Agriculture News: इस गाँव के KVK से बदल जाएगी खे़ती की तस्वीर, किसानों को मिलेंगी AI सलाह, बीज और आधुनिक तकनीक की सुविधा
Preeti Nahar | Jun 14, 2026, 15:13 IST
मध्य प्रदेश के विदिशा जिले के एक बेरखेड़ी जेतू में बनने वाला कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) किसानों के लिए नई उम्मीद लेकर आया है। इस केंद्र में AI आधारित कृषि सलाह, ड्रिप सिंचाई, मशीन बैंक, फल-सब्जी नर्सरी और खाद्य प्रसंस्करण जैसी सुविधाओं से मिलेंगी। समझना होगा कि क्या यह KVK विदिशा के किसानों की आय बढ़ाने और खेती की तस्वीर बदलने में अहम भूमिका निभाएगा?
विदिशा में कृषि विज्ञान केंद्र शुरू, मिट्टी जांच से AI सलाह तक मिलेंगी सुविधाएं"
मध्य प्रदेश के विदिशा जिले के किसानों के लिए अब खेती से जुड़ी नई सुविधाओं का रास्ता खुलने जा रहा है। गाँव बेरखेड़ी जेतू में बनने वाले कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) से किसानों को खेत की मिट्टी जांच से लेकर आधुनिक खेती की तकनीक तक की जानकारी एक ही जगह मिलेगी, जिसका भूमिपूजन कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने किया।
मंत्री ने बताया- 'खेती को ज्यादा मुनाफे वाली बनाने और किसानों को नई तकनीकों से जोड़ने के उद्देश्य से इस कृषि विज्ञान केंद्र की नींव रखी गई है।' इसके साथ ही ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया। आने वाले समय में यह केंद्र विदिशा के किसानों के लिए कैसे प्रशिक्षण, वैज्ञानिक सलाह और नई कृषि तकनीकों का बड़ा सहारा बनेगा आगे आर्टिकल में समझेंगे।
नए कृषि विज्ञान केंद्र के बनने से विदिशा के किसानों को खेती से जुड़ी कई आधुनिक सुविधाएं एक ही जगह पर मिल सकेंगी। जिसके लिए किसानों को मिट्टी और पौधों की वैज्ञानिक जांच, खेती की नई तकनीकों की जानकारी और विशेषज्ञों की सलाह के लिए अलग-अलग जगह जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
इस केंद्र में किसानों के लिए कई आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इनमें ड्रिप सिंचाई तकनीक, AI आधारित कृषि सलाह, मशीन बैंक, गुणवत्तापूर्ण बीज, फल-सब्जी नर्सरी, खाद्य प्रसंस्करण और मधुमक्खी पालन जैसी सुविधाएं शामिल हैं। इन सुविधाओं से किसानों को खेती में नई तकनीक अपनाने में मदद मिलेगी। साथ ही पानी की बचत, उत्पादन बढ़ाने और कृषि लागत कम करने में भी फायदा मिलने की उम्मीद है।
कार्यक्रम में शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि विदिशा की धरती पर कृषि विज्ञान केंद्र की शुरुआत किसानों के लिए नई संभावनाओं का रास्ता खोलेगी। उन्होंने कहा कि यह केंद्र खेती को नई सोच, नए ज्ञान और नई तकनीक से जोड़ने का काम करेगा। उन्होंने भरोसा जताया कि कृषि विज्ञान केंद्र किसानों की आय बढ़ाने, युवाओं को कृषि क्षेत्र में नए अवसर देने और खेती को आधुनिक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
विदिशा में कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) के शिलान्यास कार्यक्रम में डॉ. एम. एल. जाट, सचिव (DARE) एवं महानिदेशक, ICAR ने कहा कि यह केंद्र सिर्फ एक संस्थान नहीं, बल्कि विकसित भारत 2047 की दिशा में कृषि क्षेत्र को मजबूत करने वाला अहम कदम है। उन्होंने कहा कि देश की प्रगति के लिए कृषि में नवाचार जरूरी है और KVK किसानों तक वैज्ञानिक ज्ञान, नई तकनीक और आधुनिक खेती के तरीकों को पहुंचाने वाले Knowledge Hub के रूप में काम करेंगे।
उन्होंने पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर ज्ञान आधारित कृषि प्रणाली अपनाने पर जोर दिया। डॉ. जाट ने कहा कि Demand-driven Research, Integrated Farming System, Natural Farming, जल प्रबंधन और टिकाऊ खेती जैसे मॉडल किसानों की आय और उत्पादकता बढ़ाने में मदद करेंगे। उन्होंने “Lab to Land” की सोच को मजबूत करने के लिए वैज्ञानिकों, सरकार, उद्योग और किसानों के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत बताई, ताकि कृषि को आत्मनिर्भर और पर्यावरण अनुकूल बनाया जा सके।
मंत्री ने बताया- 'खेती को ज्यादा मुनाफे वाली बनाने और किसानों को नई तकनीकों से जोड़ने के उद्देश्य से इस कृषि विज्ञान केंद्र की नींव रखी गई है।' इसके साथ ही ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया। आने वाले समय में यह केंद्र विदिशा के किसानों के लिए कैसे प्रशिक्षण, वैज्ञानिक सलाह और नई कृषि तकनीकों का बड़ा सहारा बनेगा आगे आर्टिकल में समझेंगे।
किसानों को एक ही जगह मिलेंगी कई सुविधाएं
ड्रिप सिंचाई से लेकर AI आधारित सलाह तक की सुविधा
किसानों की आय बढ़ाने और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर
ज्ञान, नवाचार और किसान सशक्तिकरण का सशक्त केंद्र
उन्होंने पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर ज्ञान आधारित कृषि प्रणाली अपनाने पर जोर दिया। डॉ. जाट ने कहा कि Demand-driven Research, Integrated Farming System, Natural Farming, जल प्रबंधन और टिकाऊ खेती जैसे मॉडल किसानों की आय और उत्पादकता बढ़ाने में मदद करेंगे। उन्होंने “Lab to Land” की सोच को मजबूत करने के लिए वैज्ञानिकों, सरकार, उद्योग और किसानों के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत बताई, ताकि कृषि को आत्मनिर्भर और पर्यावरण अनुकूल बनाया जा सके।