UP NEWS: मेंथा की फसल पर नैनो उर्वरकों का असर, किसानों को दिखे बेहतर परिणाम
Preeti Nahar | May 07, 2026, 18:28 IST
उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के बड़ागांव में मेंथा की खेती में नैनो डीएपी और नैनो यूरिया का सफल प्रयोग हुआ है। किसानों को कम लागत में बेहतर उत्पादन मिल रहा है। कृषि विभाग की टीम ने खेत का निरीक्षण कर किसानों को नई तकनीक अपनाने की सलाह दी है। यह तकनीक लागत घटाकर उत्पादन बढ़ाने में सहायक है।
मेंथा फसल में नैनो डीएपी के फाय
बाराबंकी के मसौली ब्लॉक की ग्राम पंचायत बड़ागांव में मेंथा की खेती कर रहे किसानों के लिए अच्छी खबर सामने आई है। यहाँ प्रगतिशील किसान दिलीप कुमार वर्मा के खेत पर नैनो डीएपी और नैनो यूरिया के प्रयोग से फसल में सकारात्मक बदलाव देखने को मिला। इसी को देखने और किसानों को जागरूक करने के लिए कृषि विभाग की टीम खेत पर पहुँची और फसल का विस्तृत निरीक्षण किया। अधिकारियों ने बताया कि कम मात्रा में उर्वरक इस्तेमाल कर बेहतर उत्पादन लेना आज की जरूरत है और नैनो उर्वरक इस दिशा में बेहतर विकल्प बनकर उभर रहे हैं।
6 मई 2026 को जिला कृषि अधिकारी राजितराम, अयोध्या मंडल के उप निदेशक पौधा संरक्षण विजय कुमार, IFFCO के क्षेत्र प्रबंधक राजकुमार सहित अन्य अधिकारियों ने किसान के खेत का दौरा किया। टीम ने मेंथा की फसल में पौधों की वृद्धि, जड़ों की स्थिति, पत्तियों के रंग और कीट-रोग की स्थिति का बारीकी से निरीक्षण किया। अधिकारियों ने पाया कि जहाँ पारंपरिक उर्वरकों का अधिक उपयोग लागत बढ़ाता है, वहीं नैनो उर्वरकों ने कम मात्रा में बेहतर असर दिखाया है।
निरीक्षण के दौरान देखा गया कि नैनो डीएपी और नैनो यूरिया के इस्तेमाल से मेंथा के पौधों की पत्तियाँ गहरे हरे रंग की हो गई हैं, जो बेहतर पोषण का संकेत है। पत्तियों का आकार सामान्य फसल की तुलना में अधिक चौड़ा पाया गया। इसके अलावा पौधों की ऊंचाई, शाखाओं की संख्या और जड़ों का विकास भी बेहतर नजर आया। अधिकारियों ने बताया कि मजबूत जड़ें पौधों को अधिक पोषक तत्व लेने में मदद करती हैं, जिससे उत्पादन बढ़ने की संभावना रहती है।
किसान दिलीप कुमार वर्मा ने बताया कि उन्होंने पारंपरिक डीएपी और यूरिया की मात्रा को लगभग आधा कर नैनो डीएपी और नैनो यूरिया का प्रयोग किया। इसके बावजूद फसल की बढ़वार बेहतर रही और कीट एवं रोगों का प्रकोप भी काफी कम देखने को मिला। उनका कहना है कि अगर किसान सही तरीके से नैनो उर्वरकों का इस्तेमाल करें तो लागत घटाकर बेहतर उत्पादन हासिल किया जा सकता है।
इस मौके पर कृषि स्नातक प्रशिक्षु यज्ञत सिंह, किसान सेवा केंद्र प्रभारी अब्दुल कादिर खान सहित 10 से अधिक किसान मौजूद रहे। किसानों ने मौके पर नैनो उर्वरकों के इस्तेमाल की पूरी प्रक्रिया समझी और आने वाले सीजन में इसे अपनाने की इच्छा जताई। कृषि विभाग ने किसानों को नई तकनीकों को अपनाकर लागत कम करने और उत्पादन बढ़ाने की सलाह दी।