खरीफ सीज़न में बड़ा बदलाव! तिलहन का रकबा बढ़ा, लेकिन धान और गन्ने की बुवाई ने बढ़ाई चिंता; जानें पूरे आँकड़े

Umang | Aug 11, 2026, 11:37 IST
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देश में खरीफ फसलों की बुवाई पिछले साल से कम हुई है। धान की बुवाई में 4.2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। दलहन का रकबा 1.8 प्रतिशत कम हुआ है, जबकि तिलहन का रकबा बढ़ा है। गन्ने का रकबा पिछले साल के मुकाबले थोड़ा कम रहा है। कुल मिलाकर, खरीफ बुवाई सामान्य से कम है, लेकिन अगस्त में हुई बुवाई से कमी घटी है।

अगस्त में तेज़ हुई खरीफ बुवाई
अगस्त में तेज़ हुई खरीफ बुवाई
देश में खरीफ फसलों की बुवाई का कुल रकबा अब पिछले साल के मुक़ाबले 2 प्रतिशत से भी कम रह गया है। कृषि मंत्रालय के 7 अगस्त तक के आँकड़ों के अनुसार, चालू खरीफ सीज़न में 967.92 लाख हेक्टेयर में फसलों की बुवाई हो चुकी है जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह रकबा 985.89 लाख हेक्टेयर था। यानी बुवाई 1.8 प्रतिशत कम है। यह सीज़न के सामान्य रकबे 1,104.46 लाख हेक्टेयर का 87.6 प्रतिशत है। 1 से 7 अगस्त के बीच किसानों ने करीब 74 लाख हेक्टेयर में खरीफ फसलों की बुवाई की, जबकि पिछले साल इसी अवधि में 65.17 लाख हेक्टेयर में बुवाई हुई थी। इससे कुल कमी 31 जुलाई के करीब 3 प्रतिशत से घटकर 2 प्रतिशत से भी कम हो गई है।

दक्षिण-पश्चिम मानसून की स्थिति भी खरीफ बुवाई के लिए अहम बनी हुई है। 1 जून से 10 अगस्त तक देश में कुल बारिश सामान्य से 12 प्रतिशत कम रही है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के आँकड़ों के अनुसार, 741 में से 345 ज़िलों में बारिश सामान्य से 20 प्रतिशत या उससे अधिक कम रही है। 1 से 10 अगस्त के दौरान बारिश सामान्य से 9 प्रतिशत कम रही। इसके बावजूद अगस्त के दौरान हुई बुवाई से रकबे की कमी कम हुई है और महीने के अंत तक बुवाई का समय बाकी होने के कारण रकबा और बढ़ने की संभावना बनी हुई है।

गन्ने और धान की बुवाई में क्या स्थिति है?

कृषि मंत्रालय ने कई सप्ताह बाद गन्ने के रकबे के आँकड़ों में संशोधन किया है। अब 7 अगस्त तक गन्ने की बुवाई का रकबा 58.31 लाख हेक्टेयर बताया गया है, जबकि पिछले साल यह 58.62 लाख हेक्टेयर था। 31 जुलाई तक सरकारी आँकड़ों में इस साल गन्ने का रकबा पिछले साल से 86,000 हेक्टेयर अधिक दिखाया जा रहा था। राज्यवार आँकड़ों में उत्तर प्रदेश में गन्ने का रकबा 28.97 लाख हेक्टेयर है, जो पिछले साल के 28.61 लाख हेक्टेयर से अधिक है। महाराष्ट्र में 11.82 लाख हेक्टेयर के मुक़ाबले 11.96 लाख हेक्टेयर, कर्नाटक में 7.33 लाख हेक्टेयर के मुक़ाबले 7.36 लाख हेक्टेयर, गुजरात में 1.90 लाख हेक्टेयर के मुक़ाबले 2.02 लाख हेक्टेयर, बिहार में 1.89 लाख हेक्टेयर के मुक़ाबले 1.96 लाख हेक्टेयर, तमिलनाडु में 1.34 लाख हेक्टेयर के मुक़ाबले 1.38 लाख हेक्टेयर और पंजाब में 0.81 लाख हेक्टेयर के मुक़ाबले 0.95 लाख हेक्टेयर रकबा रहा।

खरीफ की मुख्य अनाज फसल धान का रकबा 4.2 प्रतिशत घटकर 344.78 लाख हेक्टेयर हो गया है, जबकि पिछले साल यह 360.67 लाख हेक्टेयर था। 31 जुलाई तक धान के रकबे में कमी 2.2 प्रतिशत थी। पिछले सप्ताह कमी बढ़ने से धान की रोपाई की रफ़्तार धीमी रहने का संकेत मिलता है। सरकार ने खरीफ 2026 में 123.15 मिलियन टन चावल उत्पादन का लक्ष्य रखा है। प्रमुख उत्पादक राज्यों में रकबा अधिक होने के कारण सरकार को उत्पादन में बड़ी कमी की आशंका नहीं है।

दलहन और तिलहन की बुवाई में क्या बदलाव आया?

सभी दलहनों का रकबा 103.78 लाख हेक्टेयर रहा, जबकि पिछले साल यह 105.73 लाख हेक्टेयर था। दलहन के रकबे में कमी अब 1.8 प्रतिशत रह गई है, जो पिछले सप्ताह तक 6.3 प्रतिशत थी। अरहर की बुवाई 37.53 लाख हेक्टेयर रही, जो पिछले साल के 40.14 लाख हेक्टेयर से 6.5 प्रतिशत कम है। मूंग का रकबा 31.37 लाख हेक्टेयर रहा, जबकि पिछले साल 33.21 लाख हेक्टेयर था। वहीं उड़द का रकबा बढ़कर 22.86 लाख हेक्टेयर हो गया, जो पिछले साल 20.29 लाख हेक्टेयर था।

तिलहनों की बुवाई का रकबा पिछले साल से अधिक रहा। इस सीज़न में यह 180.20 लाख हेक्टेयर है, जबकि पिछले साल 175.01 लाख हेक्टेयर था। सोयाबीन का रकबा मामूली बढ़कर 119.92 लाख हेक्टेयर हो गया, जो पिछले साल 119.66 लाख हेक्टेयर था। मूंगफली का रकबा 46.82 लाख हेक्टेयर रहा, जबकि पिछले साल 43.11 लाख हेक्टेयर था। सरकार ने खरीफ 2026 के लिए 28.92 मिलियन टन तिलहन उत्पादन का लक्ष्य रखा है, जिसमें सोयाबीन का लक्ष्य 14.85 मिलियन टन और मूंगफली का 11.35 मिलियन टन है।

कपास, मोटे अनाज और बारिश के आँकड़े क्या कहते हैं?

कपास का रकबा 106.01 लाख हेक्टेयर रहा, जबकि पिछले साल 106.42 लाख हेक्टेयर था। जूट और मेस्ता का रकबा बढ़कर 6.34 लाख हेक्टेयर हो गया, जो पिछले साल 6.22 लाख हेक्टेयर था। पोषक/मोटे अनाज का रकबा 7.5 प्रतिशत घटकर 157.77 लाख हेक्टेयर रहा, जबकि पिछले साल यह 170.60 लाख हेक्टेयर था। ज्वार का रकबा 12.16 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले साल 12.61 लाख हेक्टेयर था। बाजरा 57.44 लाख हेक्टेयर के मुक़ाबले 61.64 लाख हेक्टेयर, रागी 1.87 लाख हेक्टेयर के मुक़ाबले 2.80 लाख हेक्टेयर और मक्का 83.56 लाख हेक्टेयर के मुक़ाबले 90.15 लाख हेक्टेयर रहा।

बारिश की बात करें तो जून में संशोधित आँकड़ों के अनुसार सामान्य से 35 प्रतिशत कम बारिश हुई थी, जबकि जुलाई में 1 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई। अब 1 जून से 10 अगस्त के बीच बारिश सामान्य से 12 प्रतिशत कम है। सरकार ने खरीफ 2026 के लिए कुल 176.16 मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य रखा है। इसमें 8.4 मिलियन टन दलहन, 31.04 मिलियन टन मक्का और 13.56 मिलियन टन पोषक अनाज का लक्ष्य शामिल है।
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