Global Warming: दुनिया के इतिहास में अब तक का चौथा सबसे गर्म महीना रहा मार्च 2026, जलवायु परिवर्तन के गंभीर संकेत
Gaon Connection | Apr 10, 2026, 12:50 IST
मार्च 2026 का महीना विश्व के लिए एक गंभीर चेतावनी लेकर आया, जब इसे सबसे गरम महीनों में से एक माना गया। कोपरनिकस जलवायु परिवर्तन सेवा की रिपोर्ट हमें बताती है कि औद्योगिक क्रांति से पहले की तुलना में, तापमान 1.48 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच चुका है। समुद्र का तापमान भी खतरे की सीमा पर है।
मार्च 2026 में तापमान का रिकॉर्ड स्तर
यूरोपीय जलवायु सेवा कोपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस (C3S) की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2026 दुनिया के इतिहास में अब तक का चौथा सबसे गर्म महीना रहा। यह रिपोर्ट जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों को स्पष्ट रूप से दर्शाती है, जिसमें वैश्विक तापमान में वृद्धि, समुद्रों का गर्म होना और आर्कटिक बर्फ में चिंताजनक गिरावट शामिल है। इस महीने वैश्विक औसत तापमान औद्योगिक क्रांति से पहले के स्तरों की तुलना में 1.48°C अधिक दर्ज किया गया, जो एक गंभीर चेतावनी है।
कोपरनिकस के ERA5 डेटा के अनुसार, मार्च 2026 का औसत सतही तापमान 13.94°C रहा। यह 1991 से 2020 के औसत मार्च तापमान से 0.53°C अधिक है। यह लगातार बढ़ता तापमान दर्शाता है कि पृथ्वी गर्म हो रही है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि समुद्र की सतह का तापमान (Sea Surface Temperature) भी रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुँच गया। 60° दक्षिण से 60° उत्तर अक्षांश के बीच समुद्र का औसत तापमान 20.97°C रहा, जो मार्च महीने के लिए दूसरा सबसे ऊंचा रिकॉर्ड है। 2024 के एल-नीनो वर्ष में यह आंकड़ा सबसे अधिक था। वैज्ञानिकों का मानना है कि समुद्र का बढ़ता तापमान एल-नीनो जैसी परिस्थितियाँ फिर से बनने की संभावना को बढ़ाता है, जिसका वैश्विक मौसम पर बड़ा असर पड़ सकता है।
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मार्च 2026 में दुनिया के कई हिस्सों में असामान्य मौसम देखा गया। यूरोप में यह दूसरा सबसे गर्म मार्च रिकॉर्ड किया गया, जहाँ अधिकतर क्षेत्र सामान्य से ज्यादा गर्म और सूखे रहे। कुछ इलाकों में तापमान सामान्य से काफी ऊपर दर्ज हुआ। अमेरिका और मैक्सिको में लंबे समय तक गर्मी और सूखे की स्थिति बनी रही, और कई क्षेत्रों में हीटवेव जैसी परिस्थितियां देखी गईं। आर्कटिक और उत्तर-पूर्व रूस में तापमान सामान्य से ज्यादा रहा। हालांकि, कनाडा और अलास्का के कुछ क्षेत्रों में सामान्य से ठंडा मौसम भी दर्ज किया गया।
रिपोर्ट का सबसे चिंताजनक पहलू आर्कटिक क्षेत्र से जुड़ा है। मार्च में समुद्री बर्फ का विस्तार अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। यह गिरावट जलवायु परिवर्तन की गंभीरता को दर्शाती है। कोपरनिकस के निदेशक कार्लो बुओन्टेम्पो ने कहा कि ये आंकड़े स्पष्ट संकेत हैं कि पृथ्वी की जलवायु प्रणाली लगातार दबाव में है। उन्होंने बताया कि तापमान, समुद्र और बर्फ तीनों के रिकॉर्ड स्तर यह दिखाते हैं कि जलवायु परिवर्तन तेज हो रहा है और इसका असर वैश्विक स्तर पर महसूस किया जा रहा है।
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मार्च 2026 की यह रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि दुनिया लगातार गर्म हो रही है। बढ़ता तापमान, गर्म समुद्र, कम होती आर्कटिक बर्फ और बदलते मौसम पैटर्न आने वाले समय में गंभीर जलवायु संकट की चेतावनी दे रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में ऐसे रिकॉर्ड और अधिक टूट सकते हैं। यह स्थिति जलवायु परिवर्तन के तेज होते प्रभावों को दर्शाती है और आने वाले समय में मौसम की अनिश्चितता और बढ़ सकती है। यह रिपोर्ट नीति निर्माताओं और आम जनता के लिए एक महत्वपूर्ण चेतावनी है, जो हमें अपने ग्रह की रक्षा के लिए तत्काल कार्रवाई करने के लिए प्रेरित करती है।
बढ़ता वैश्विक तापमान और समुद्र का गर्म होना
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दुनिया भर में असामान्य मौसम का प्रकोप
आर्कटिक बर्फ में ऐतिहासिक गिरावट: एक गंभीर चेतावनी
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