Khet Bchao Abhiyan: ऐप बताएगा खेत में कितनी खाद डालनी है!शिवराज सिंह ने देखा लाइव डेमो, जानिए क्या है ये ऐप
Preeti Nahar | Jun 01, 2026, 19:25 IST
‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत किसानों को अब मिट्टी की जांच और फसल की जरूरत के हिसाब से खाद डालने की सलाह मोबाइल पर ही मिल सकेगी। रायसेन में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक ऐसे ऐप का लाइव डेमो देखा और किसानों से इसका उपयोग करने की अपील की। यह ऐप मिट्टी में मौजूद पोषक तत्वों का विश्लेषण कर बताता है कि किस फसल के लिए कितनी और कौन-सी खाद की जरूरत है, जिससे खेती की लागत घटाने और मिट्टी की सेहत सुधारने में मदद मिल सकती है।
अब मोबाइल बताएगा यूरिया की सही मात्रा, किसानों के लिए लॉन्च हुआ E-FARMS ऐप
किसानों के बीच लंबे समय से यह धारणा रही है कि ज्यादा खाद डालने से ज्यादा उत्पादन मिलेगा। लेकिन कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि जरूरत से अधिक उर्वरक न केवल किसानों की जेब पर अतिरिक्त बोझ डालते हैं, बल्कि मिट्टी की सेहत को भी नुकसान पहुंचाते हैं।
इसी समस्या का समाधान खोजने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान प्रणाली से जुड़े वैज्ञानिकों ने एक ऐप विकसित किया है, जिसे अब ‘खेत बचाओ अभियान’ के दौरान किसानों तक पहुंचाया जा रहा है।
मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में अभियान के शुभारंभ के दौरान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस ऐप का लाइव प्रदर्शन देखा। उन्होंने कहा कि तकनीक की मदद से किसान कम लागत में बेहतर उत्पादन हासिल कर सकते हैं और अंधाधुंध खाद के उपयोग से बच सकते हैं।
E-FARMS एक डिजिटल कृषि सलाह मंच है, जो खेत की मिट्टी के आंकड़ों और फसल की जरूरत के आधार पर किसानों को उर्वरक संबंधी जानकारी देता है। ऐप में मिट्टी की जांच रिपोर्ट या सॉइल हेल्थ डेटा दर्ज करने पर यह बताता है कि खेत में नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश और अन्य पोषक तत्वों की स्थिति क्या है।
इसके बाद किसान जिस फसल की खेती करना चाहता है, उसे चुनने पर ऐप यह सुझाव देता है कि कितनी मात्रा में खाद डालनी चाहिए और कौन-सा उर्वरक सबसे उपयुक्त रहेगा।
रायसेन में हुए प्रदर्शन के दौरान वैज्ञानिकों ने एक खेत की मिट्टी का डेटा ऐप में दिखाया। विश्लेषण में सामने आया कि खेत में नाइट्रोजन और पोटाश की कमी है, जबकि फास्फोरस की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है।
जब धान की फसल का विकल्प चुना गया तो ऐप ने सिफारिश की कि एक हेक्टेयर क्षेत्र के लिए लगभग 160 किलोग्राम यूरिया और 70 किलोग्राम म्यूरेट ऑफ पोटाश (MOP) पर्याप्त रहेगा। वहीं स्थानीय किसानों ने बताया कि वे सामान्य तौर पर इससे कहीं अधिक मात्रा में खाद का उपयोग करते हैं।
यहीं पर वैज्ञानिकों ने समझाया कि ज्यादा खाद डालने से उत्पादन जरूरी नहीं बढ़ता। सही मात्रा में संतुलित उर्वरक उपयोग करने से भी समान उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।
E-FARMS ऐप किसानों को तीन बड़े फायदे देने का दावा करता है।
शिवराज सिंह चौहान ने किसानों से अपील करते हुए कहा कि धरती मां का स्वास्थ्य बचाना उतना ही जरूरी है जितना फसल उत्पादन बढ़ाना। उन्होंने कहा कि किसान सॉइल हेल्थ कार्ड और E-FARMS जैसे डिजिटल उपकरणों का उपयोग करें ताकि उर्वरकों का इस्तेमाल वैज्ञानिक तरीके से हो सके।
उनका कहना था कि मिट्टी में पहले से मौजूद पोषक तत्वों को जाने बिना खाद डालना कई बार नुकसानदायक साबित होता है। इसलिए तकनीक आधारित खेती आने वाले समय की जरूरत है।
1 जून से शुरू हुए ‘खेत बचाओ अभियान’ में E-FARMS ऐप को किसानों तक पहुंचाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। कृषि वैज्ञानिक गाँव-गाँव जाकर किसानों को ऐप डाउनलोड करने, मिट्टी की जांच कराने और वैज्ञानिक सिफारिशों के अनुसार उर्वरक उपयोग करने की जानकारी दे रहे हैं। यदि किसान बड़े पैमाने पर इस तकनीक को अपनाते हैं तो इससे न केवल उनकी लागत कम होगी, बल्कि मिट्टी की गुणवत्ता और खेती की टिकाऊ क्षमता भी बेहतर हो सकती है।
इसी समस्या का समाधान खोजने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान प्रणाली से जुड़े वैज्ञानिकों ने एक ऐप विकसित किया है, जिसे अब ‘खेत बचाओ अभियान’ के दौरान किसानों तक पहुंचाया जा रहा है।
मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में अभियान के शुभारंभ के दौरान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस ऐप का लाइव प्रदर्शन देखा। उन्होंने कहा कि तकनीक की मदद से किसान कम लागत में बेहतर उत्पादन हासिल कर सकते हैं और अंधाधुंध खाद के उपयोग से बच सकते हैं।
क्या है E-FARMS ऐप?
इसके बाद किसान जिस फसल की खेती करना चाहता है, उसे चुनने पर ऐप यह सुझाव देता है कि कितनी मात्रा में खाद डालनी चाहिए और कौन-सा उर्वरक सबसे उपयुक्त रहेगा।
रायसेन में कैसे हुआ लाइव डेमो?
E-FARMS ऐप किसानों के लिए उपयोगी पहल है। अक्सर हमारे किसान भाई खेतों में जरूरत से ज्यादा खाद डाल देते हैं। उन्हें लगता है कि जितनी ज्यादा खाद, उतनी अच्छी फसल।
— Shivraj Singh Chouhan (@ChouhanShivraj) June 1, 2026
इससे एक तो धरती माँ का स्वास्थ्य बिगड़ता है और किसानों की जेब पर भी अनावश्यक बोझ आता है। यह ऐप मिट्टी के स्वास्थ्य और… pic.twitter.com/PtD25jMM2z
जब धान की फसल का विकल्प चुना गया तो ऐप ने सिफारिश की कि एक हेक्टेयर क्षेत्र के लिए लगभग 160 किलोग्राम यूरिया और 70 किलोग्राम म्यूरेट ऑफ पोटाश (MOP) पर्याप्त रहेगा। वहीं स्थानीय किसानों ने बताया कि वे सामान्य तौर पर इससे कहीं अधिक मात्रा में खाद का उपयोग करते हैं।
यहीं पर वैज्ञानिकों ने समझाया कि ज्यादा खाद डालने से उत्पादन जरूरी नहीं बढ़ता। सही मात्रा में संतुलित उर्वरक उपयोग करने से भी समान उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।
किसानों को कैसे होगा फायदा?
- पहला, किसान अनावश्यक उर्वरक खरीदने से बच सकते हैं, जिससे खेती की लागत कम होगी।
- दूसरा, मिट्टी में जिस पोषक तत्व की कमी है, उसी की पूर्ति की जाएगी। इससे फसल को संतुलित पोषण मिलेगा और उत्पादन क्षमता बेहतर हो सकती है।
- तीसरा, जरूरत से ज्यादा रासायनिक खाद डालने से मिट्टी की उर्वरता पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव को कम किया जा सकेगा।
मिट्टी की सेहत बचाने पर जोर
उनका कहना था कि मिट्टी में पहले से मौजूद पोषक तत्वों को जाने बिना खाद डालना कई बार नुकसानदायक साबित होता है। इसलिए तकनीक आधारित खेती आने वाले समय की जरूरत है।