फिर बरसेंगे बादल, दो हफ्ते की सुस्ती के बाद मानसून में आई जान, खरीफ़ फसलों को मिल सकता है बड़ा सहारा
Gaon Connection | Jun 22, 2026, 12:41 IST
करीब दो सप्ताह की सुस्ती के बाद दक्षिण-पश्चिम मानसून फिर सक्रिय होता दिख रहा है। पश्चिमी तट और मध्य भारत में बारिश बढ़ने के संकेत मिले हैं, जबकि बंगाल की खाड़ी में नई मौसम प्रणाली बनने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के कई हिस्सों में आने वाले दिनों में बारिश तेज़ हो सकती है।
देश के कई हिस्सों में झमाझम बरसेंगे बादल
करीब दो सप्ताह तक धीमी रफ़्तार से आगे बढ़ने के बाद दक्षिण-पश्चिम मानसून एक बार फिर सक्रिय होता दिखाई दे रहा है। देश के कई हिस्सों में सामान्य से कम बारिश के बीच अब मौसम में बदलाव के संकेत मिलने लगे हैं। अरब सागर से आने वाली मानसूनी हवाएँ मज़बूत हो रही हैं और पश्चिमी तट पर बादलों की सक्रियता बढ़ गई है। ऐसे में उन इलाकों को राहत मिलने की उम्मीद है, जहाँ अब तक बारिश की कमी बनी हुई थी।
मानसून की यह वापसी किसानों और जल संसाधनों के लिहाज़ से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पिछले कुछ दिनों से कमज़ोर मानसून के कारण कई राज्यों में बारिश का वितरण असंतुलित रहा था, जिससे खरीफ़ फसलों की बुवाई और जल भंडारण को लेकर चिंता बढ़ रही थी। अब बंगाल की खाड़ी में एक नई मौसम प्रणाली बनने के संकेत मिल रहे हैं, जिससे पूर्वी, मध्य और पश्चिमी भारत में बारिश की गतिविधियाँ तेज़ हो सकती हैं।
मौसम संबंधी आँकड़ों के अनुसार, रत्नागिरि, पणजी, मंगलूरु, तटीय कर्नाटक और केरल तक मानसूनी बादलों का बड़ा समूह सक्रिय दिखाई दे रहा है। केरल के कई हिस्सों में लगातार बारिश दर्ज की जा रही है और मौसम की स्थिति मानसून के शुरुआती दिनों जैसी बनती दिख रही है। हालाँकि मुंबई में बादलों की स्थिति अभी पूरी तरह मज़बूत नहीं हुई है, लेकिन आने वाले दिनों में वहाँ भी बारिश बढ़ने की संभावना जताई गई है।
कोलकाता से विशाखापत्तनम तक बंगाल की खाड़ी के तटीय क्षेत्रों में बड़े वर्षा वाले बादल विकसित हो रहे हैं। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, यह इस सीज़न के पहले चक्रवाती परिसंचरण या निम्न दबाव क्षेत्र के बनने का संकेत हो सकता है। यदि यह प्रणाली विकसित होती है तो पूर्वी भारत, मध्य भारत और पश्चिमी भारत में बारिश की गतिविधियों को और मज़बूती मिल सकती है।
बारिश की नई गतिविधियों का असर पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़, विदर्भ, पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश, कोंकण क्षेत्र, मुंबई और दक्षिण गुजरात में देखने को मिल सकता है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अगले सात दिनों के दौरान छत्तीसगढ़, विदर्भ और पश्चिमी मध्य प्रदेश में बारिश की संभावना जताई है। वहीं पूर्वी मध्य प्रदेश में अगले पाँच दिनों तक बारिश का दौर जारी रह सकता है।
कोंकण और गोवा क्षेत्र, जिसमें मुंबई भी शामिल है, में अगले एक सप्ताह तक कई स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। मंगलवार को मध्य महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में भी भारी बारिश का अनुमान है। इसके अलावा पूर्वी गुजरात, मराठवाड़ा और सौराष्ट्र-कच्छ के कुछ इलाकों में भी सप्ताहभर बारिश की गतिविधियाँ बनी रह सकती हैं।
तटीय कर्नाटक, केरल, माहे, लक्षद्वीप और तेलंगाना में अगले सात दिनों तक अच्छी बारिश होने की संभावना है। उत्तर आंतरिक कर्नाटक और रायलसीमा में भी सप्ताह के दूसरे हिस्से से बारिश बढ़ सकती है। तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल, तटीय आंध्र प्रदेश और यानम में भी अगले सात दिनों के दौरान छिटपुट से मध्यम बारिश का अनुमान है।
यह बदलाव ऐसे समय में सामने आया है जब अल नीनो के कारण इस साल मानसून पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में मानसून की यह नई सक्रियता वर्षा की कमी वाले क्षेत्रों के लिए राहत लेकर आ सकती है और खरीफ़ सीज़न को भी सहारा दे सकती है।
मानसून की यह वापसी किसानों और जल संसाधनों के लिहाज़ से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पिछले कुछ दिनों से कमज़ोर मानसून के कारण कई राज्यों में बारिश का वितरण असंतुलित रहा था, जिससे खरीफ़ फसलों की बुवाई और जल भंडारण को लेकर चिंता बढ़ रही थी। अब बंगाल की खाड़ी में एक नई मौसम प्रणाली बनने के संकेत मिल रहे हैं, जिससे पूर्वी, मध्य और पश्चिमी भारत में बारिश की गतिविधियाँ तेज़ हो सकती हैं।