CRISIL Report: घर की थाली फिर हुई महँगी! जानिए जून में कितना बढ़ा वेज और नॉन-वेज खाने का खर्च
Umang | Jul 09, 2026, 13:33 IST
क्रिसिल इंटेलिजेंस की ताज़ा ‘रोटी राइस रेट’ रिपोर्ट के अनुसार जून 2026 में घर पर तैयार होने वाली शाकाहारी थाली की लागत सालाना आधार पर 5 प्रतिशत और मांसाहारी थाली की लागत 6 प्रतिशत बढ़ गई। टमाटर, प्याज़, खाद्य तेल, एलपीजी और ब्रॉयलर चिकन की बढ़ती कीमतों ने थाली को महँगा बनाया, जबकि आलू के सस्ता होने से लागत में कुछ राहत मिली। रिपोर्ट के अनुसार भीषण गर्मी और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने खाद्य कीमतों पर असर डाला है।
टमाटर, तेल और गैस ने बिगाड़ा बजट!
रसोई का बजट एक बार फिर बढ़ गया है। रोज़मर्रा में इस्तेमाल होने वाली सब्ज़ियों, खाद्य तेल, रसोई गैस और चिकन की कीमतों में बढ़ोतरी का असर सीधे आम आदमी की थाली पर दिखाई दे रहा है। जून महीने में घर पर बनने वाली शाकाहारी और मांसाहारी दोनों तरह की थाली पहले की तुलना में महँगी हो गई हैं। इससे घरेलू खर्च पर अतिरिक्त बोझ बढ़ा है।
क्रिसिल इंटेलिजेंस की ताज़ा ‘रोटी राइस रेट’ (Roti Rice Rate) रिपोर्ट के अनुसार, जून 2026 में घर पर तैयार होने वाली शाकाहारी थाली की लागत सालाना आधार पर 5 प्रतिशत और मांसाहारी थाली की लागत 6 प्रतिशत बढ़ी है। यह आकलन उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम भारत में खाद्य सामग्री की प्रचलित कीमतों के आधार पर किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार टमाटर, प्याज़, खाद्य तेल, एलपीजी और ब्रॉयलर चिकन की बढ़ी हुई कीमतों ने थाली की लागत बढ़ाई, जबकि आलू की कीमतों में गिरावट से महँगाई का असर कुछ हद तक कम हुआ।
क्रिसिल इंटेलिजेंस की रिपोर्ट के अनुसार, जून 2026 में शाकाहारी थाली की लागत सालाना आधार पर 5 प्रतिशत बढ़ी। इसकी मुख्य वजह टमाटर, प्याज़, खाद्य तेल और एलपीजी की बढ़ती कीमतें रहीं। रिपोर्ट के मुताबिक, टमाटर की कीमत जून 2025 के 32 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर जून 2026 में 42 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई, यानी इसमें 31 प्रतिशत की सालाना बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसकी वजह फरवरी-मार्च के दौरान अधिक तापमान के कारण ग्रीष्मकालीन फसल की बुआई में देरी और कम उत्पादन को बताया गया है।
प्याज़ की कीमतों में भी सालाना आधार पर 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। इसकी वजह अधिक कीमत वाले रबी सीज़न के भंडारित प्याज़ का बाज़ार में पहुँचना रहा। खाद्य तेल और एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में भी सालाना आधार पर 10-10 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। रिपोर्ट के अनुसार पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण आपूर्ति प्रभावित होने से इनकी कीमतों में बढ़ोतरी हुई।
हालाँकि, रबी सीज़न की नई फसल बाज़ार में आने से आलू की कीमतों में सालाना आधार पर 14 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जिससे शाकाहारी थाली की लागत में बढ़ोतरी कुछ हद तक सीमित रही।
रिपोर्ट के अनुसार जून 2026 में मांसाहारी थाली की लागत सालाना आधार पर 6 प्रतिशत बढ़ी। इसका प्रमुख कारण ब्रॉयलर चिकन की कीमतों में अनुमानित 7 प्रतिशत की वृद्धि रही। मांसाहारी थाली की कुल लागत में ब्रॉयलर चिकन की हिस्सेदारी लगभग 50 प्रतिशत होती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भीषण गर्मी के कारण ब्रॉयलर पक्षियों की मृत्यु दर बढ़ी, उनका वज़न अपेक्षा से कम बढ़ा और नए चूज़ों की संख्या भी कम रही। इससे बाज़ार में चिकन की आपूर्ति घटी और कीमतों में बढ़ोतरी हुई।
मासिक आधार पर भी थाली महँगी हुई है। जून में शाकाहारी थाली की लागत मई की तुलना में 4 प्रतिशत और मांसाहारी थाली की लागत 3 प्रतिशत बढ़ी। मई के मुकाबले जून में टमाटर की कीमत 17 प्रतिशत, आलू की 5 प्रतिशत और प्याज़ की 8 प्रतिशत बढ़ी, जिससे शाकाहारी थाली की लागत बढ़ी। वहीं ब्रॉयलर चिकन की कीमतों में अनुमानित 2 प्रतिशत की मासिक बढ़ोतरी और कम आपूर्ति के कारण मांसाहारी थाली की लागत में भी इज़ाफ़ा दर्ज किया गया।
क्रिसिल इंटेलिजेंस की ताज़ा ‘रोटी राइस रेट’ (Roti Rice Rate) रिपोर्ट के अनुसार, जून 2026 में घर पर तैयार होने वाली शाकाहारी थाली की लागत सालाना आधार पर 5 प्रतिशत और मांसाहारी थाली की लागत 6 प्रतिशत बढ़ी है। यह आकलन उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम भारत में खाद्य सामग्री की प्रचलित कीमतों के आधार पर किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार टमाटर, प्याज़, खाद्य तेल, एलपीजी और ब्रॉयलर चिकन की बढ़ी हुई कीमतों ने थाली की लागत बढ़ाई, जबकि आलू की कीमतों में गिरावट से महँगाई का असर कुछ हद तक कम हुआ।
टमाटर, प्याज़, खाद्य तेल और एलपीजी ने बढ़ाया रसोई का खर्च
प्याज़ की कीमतों में भी सालाना आधार पर 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। इसकी वजह अधिक कीमत वाले रबी सीज़न के भंडारित प्याज़ का बाज़ार में पहुँचना रहा। खाद्य तेल और एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में भी सालाना आधार पर 10-10 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। रिपोर्ट के अनुसार पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण आपूर्ति प्रभावित होने से इनकी कीमतों में बढ़ोतरी हुई।
हालाँकि, रबी सीज़न की नई फसल बाज़ार में आने से आलू की कीमतों में सालाना आधार पर 14 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जिससे शाकाहारी थाली की लागत में बढ़ोतरी कुछ हद तक सीमित रही।
ब्रॉयलर चिकन महँगा होने से बढ़ी मांसाहारी थाली की लागत
मासिक आधार पर भी थाली महँगी हुई है। जून में शाकाहारी थाली की लागत मई की तुलना में 4 प्रतिशत और मांसाहारी थाली की लागत 3 प्रतिशत बढ़ी। मई के मुकाबले जून में टमाटर की कीमत 17 प्रतिशत, आलू की 5 प्रतिशत और प्याज़ की 8 प्रतिशत बढ़ी, जिससे शाकाहारी थाली की लागत बढ़ी। वहीं ब्रॉयलर चिकन की कीमतों में अनुमानित 2 प्रतिशत की मासिक बढ़ोतरी और कम आपूर्ति के कारण मांसाहारी थाली की लागत में भी इज़ाफ़ा दर्ज किया गया।