धान छोड़ दूसरी फसल उगाने पर किसानों को मिलेंगे ₹15000 प्रति एकड़, क्या है ये फैसला? जानें कौन उठा सकेगा लाभ
Preeti Nahar | Jun 10, 2026, 09:07 IST
धान की जगह दूसरी फसलें उगाने वाले किसानों को अब ₹15,000 प्रति एकड़ की सहायता मिलेगी। छत्तीसगढ़ सरकार का उद्देश्य फसल विविधीकरण को बढ़ावा देना, जल संरक्षण करना और किसानों की आय बढ़ाना है। योजना से दलहन, तिलहन और अन्य वैकल्पिक फसलों का रकबा बढ़ने की उम्मीद है।
छत्तीसगढ़ के किसानों को ₹15,000 प्रति एकड़ क्यों देगी सरकार?
छत्तीसगढ़ सरकार ने खेती में विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब जो किसान धान की जगह दूसरी फसलें उगाएंगे, उन्हें सरकार की ओर से ₹15,000 प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। राज्य कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई, जिसका उद्देश्य किसानों को पारंपरिक धान खेती से बाहर निकालकर दलहन, तिलहन और अन्य नकदी फसलों की ओर प्रोत्साहित करना है।
सरकार का मानना है कि राज्य में लंबे समय से धान पर अत्यधिक निर्भरता बनी हुई है, जिससे जल संसाधनों पर दबाव बढ़ता है और किसानों की आय के विकल्प सीमित रहते हैं। नई योजना के जरिए खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने की कोशिश की जा रही है।
राज्य कैबिनेट ने फैसला किया है कि जो किसान धान की खेती छोड़कर दूसरी फसलें अपनाएंगे, उन्हें प्रति एकड़ ₹15,000 की आर्थिक सहायता दी जाएगी। यह राशि किसानों को प्रोत्साहन के रूप में मिलेगी ताकि वे खेती में बदलाव करने के लिए आगे आएं। सरकार का मानना है कि इससे किसान केवल एक फसल पर निर्भर नहीं रहेंगे और कृषि क्षेत्र में विविधता बढ़ेगी।
छत्तीसगढ़ को देश के प्रमुख धान उत्पादक राज्यों में गिना जाता है। राज्य के अधिकांश किसान खरीफ सीजन में धान की खेती करते हैं। हालांकि लगातार धान की खेती से भूजल और अन्य प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव बढ़ता है। इसी वजह से सरकार किसानों को चना, अरहर, मूंग, उड़द, सोयाबीन, तिल, मक्का और अन्य फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित कर रही है।
फसल विविधीकरण से किसानों की आय के नए स्रोत खुल सकते हैं। यदि किसी एक फसल के दाम गिरते हैं तो दूसरी फसल से नुकसान की भरपाई की जा सकती है। इसके अलावा दलहन और तिलहन जैसी फसलों की बाजार में अच्छी मांग बनी रहती है। बिहार सरकार का मानना है कि एक ही फसल पर निर्भरता कम होने से खेती का जोखिम भी घटता है और किसानों को बेहतर आर्थिक सुरक्षा मिलती है।
धान ऐसी फसल मानी जाती है जिसमें पानी की खपत काफी अधिक होती है। इसके मुकाबले कई दलहन और तिलहन फसलें कम पानी में भी अच्छी पैदावार देती हैं। सरकार को उम्मीद है कि किसान यदि वैकल्पिक फसलें अपनाते हैं तो जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और कृषि अधिक टिकाऊ बन सकेगी।
फसल विविधीकरण बढ़ने से कृषि आधारित उद्योगों को भी फायदा हो सकता है। तिलहन और दलहन उत्पादन बढ़ने पर प्रसंस्करण उद्योगों को कच्चा माल आसानी से उपलब्ध होगा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं। यह कदम किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करेगा।
कैबिनेट बैठक में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) से जुड़ा एक महत्वपूर्ण फैसला भी लिया गया। वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान खाद्य एवं पोषण सुरक्षा योजनाओं के तहत लाभार्थियों को चना वितरण बिना किसी बाधा के जारी रखने के लिए छत्तीसगढ़ राज्य नागरिक आपूर्ति निगम को नेकडेक्स ई-मार्केट के ई-ऑक्शन प्लेटफॉर्म के माध्यम से चना खरीदने की मंजूरी दी गई है।
सरकार के अनुसार, यह खरीद अधिकतम 0.25 प्रतिशत सेवा शुल्क पर की जाएगी। इसके साथ ही, राज्य में चल रही चना वितरण व्यवस्था को अप्रैल से जून 2026 तक जारी रखने के प्रस्ताव को भी कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है, ताकि पात्र हितग्राहियों को नियमित रूप से खाद्यान्न और पोषण संबंधी लाभ मिलते रहें।
सरकार का मानना है कि राज्य में लंबे समय से धान पर अत्यधिक निर्भरता बनी हुई है, जिससे जल संसाधनों पर दबाव बढ़ता है और किसानों की आय के विकल्प सीमित रहते हैं। नई योजना के जरिए खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने की कोशिश की जा रही है।
क्या है सरकार का नया फैसला?
धान पर निर्भरता कम करने की कोशिश
किसानों को कैसे होगा फायदा?
जल संरक्षण में भी मिलेगी मदद
राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था को मिलेगा लाभ
राशन में चना वितरण जारी रखने के लिए नई व्यवस्था
सरकार के अनुसार, यह खरीद अधिकतम 0.25 प्रतिशत सेवा शुल्क पर की जाएगी। इसके साथ ही, राज्य में चल रही चना वितरण व्यवस्था को अप्रैल से जून 2026 तक जारी रखने के प्रस्ताव को भी कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है, ताकि पात्र हितग्राहियों को नियमित रूप से खाद्यान्न और पोषण संबंधी लाभ मिलते रहें।