Women Participation: ग्राम सभा में क्यों पीछे रह जाती हैं महिलाएँ? रिपोर्ट में सामने आई वजहें, सरकार का एक्शन
Mansi | Aug 11, 2026, 17:07 IST
सरकार ग्राम विकास में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठा रही है। घरेलू दायित्व और सामाजिक बाधाएँ महिलाओं को सक्रिय रूप से भाग लेने से रोकती हैं। इसलिए, महिला सभाएँ और विशेष प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिससे उनकी आवाज़ को सशक्त किया जा सके।
ग्राम सभा में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने और गांव के फ़ैसलों में उनकी आवाज़ को मज़बूत करने पर सरकार का ज़ोर
गाँव के विकास से जुड़े फ़ैसलों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना अब सरकार के फोकस में है। पंचायती राज मंत्रालय की राष्ट्रीय अध्ययन रिपोर्ट में सामने आया है कि कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ग्राम सभा की बैठकों में महिलाओं की भागीदारी अभी भी सीमित है। घरेलू ज़िम्मेदारियाँ, सामाजिक झिझक, बैठकों में पुरुषों का दबदबा और अपनी बात रखने के कम अवसर महिलाओं की सक्रिय भागीदारी में बड़ी रुकावट बन रहे हैं।
राष्ट्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान (NIRDPR) की ओर से तैयार यह अध्ययन रिपोर्ट 30 जून 2026 को जारी की गई थी। रिपोर्ट में ग्राम सभा में कम भागीदारी के कई कारण बताए गए हैं। इनमें रोज़गार और आजीविका से जुड़ी व्यस्तता, बैठकों की पर्याप्त जानकारी न मिलना, शिकायतों पर कार्रवाई का अभाव, संबंधित विभागों के अधिकारियों की अनुपस्थिति और उठाए गए मुद्दों पर फ़ॉलो-अप न होना शामिल हैं। ऐसे में सरकार अब महिलाओं को सिर्फ़ ग्राम सभा में बुलाने के बजाय उन्हें चर्चा और फ़ैसलों में प्रभावी भूमिका देने पर ज़ोर दे रही है।
ग्राम सभा में महिलाओं की मौजूदगी होने के बावजूद कई बार वे खुलकर अपनी बात नहीं रख पातीं। अध्ययन में घरेलू ज़िम्मेदारियों को इसकी प्रमुख वजहों में शामिल किया गया है। इसके अलावा सामाजिक झिझक और बैठकों में पुरुषों का प्रभाव भी महिलाओं की सक्रिय भागीदारी को प्रभावित करता है। अगर महिलाओं को अपनी समस्याएँ और सुझाव रखने का पर्याप्त अवसर नहीं मिलता, तो गाँव की विकास योजनाओं में उनकी ज़रूरतों को पूरी तरह शामिल करना मुश्किल हो सकता है। इसलिए सरकार का ज़ोर महिलाओं को ग्राम सभा की प्रक्रिया में अधिक प्रभावी ढंग से जोड़ने पर है।
पंचायती राज मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को ग्राम सभा की मुख्य बैठक से पहले महिला सभा आयोजित करने की सलाह दी है। इसका उद्देश्य महिलाओं को अपनी समस्याओं, ज़रूरतों और सुझावों पर अलग से चर्चा करने का अवसर देना है। इसके साथ ही वार्ड सभा आयोजित करने और ग्राम सभा की बैठकों में अधिक से अधिक महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने पर भी ज़ोर दिया गया है। इससे महिलाओं की स्थानीय मुद्दों पर आवाज़ को पंचायत के फ़ैसलों तक पहुँचाने में मदद मिल सकती है।
महिलाओं की नेतृत्व क्षमता बढ़ाने के लिए मंत्रालय ने ‘सशक्त पंचायत नेत्री अभियान’ के तहत विशेष प्रशिक्षण मॉड्यूल शुरू किया है। यह प्रशिक्षण पंचायतों में चुनी गई महिला प्रतिनिधियों के लिए तैयार किया गया है। इसका मक़सद महिला प्रतिनिधियों को ग्रामीण शासन से जुड़े विषयों की जानकारी देना और उनकी व्यावहारिक क्षमता बढ़ाना है, ताकि वे अपनी भूमिका और ज़िम्मेदारियों को प्रभावी ढंग से निभा सकें। इसके ज़रिए पंचायतों में महिला नेतृत्व को मजबूत करने पर ज़ोर दिया जा रहा है।
महिलाओं की भागीदारी का मतलब सिर्फ़ ग्राम सभा की बैठक में उनकी संख्या बढ़ाना नहीं है। असली चुनौती यह है कि महिलाएँ अपनी बात खुलकर रख सकें और उनके मुद्दों पर चर्चा के साथ कार्रवाई भी हो। इसी वजह से सरकार ग्राम सभा में नियमित एजेंडा, न्यूनतम कोरम, सरकारी योजनाओं की जानकारी साझा करने और बैठकों में उठाए गए मुद्दों पर आगे की कार्रवाई सुनिश्चित करने जैसे उपायों पर ज़ोर दे रही है।
ग्राम पंचायतों की विकास योजनाएँ तैयार करते समय स्थानीय लोगों की ज़रूरतों को समझना अहम है। पीपुल्स प्लान कैंपेन (PPC) के तहत ग्राम पंचायतों को स्थानीय ज़रूरतों के आधार पर विकास योजनाएँ तैयार करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। इस प्रक्रिया में ग्राम सभा की भागीदारी महत्वपूर्ण है। महिलाओं की सक्रिय भागीदारी बढ़ने से पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोज़गार, सुरक्षा और अन्य स्थानीय मुद्दों से जुड़ी उनकी प्राथमिकताओं को पंचायत विकास योजनाओं में बेहतर तरीके से शामिल किया जा सकता है।
पंचायती राज मंत्रालय ने पंचायतों में पारदर्शिता और नागरिक भागीदारी बढ़ाने के लिए डिजिटल माध्यमों का भी इस्तेमाल किया है। eGramSwaraj पोर्टल के ज़रिए ग्राम पंचायत विकास योजनाओं की तैयारी और निगरानी में ग्राम सभा की भागीदारी को बढ़ावा दिया जाता है। वहीं पंचायत निर्णय ज़रिए ग्राम सभा की बैठक से जुड़ी प्रक्रिया को डिजिटल बनाया जा सकता है। इसमें बैठक तय करने, पहले से एजेंडा साझा करने और कार्यवाही व फ़ैसलों को दर्ज करने जैसी सुविधाएँ शामिल हैं। इससे बैठक की जानकारी और निर्णयों को अधिक व्यवस्थित तरीके से दर्ज करने में मदद मिल सकती है।
पंचायती राज मंत्रालय की पहल का उद्देश्य ग्राम सभा में महिलाओं की भागीदारी को सिर्फ़ संख्या तक सीमित न रखना है। महिला सभा, विशेष प्रशिक्षण और पंचायत विकास योजनाओं में भागीदारी जैसे कदमों के ज़रिए महिलाओं को स्थानीय शासन में अधिक प्रभावी भूमिका देने की कोशिश की जा रही है। .यह जानकारी केंद्रीय पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ़ ललन सिंह ने 11 अगस्त 2026 को लोकसभा में लिखित जवाब में दी। राष्ट्रीय अध्ययन में सामने आई चुनौतियों के बीच सरकार का फोकस अब इस बात पर है कि गांव की महिलाओं की आवाज़ ग्राम सभा में सुनी भी जाए और उनके मुद्दे पंचायत के फ़ैसलों का हिस्सा भी बनें।
राष्ट्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान (NIRDPR) की ओर से तैयार यह अध्ययन रिपोर्ट 30 जून 2026 को जारी की गई थी। रिपोर्ट में ग्राम सभा में कम भागीदारी के कई कारण बताए गए हैं। इनमें रोज़गार और आजीविका से जुड़ी व्यस्तता, बैठकों की पर्याप्त जानकारी न मिलना, शिकायतों पर कार्रवाई का अभाव, संबंधित विभागों के अधिकारियों की अनुपस्थिति और उठाए गए मुद्दों पर फ़ॉलो-अप न होना शामिल हैं। ऐसे में सरकार अब महिलाओं को सिर्फ़ ग्राम सभा में बुलाने के बजाय उन्हें चर्चा और फ़ैसलों में प्रभावी भूमिका देने पर ज़ोर दे रही है।