खरीफ़ बुवाई में तेज़ सुधार, सामान्य क्षेत्रफल का 81 फ़ीसदी हुआ कवर; जानिए किन फ़सलों का बढ़ा रक़बा और कौन अब भी पीछे

Umang | Aug 04, 2026, 11:52 IST
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देश में खरीफ़ फ़सलों की बुवाई सामान्य स्थिति की ओर बढ़ रही है। जुलाई के अंतिम सप्ताह में अच्छी बारिश से खेतों में नमी बढ़ी है। धान की बुवाई पिछले साल से थोड़ी कम है, पर उत्पादन लक्ष्य प्राप्त होगा। दलहन की बुवाई में घाटा कम हुआ है और तिलहन की बुवाई आगे निकल गई है। मोटे अनाजों का रकबा पिछले वर्ष से कम दर्ज किया गया है।

जुलाई की बारिश बनी खेती की ताक़त
जुलाई की बारिश बनी खेती की ताक़त
देश में खरीफ़ फ़सलों की बुवाई अब तेज़ी से सामान्य स्थिति की ओर बढ़ रही है। जुलाई के अंतिम सप्ताह में अच्छी बारिश होने से खेतों में नमी बढ़ी और किसानों ने बड़े पैमाने पर बुवाई की। इसका असर यह हुआ कि खरीफ़ बुवाई का कुल घाटा घटकर 3 फ़ीसदी से भी कम रह गया है। इससे पहले 24 जुलाई तक यह कमी लगभग 5 फ़ीसदी दर्ज की गई थी।

कृषि मंत्रालय के ताज़ा आँकड़ों के अनुसार 31 जुलाई तक खरीफ़ फ़सलों की बुवाई 894.22 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में पूरी हो चुकी है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आँकड़ा 920.72 लाख हेक्टेयर था। मौजूदा बुवाई सामान्य खरीफ़ क्षेत्रफल 1,104.46 लाख हेक्टेयर के लगभग 81 फ़ीसदी तक पहुँच गई है। जुलाई के अंतिम सप्ताह में ही लगभग 107 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई हुई, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 94.5 लाख हेक्टेयर से अधिक रही।

क्या धान की बुवाई अब भी पिछले साल से पीछे है?

खरीफ़ की सबसे प्रमुख फ़सल धान का रक़बा अभी भी पिछले वर्ष की तुलना में कुछ कम है। 31 जुलाई तक धान की बुवाई 301.49 लाख हेक्टेयर में हुई, जबकि एक वर्ष पहले इसी समय यह 308.39 लाख हेक्टेयर थी। यानी धान का रक़बा 2.2 फ़ीसदी कम है। हालाँकि सरकार ने खरीफ़ 2026 के लिए 12.315 करोड़ टन चावल उत्पादन का लक्ष्य रखा है। प्रमुख उत्पादक राज्यों में बेहतर बुवाई को देखते हुए उत्पादन में किसी बड़ी कमी की आशंका नहीं जताई गई है, भले ही कुल रक़बा पिछले वर्ष से थोड़ा कम रहे।

दलहन और तिलहन की बुवाई में क्या रहा बदलाव?

  • दलहन की कुल बुवाई 95.18 लाख हेक्टेयर में हुई, जबकि पिछले वर्ष यह 101.60 लाख हेक्टेयर थी। हालाँकि दलहन का घाटा घटकर 6.3 फ़ीसदी रह गया है, जो एक सप्ताह पहले 7.5 फ़ीसदी था।
  • अरहर की बुवाई 34.91 लाख हेक्टेयर में हुई, जो पिछले वर्ष के 38.44 लाख हेक्टेयर से 9 फ़ीसदी कम है। मूँग का रक़बा 29.22 लाख हेक्टेयर रहा, जबकि उड़द की बुवाई बढ़कर 21.08 लाख हेक्टेयर पहुँच गई।
  • वहीं तिलहन की बुवाई इस सीज़न में पहली बार पिछले वर्ष के स्तर से आगे निकल गई है। 31 जुलाई तक तिलहन का रक़बा 172.32 लाख हेक्टेयर रहा, जबकि पिछले वर्ष यह 171.13 लाख हेक्टेयर था। सोयाबीन का रक़बा मामूली घटकर 117.68 लाख हेक्टेयर रहा, जबकि मूँगफली की बुवाई बढ़कर 43.06 लाख हेक्टेयर हो गई।

अन्य फ़सलों की स्थिति कैसी रही?

कपास की बुवाई 103.54 लाख हेक्टेयर में हुई, जो पिछले वर्ष के 106.06 लाख हेक्टेयर की तुलना में लगभग 2 फ़ीसदी कम है। गन्ने की बुवाई पूरी हो चुकी है और इसका रक़बा बढ़कर 57.58 लाख हेक्टेयर हो गया है, जबकि जूट एवं मेस्ता की बुवाई भी पूरी होकर 6.33 लाख हेक्टेयर दर्ज की गई। मोटे एवं पोषक अनाजों का कुल रक़बा 157.77 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले वर्ष के 170.60 लाख हेक्टेयर से 7.5 फ़ीसदी कम है। ज्वार, बाजरा, रागी और मक्का सभी का क्षेत्रफल पिछले वर्ष की तुलना में कम दर्ज किया गया।

बारिश में सुधार से खेती को कितनी मिली राहत?

भारत मौसम विज्ञान विभाग के आँकड़ों के अनुसार जून में जहाँ मानसून की वर्षा सामान्य से 35 फ़ीसदी कम रही थी, वहीं 1 जून से 3 अगस्त के बीच यह कमी घटकर 12 फ़ीसदी रह गई है। जुलाई महीने में देशभर में सामान्य से 1 फ़ीसदी अधिक वर्षा दर्ज की गई, जिससे खरीफ़ बुवाई को तेज़ी मिली। सरकार ने खरीफ़ 2026 के लिए कुल 17.616 करोड़ टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसमें 8.4 करोड़ टन दलहन, 3.104 करोड़ टन मक्का तथा 1.356 करोड़ टन पोषक अनाज के उत्पादन का लक्ष्य शामिल है।
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