कमज़ोर मानसून की चिंता के बीच किसानों ने बढ़ाया दांव, खरीफ़ रकबा बढ़कर 119.90 लाख हेक्टेयर, किस फसल की कितनी बुवाई?
Umang | Jun 23, 2026, 16:21 IST
कमज़ोर मानसून और अल नीनो की आशंकाओं के बावजूद देश में खरीफ़ फसलों की बुवाई पिछले साल से आगे चल रही है। 19 जून 2026 तक कुल 119.90 लाख हेक्टेयर में बुवाई हुई, जो पिछले वर्ष से 1.95 लाख हेक्टेयर अधिक है। धान, दलहन, बाजरा और गन्ने का रकबा बढ़ा है, जबकि सोयाबीन, उड़द और कपास की बुवाई में कमी दर्ज की गई।
धान, दलहन और बाजरा की बुवाई में बढ़ोतरी
अल नीनो के प्रभाव और सामान्य से कम बारिश की आशंकाओं के बीच इस वर्ष खरीफ़ सीज़न को लेकर कई तरह की चिंताएँ जताई जा रही थीं। मौसम वैज्ञानिकों द्वारा मानसून कमज़ोर रहने की संभावना व्यक्त किए जाने के बाद यह अनुमान लगाया जा रहा था कि किसान बुवाई को लेकर सतर्क रुख अपनाएँगे और खरीफ़ फसलों का रकबा प्रभावित हो सकता है। विशेष रूप से धान, तिलहन और दलहन जैसी वर्षा आधारित फसलों के क्षेत्रफल पर असर पड़ने की आशंका व्यक्त की जा रही थी।
हालाँकि, अब तक के आँकड़े अलग तस्वीर पेश कर रहे हैं। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा 19 जून 2026 तक जारी बुवाई आँकड़ों के अनुसार देश में खरीफ़ फसलों की बुवाई पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में अधिक रही है। कुल 119.90 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई हो चुकी है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि तक यह आँकड़ा 117.95 लाख हेक्टेयर था। यानी शुरुआती चरण में ही बुवाई क्षेत्रफल में लगभग 1.95 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
आँकड़ों के अनुसार धान की बुवाई 12.36 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 8.09 लाख हेक्टेयर थी। यानी धान का रकबा 4.26 लाख हेक्टेयर बढ़ा है। दलहनी फसलों की बुवाई भी बढ़कर 7.21 लाख हेक्टेयर तक पहुँच गई है, जो पिछले वर्ष 6.39 लाख हेक्टेयर थी। दलहनों में मूँग की बुवाई में सबसे अधिक बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जबकि उड़द के रकबे में कुछ कमी देखी गई है।
श्री अन्न और मोटे अनाजों का कुल रकबा 12.43 लाख हेक्टेयर तक पहुँच गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 2.61 लाख हेक्टेयर अधिक है। बाजरा, ज्वार, रागी और मक्का जैसी फसलों की बुवाई में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। विशेष रूप से बाजरा का क्षेत्रफल पिछले वर्ष की तुलना में काफ़ी बढ़ा है।
तिलहनी फसलों का कुल रकबा 7.24 लाख हेक्टेयर रहा है, जो पिछले वर्ष के 8.11 लाख हेक्टेयर की तुलना में कुछ कम है। सोयाबीन की बुवाई में 1.20 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज की गई है। हालाँकि मूँगफली और सूरजमुखी के रकबे में बढ़ोतरी देखने को मिली है।
गन्ने का क्षेत्रफल बढ़कर 57.31 लाख हेक्टेयर हो गया है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 56.64 लाख हेक्टेयर था। इसी तरह जूट एवं मेस्ता की बुवाई भी मामूली बढ़त के साथ 6.22 लाख हेक्टेयर तक पहुँच गई है।
जहाँ अधिकांश फसलों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है, वहीं कपास का रकबा घटा है। 19 जून तक कपास की बुवाई 17.13 लाख हेक्टेयर में हुई, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 22.82 लाख हेक्टेयर थी। यानी कपास के रकबे में 5.69 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज की गई है।
शुरुआती बुवाई आँकड़े संकेत दे रहे हैं कि कमजोर मानसून की आशंकाओं के बावजूद किसानों ने खरीफ़ खेती से दूरी नहीं बनाई है। धान, दलहन, मोटे अनाज और गन्ने जैसी प्रमुख फसलों के बढ़ते रकबे से यह साफ़ है कि किसान अब भी मानसून की प्रगति और मौसम की अनुकूलता को लेकर आशावान हैं। आने वाले हफ्तों में बारिश की स्थिति के आधार पर खरीफ़ सीज़न की तस्वीर और स्पष्ट होगी।
हालाँकि, अब तक के आँकड़े अलग तस्वीर पेश कर रहे हैं। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा 19 जून 2026 तक जारी बुवाई आँकड़ों के अनुसार देश में खरीफ़ फसलों की बुवाई पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में अधिक रही है। कुल 119.90 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई हो चुकी है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि तक यह आँकड़ा 117.95 लाख हेक्टेयर था। यानी शुरुआती चरण में ही बुवाई क्षेत्रफल में लगभग 1.95 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।