खेत बचाओ अभियान: मिट्टी से लेकर मुनाफे तक, किसानों को कैसे मिलेगा फायदा? 1 जून से शुरू होगा देशव्यापी अभियान
Preeti Nahar | May 31, 2026, 13:59 IST
देशभर में किसानों को मिट्टी की बिगड़ती सेहत, बढ़ती खेती लागत और नकली खाद-बीज जैसी समस्याओं से बचाने के लिए केंद्र सरकार 1 जून से 'खेत बचाओ अभियान' शुरू करने जा रही है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की पहल पर शुरू होने वाले इस राष्ट्रव्यापी अभियान के तहत किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग, मिट्टी परीक्षण, प्राकृतिक खेती, जल संरक्षण और सरकारी योजनाओं की जानकारी दी जाएगी। सरकार का दावा है कि यह अभियान खेतों की उर्वरता बचाने के साथ-साथ किसानों की लागत घटाने और आय बढ़ाने में भी मदद करेगा।
मिट्टी, पानी और मुनाफे को बचाने का सरकार का बड़ा प्लान
देश में घटती मिट्टी की उर्वरता, बढ़ती खेती लागत और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच केंद्र सरकार 1 जून से 'खेत बचाओ अभियान' शुरू करने जा रही है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की पहल पर शुरू हो रहे इस अभियान का मकसद किसानों को मिट्टी की सेहत सुधारने, उर्वरकों के संतुलित उपयोग, प्राकृतिक खेती, जल संरक्षण और नकली खाद-बीज से बचाव की जानकारी देना है।
पिछले कुछ वर्षों में किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ मौसम नहीं, बल्कि खेतों की बिगड़ती सेहत भी बनकर उभरी है। कई राज्यों में लगातार रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हुई है। इसके अलावा भूजल स्तर में गिरावट, बढ़ता तापमान और नकली खाद-बीज का कारोबार भी किसानों के लिए परेशानी का कारण बना है। इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार 1 जून से मध्य प्रदेश के रायसेन जिले से राष्ट्रव्यापी 'खेत बचाओ अभियान' की शुरुआत कर रही है।
अभियान के तहत किसानों को सॉयल हेल्थ कार्ड, मिट्टी परीक्षण और फसल के अनुसार उर्वरक उपयोग की जानकारी दी जाएगी। इससे किसान जरूरत से ज्यादा खाद डालने से बच सकेंगे और मिट्टी की उर्वरता लंबे समय तक बनी रह सकेगी।
कई किसान बिना परीक्षण के डीएपी, यूरिया और अन्य उर्वरकों का अधिक उपयोग करते हैं। वैज्ञानिक सलाह मिलने पर खाद और कीटनाशकों पर होने वाला अनावश्यक खर्च कम हो सकता है।
देश के कई हिस्सों में नकली बीज और उर्वरक किसानों को भारी नुकसान पहुंचाते हैं। अभियान के दौरान किसानों को असली और नकली उत्पाद की पहचान करना सिखाया जाएगा, जिससे फसल नुकसान का जोखिम कम होगा।
जलवायु परिवर्तन के कारण बारिश का पैटर्न तेजी से बदल रहा है। अभियान में किसानों को कम वर्षा की स्थिति में अपनाई जा सकने वाली कृषि तकनीकों और वैकल्पिक फसलों की जानकारी दी जाएगी।
रासायनिक लागत कम करने और मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने के लिए प्राकृतिक खेती, हरी खाद और जल संरक्षण तकनीकों को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे लंबे समय में खेती अधिक टिकाऊ बन सकती है।
सरकार का दावा है कि यह अभियान केवल बैठकों और भाषणों तक सीमित नहीं रहेगा। कृषि वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), आईसीएआर संस्थान और कृषि विश्वविद्यालयों की टीमें गांवों में जाकर खेत स्तर पर प्रदर्शन करेंगी।
यानी किसानों को सिर्फ बताया नहीं जाएगा, बल्कि दिखाया भी जाएगा कि कौन-सी तकनीक उनके खेत के लिए बेहतर है।
अभियान के दौरान किसानों को कई सरकारी योजनाओं से जोड़ने की भी कोशिश होगी।
इनमें शामिल हैं:
आज खेती की सबसे बड़ी समस्या सिर्फ उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि लागत और मुनाफे के बीच संतुलन बनाना है। यदि किसान सही मात्रा में उर्वरक उपयोग करें, मिट्टी की जांच करवाएं और नकली उत्पादों से बचें, तो उनकी लागत कम हो सकती है और आय बढ़ सकती है। यही वजह है कि 'खेत बचाओ अभियान' को सिर्फ पर्यावरण या मिट्टी बचाने की पहल नहीं, बल्कि किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के प्रयास के रूप में भी देखा जा रहा है। अब देखने वाली बात यह होगी कि यह अभियान गाँव-गाँव तक कितनी प्रभावी ढंग से पहुंच पाता है और किसानों को कितना वास्तविक लाभ दिला पाता है।
क्यों शुरू किया जा रहा है 'खेत बचाओ अभियान'?
किसानों को क्या-क्या फायदा मिलेगा?
1. मिट्टी की सेहत सुधारने में मदद
2. खेती की लागत कम करने का मौका
3. नकली खाद-बीज से बचाव
4. कम बारिश में भी खेती के विकल्प
5. प्राकृतिक खेती और जल संरक्षण पर जोर
सिर्फ सलाह नहीं, खेतों में होगा प्रदर्शन
यानी किसानों को सिर्फ बताया नहीं जाएगा, बल्कि दिखाया भी जाएगा कि कौन-सी तकनीक उनके खेत के लिए बेहतर है।
सरकारी योजनाओं का भी मिलेगा लाभ
इनमें शामिल हैं:
- प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि
- किसान क्रेडिट कार्ड (KCC)
- प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना
- सॉयल हेल्थ कार्ड योजना
- मिनी बीज किट वितरण
- दलहन-तिलहन मिशन
- कृषि यंत्रीकरण योजनाएं