Maharashtra Monsoon Update: महाराष्ट्र में मानसून की शुरुआत के साथ ही किसानों ने खरीफ फसलों की तैयारी तेज कर दी है। हालांकि, राज्य के कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे ने किसानों से अपील की है कि वे जल्दबाजी में बुवाई न करें। उन्होंने कहा कि किसान पहले खेतों में पर्याप्त नमी और बारिश की स्थिति का आकलन करें, उसके बाद ही बुवाई शुरू करें।
कृषि मंत्री ने विधानसभा में कहा कि महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में पिछले दो दिनों से मानसून सक्रिय हुआ है और अगले 3 से 4 दिनों में राज्य के कई इलाकों में अच्छी बारिश होने की उम्मीद है। ऐसे में किसान पर्याप्त मिट्टी की नमी बनने के बाद ही फसल बोएं, ताकि बीज का अंकुरण बेहतर हो और फसल को नुकसान न हो।
बारिश शुरू होते ही बुवाई की जल्दबाजी न करें किसान
कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे ने कहा कि कई बार किसान पहली बारिश के बाद तुरंत बुवाई शुरू कर देते हैं, लेकिन अगर इसके बाद बारिश में लंबा अंतर आ जाए तो बीज खराब हो सकते हैं और दोबारा बुवाई की स्थिति बन सकती है। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि खेत में पर्याप्त नमी आने और लगातार बारिश की स्थिति बनने के बाद ही बुवाई करें। इससे फसल की शुरुआत मजबूत होगी और उत्पादन पर सकारात्मक असर पड़ेगा।
El Niño के खतरे को देखते हुए सरकार तैयार
महाराष्ट्र सरकार मौसम में बदलाव और संभावित अल नीनो प्रभाव को देखते हुए किसानों की मदद के लिए तैयारी कर रही है। कृषि विभाग भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD), कृषि विश्वविद्यालयों और कृषि विज्ञान केंद्रों के साथ मिलकर किसानों को मौसम आधारित सलाह उपलब्ध करा रहा है। सरकार जल प्रबंधन, फसल योजना और जलवायु अनुकूल खेती को बढ़ावा दे रही है, ताकि मौसम की अनिश्चितता का असर किसानों पर कम हो।
किसानों को मिलेगा बीमा और राहत का फायदा
कृषि मंत्री ने बताया कि पिछले साल अत्यधिक बारिश से प्रभावित किसानों के लिए राज्य सरकार ने करीब 20 हजार करोड़ रुपये की राहत उपलब्ध कराई है। इसमें खराब हुई फसल, खेत, कुएं, बिजली पंप और कृषि ढांचे को हुए नुकसान की भरपाई शामिल है। उन्होंने कहा कि पात्र किसानों तक सहायता पहुंचाने का काम लगातार जारी है।
फसल बीमा के तहत 1523 करोड़ रुपये मंजूर
फसल बीमा योजना को लेकर कृषि मंत्री ने बताया कि प्रभावित किसानों के लिए 1523 करोड़ रुपये का मुआवजा मंजूर कर वितरित किया जा चुका है, जबकि शेष 59 करोड़ रुपये की प्रक्रिया जारी है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जिन किसानों को वास्तव में नुकसान हुआ है, उन्हें बीमा लाभ से वंचित नहीं किया जाएगा।
कपास किसानों के लिए शुरू होगा बड़ा मिशन
महाराष्ट्र के विदर्भ और मराठवाड़ा क्षेत्रों में कपास खेती का बड़ा महत्व है। यहाँ बड़ी संख्या में किसान अपनी आजीविका के लिए कपास की खेती पर निर्भर हैं।कृषि मंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार की ओर से कॉटन प्रोडक्टिविटी मिशन (Cotton Productivity Mission) को महाराष्ट्र में 2026-27 से 2030-31 तक लागू किया जाएगा। इस मिशन का उद्देश्य कपास की पैदावार बढ़ाना, वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देना और कपास किसानों की आय में वृद्धि करना है।
कपास उत्पादन बढ़ाने पर रहेगा जोर
कॉटन प्रोडक्टिविटी मिशन के तहत किसानों को बेहतर बीज, आधुनिक खेती तकनीक, बेहतर पौध प्रबंधन, पानी के सही इस्तेमाल और वैज्ञानिक खेती के तरीकों की जानकारी दी जाएगी। सरकार का लक्ष्य है कि कपास उत्पादन बढ़े, खेती का जोखिम कम हो और किसानों को बेहतर दाम मिल सकें।
खरीफ सीजन के लिए खाद और बीज का पर्याप्त स्टॉक
कृषि मंत्री ने बताया कि महाराष्ट्र में खरीफ सीजन के लिए खाद और बीज की पर्याप्त उपलब्धता है। केंद्र सरकार ने राज्य के लिए 43.80 लाख मीट्रिक टन खाद का आवंटन किया है, जिसमें से 42 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा खाद किसानों के लिए उपलब्ध है। वहीं, बीज का स्टॉक भी जरूरत से ज्यादा रखा गया है। राज्य में करीब 28 लाख टन बीज उपलब्ध हैं, जबकि मांग लगभग 20 लाख टन की है।
नकली कृषि सामग्री पर सख्त कार्रवाई
किसानों को गुणवत्तापूर्ण कृषि सामग्री मिले, इसके लिए राज्य सरकार ने नकली खाद, बीज और कीटनाशकों के खिलाफ अभियान चलाया है। कृषि मंत्री के अनुसार, राज्य में 874 गुणवत्ता नियंत्रण निरीक्षक और 44 उड़न दस्ते तैनात किए गए हैं। अब तक बड़ी मात्रा में कृषि सामग्री जब्त की गई है और कई विक्रेताओं के लाइसेंस निलंबित व रद्द किए गए हैं।
किसानों के लिए सरकार की अपील
महाराष्ट्र सरकार ने किसानों से मौसम को ध्यान में रखकर खेती की योजना बनाने की अपील की है। कृषि विभाग लगातार मौसम अपडेट और खेती से जुड़ी सलाह किसानों तक पहुंचा रहा है। मानसून की शुरुआत के बीच सरकार का कहना है कि सही समय पर बुवाई, बेहतर बीज और वैज्ञानिक खेती अपनाकर किसान खरीफ सीजन में अच्छा उत्पादन हासिल कर सकते हैं।