क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र में तब्दील हुआ लखनऊ मौसम विज्ञान केंद्र, यूपी-उत्तराखंड के लिए मौसम पूर्वानुमान होगा और सटीक

Gaon Connection | Jun 08, 2026, 16:19 IST
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लखनऊ मौसम विज्ञान केंद्र को क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र का दर्जा मिलने से उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में मौसम पूर्वानुमान और आपदा चेतावनी प्रणाली को नई मजबूती मिलेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अर्ली वार्निंग सिस्टम से मौसम जनित मौतों में कमी आई है। वहीं केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि अब लोगों को तीन घंटे पहले मौसम की सटीक जानकारी मिल सकेगी।

उद्घाटन के दौरान की तस्वीर
उद्घाटन के दौरान की तस्वीर
उत्तर प्रदेश में मौसम पूर्वानुमान और आपदा प्रबंधन को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में सोमवार को बड़ा कदम उठाया गया। लखनऊ मौसम विज्ञान केंद्र को आधिकारिक रूप से क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र (Regional Meteorological Centre) का दर्जा दे दिया गया है। इस नए केंद्र के जरिए अब उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के मौसम की निगरानी, पूर्वानुमान और आपदा संबंधी चेतावनियां अधिक सटीक और तेजी से जारी की जा सकेंगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित कार्यक्रम में इसकी शुरुआत की।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मौसम की सटीक जानकारी केवल बारिश या धूप का अनुमान लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह किसानों की फसल बचाने, प्राकृतिक आपदाओं से लोगों की जान-माल की सुरक्षा करने और प्रशासन को समय रहते तैयार करने का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुकी है। उन्होंने कहा कि तकनीक के क्षेत्र में हुए सुधारों का ही परिणाम है कि आज आंधी, बारिश और बिजली गिरने जैसी घटनाओं की चेतावनी पहले से मिल जाती है और लोगों को सतर्क होने का पर्याप्त समय मिलता है।

'12 साल पहले मौसम का अनुमान उल्टा साबित होता था'

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि एक समय ऐसा था जब मौसम विभाग की भविष्यवाणियों पर लोगों का भरोसा कम था। उन्होंने कहा, "12 साल पहले अगर मौसम विभाग कहता था कि बारिश होगी तो लोग मान लेते थे कि शायद बारिश नहीं होगी। लेकिन आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक व्यवस्था के कारण मौसम संबंधी जानकारी अधिक सटीक हो गई है। अब आंधी, बारिश का अलर्ट 3 घंटे पहले सबके मोबाइल पर आ रहा है।" उन्होंने हाल ही में 13 मई को प्रदेश में आई आंधी-तूफान और बारिश की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि उस आपदा में 100 से अधिक लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक में यह सामने आया कि कई स्थानों पर स्थानीय स्तर पर सावधानी बरती जाती तो नुकसान कम हो सकता था।

अर्ली वार्निंग सिस्टम से कम हुई जनहानि

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में अर्ली वार्निंग सिस्टम को मजबूत किए जाने का सकारात्मक असर दिख रहा है। उन्होंने सहारनपुर की एक घटना का उदाहरण देते हुए बताया कि मौसम विभाग की चेतावनी मिलने पर मंदिर में मौजूद लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया, जिससे बड़ी जनहानि टल गई। उन्होंने कहा कि पहले मिर्जापुर, सोनभद्र और चंदौली जैसे जिलों में हर साल मौसम संबंधी घटनाओं में 100 से 150 लोगों की मौत हो जाती थी, लेकिन अब यह संख्या काफी घट गई है।

मौसम में बदलाव से बढ़ सकती है चुनौती

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम चक्र में बदलाव दिखाई दे रहा है। लगभग हर मौसम अपने तय समय से देरी से आ रहा है। यदि यह स्थिति जारी रही तो भविष्य में खाद्यान्न उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश देश के कुल खाद्यान्न उत्पादन में करीब 21 प्रतिशत योगदान देता है, इसलिए किसानों तक सटीक मौसम जानकारी पहुंचाना बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना बीमा योजना के तहत अब किसानों के साथ-साथ बंटाईदारों और उनके परिवारों को भी शामिल किया गया है।

'अब पहले ही पता चल जाता है कि छतरी लेकर निकलना है या नहीं'

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि मौसम विज्ञान के क्षेत्र में पिछले एक दशक में अभूतपूर्व प्रगति हुई है। उन्होंने कहा कि जल्द ही ऐसी उन्नत मौसम सेवा उपलब्ध होगी, जिससे लोगों को अगले तीन घंटे के मौसम की सटीक जानकारी मिल सकेगी। उन्होंने कहा, "अब घर से निकलने से पहले यह पता चल जाता है कि छतरी लेकर निकलना है या नहीं।" डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि 2014 में उत्तर प्रदेश में केवल एक डॉप्लर मौसम रडार था, जबकि आज तीन रडार काम कर रहे हैं और छह नए रडार स्थापित किए जा रहे हैं। देशभर में मौसम रडारों की संख्या 17 से बढ़कर 50 हो चुकी है और अगले दो वर्षों में इसे 100 तक पहुंचाने का लक्ष्य है।

यूपी और उत्तराखंड की निगरानी करेगा नया केंद्र

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि अब तक उत्तर भारत के अधिकांश मौसम संबंधी कार्य दिल्ली से संचालित होते थे। लखनऊ को क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र का दर्जा मिलने के बाद उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की मौसम निगरानी यहीं से होगी। इसके लिए भविष्य में आधुनिक सुविधाओं से लैस बड़ा मुख्यालय भी विकसित किया जाएगा और पांच नए मौसम रडार लगाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में शहरों, पर्यटक स्थलों और अलग-अलग क्षेत्रों के लिए विशेष मौसम पूर्वानुमान जारी किए जाएंगे, जिससे कृषि, पर्यटन, विमानन और आपदा प्रबंधन को और मजबूती मिलेगी।

किसानों और आम लोगों को मिलेगा सीधा फायदा

विशेषज्ञों का मानना है कि लखनऊ में क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र की स्थापना से किसानों को समय पर मौसम की जानकारी मिलेगी, जिससे वे बुवाई, सिंचाई और फसल कटाई जैसे महत्वपूर्ण निर्णय बेहतर तरीके से ले सकेंगे। वहीं, आंधी, तूफान, बिजली गिरने और भारी बारिश जैसी घटनाओं को लेकर पहले से चेतावनी मिलने से जनहानि और आर्थिक नुकसान को भी काफी हद तक कम किया जा सकेगा।
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