज़ पूरी स्वीकृत सीमा पर नहीं, बल्कि इस्तेमाल की गई राशि पर लगता है। इस सुविधा में किसान को हर महीने निश्चित EMI चुकाने की ज़रूरत नहीं होती। फसल बेचने के बाद वह एकमुश्त भुगतान कर सकता है। एक बार स्वीकृत KCC सीमा सामान्य तौर पर 5 साल तक वैध रहती है।
खेती मौसम पर निर्भर रहती है, इसलिए प्राकृतिक आपदा की स्थिति में किसानों की आर्थिक परेशानी बढ़ सकती है। बाढ़ या सूखे जैसी परिस्थितियों में RBI के नियमों के तहत क़र्ज़ चुकाने की अवधि बढ़ाने और ब्याज़ से जुड़ी राहत का प्रावधान हो सकता है। इससे फसल को नुक़सान होने की स्थिति में किसानों को तुरंत क़र्ज़ चुकाने के दबाव से राहत मिल सकती है।
KCC का लाभ केवल फसल उगाने वाले किसानों तक सीमित नहीं है। पशुपालन, डेयरी, मछली पालन, बकरी पालन और सूअर पालन जैसी गतिविधियों से जुड़े लोग भी इस सुविधा के तहत क़र्ज़ ले सकते हैं। जिन लोगों के पास अपनी ज़मीन नहीं है, वे भी पात्रता के अनुसार JLG यानी ज्वाइंट लाइबिलिटी ग्रुप या SHG यानी स्वयं सहायता समूह के ज़रिए आवेदन कर सकते हैं। मछली पालक और महिला स्वयं सहायता समूह भी योजना के दायरे में आते हैं।
KCC के लिए आवेदन करते समय आम तौर पर आधार कार्ड, पैन कार्ड, ज़मीन से जुड़े दस्तावेज़ और बैंक खाते की जानकारी देनी होती है। पशुपालन या मछली पालन जैसी गतिविधियों के लिए संबंधित काम से जुड़े अतिरिक्त दस्तावेज़ या जानकारी भी मांगी जा सकती है। किसान ऑनलाइन और ऑफ़लाइन दोनों माध्यमों से आवेदन कर सकते हैं। ऑनलाइन आवेदन बैंक की वेबसाइट के अलावा किसान ऋण पोर्टल, जन समर्थ और ई-KCC जैसे डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के ज़रिए किया जा सकता है। ऑफ़लाइन आवेदन के लिए किसान नज़दीकी सरकारी, ग्रामीण या सहकारी बैंक की शाखा में संपर्क कर सकते हैं। आवेदन जमा करने के बाद पात्रता के आधार पर बैंक आगे की प्रक्रिया पूरी करता है।
आँकड़ों के मुताबिक़, देश में 7.72 करोड़ से ज़्यादा सक्रिय किसान क्रेडिट कार्ड हैं। इनके ज़रिए लगभग 10.2 लाख करोड़ रुपये का कृषि क़र्ज़ दिया जा चुका है। इस योजना से 450 से ज़्यादा बैंक जुड़े हुए हैं। KCC का उद्देश्य किसानों को खेती के महत्वपूर्ण चरणों में संस्थागत क़र्ज़ उपलब्ध कराना है, ताकि उन्हें बीज, खाद, सिंचाई और दूसरी ज़रूरी चीज़ों के लिए समय पर पैसों की व्यवस्था हो सके।
ISEC के एक अध्ययन के अनुसार, KCC के माध्यम से कृषि और संबद्ध गतिविधियों में लगाए गए हर 1 रुपये से लगभग 2.30 रुपये का शुद्ध मूल्यवर्धन हुआ। इससे संकेत मिलता है कि किसान क्रेडिट कार्ड के ज़रिए मिलने वाला संस्थागत क़र्ज़ सिर्फ़ तत्काल ख़र्च पूरा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाने में भी योगदान दे सकता है। किसानों के लिए KCC की अहमियत इसलिए भी है कि वे अपनी स्वीकृत सीमा के भीतर ज़रूरत के समय पैसा इस्तेमाल कर सकते हैं और फसल बिकने के बाद भुगतान कर सकते हैं। वहीं, समय पर भुगतान करने पर मिलने वाली ब्याज़ छूट क़र्ज़ की लागत को कम करने में मदद करती है।
KCC के ज़रिए किसान अपनी स्वीकृत सीमा के भीतर पैसा निकाल सकते हैं। अब इस योजना के तहत 5 लाख रुपये तक का क़र्ज़ लिया जा सकता है। समय पर क़र्ज़ चुकाने वाले पात्र किसानों को ब्याज़ में छूट भी मिलती है, जिससे खेती के दौरान पैसों की कमी को संभालना आसान हो सकता है।