मानसून ने फिर पकड़ी रफ़्तार! देश में 8 चक्रवाती सिस्टम हुए सक्रिय, जानिए अगले 7 दिन कहाँ होगी सबसे ज़्यादा बारिश
Umang | Jul 20, 2026, 12:27 IST
देश में मानसून ने एक बार फिर रफ़्तार पकड़ ली है। उत्तर, पूर्व और पूर्वोत्तर भारत में आठ चक्रवाती सिस्टम और सक्रिय मानसूनी ट्रफ के कारण पूरे सप्ताह भारी बारिश का दौर जारी रह सकता है। आईएमडी ने उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर समेत कई राज्यों के लिए भारी से अत्यधिक भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। यह बारिश खरीफ़ फसलों और जलाशयों के लिए राहत लेकर आएगी, लेकिन हिमालयी राज्यों में भूस्खलन और अचानक बाढ़ का ख़तरा भी बढ़ा सकती है।
देश में मौसम का बड़ा बदलाव!
देश के कई हिस्सों में कुछ दिनों की सुस्ती के बाद मानसून एक बार फिर पूरी ताकत के साथ सक्रिय हो गया है। उत्तर भारत, पूर्वी भारत और पूर्वोत्तर राज्यों में मौसम का रुख तेजी से बदला है, जिससे कई इलाक़ों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश का दौर शुरू हो गया है। भारत मौसम विभाग (IMD) ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में विशेष रूप से हिमालयी राज्यों में तेज़ बारिश, भूस्खलन, अचानक बाढ़ और नदियों के उफान का ख़तरा बना रहेगा। लगातार हो रही बारिश के कारण जनजीवन प्रभावित होने के साथ-साथ कई क्षेत्रों में आपदा का जोखिम भी बढ़ गया है।
देशभर में मानसून की इस नई सक्रियता के पीछे एक साथ बने आठ चक्रवाती सिस्टम (Cyclonic Circulations) और अनुकूल स्थिति में मौजूद मौसमी मानसूनी ट्रफ (Monsoon Trough) को प्रमुख वजह माना जा रहा है। यही मौसमीय व्यवस्था बंगाल की खाड़ी से लगातार नमी खींचकर उत्तर-पश्चिम, पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत तक पहुँचा रही है। हालांकि यह बारिश खरीफ़ फसलों और जलाशयों के लिए राहत लेकर आएगी, लेकिन पहाड़ी राज्यों में पहले से पानी से संतृप्त ढलानों के कारण हालात और गंभीर हो सकते हैं।
रविवार को जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और नागालैंड में बारिश से जुड़े हादसों में कम से कम 16 लोगों की मौत हो गई। सबसे अधिक नुकसान जम्मू-कश्मीर में हुआ, जहाँ पुंछ और राजौरी ज़िलों में मूसलाधार बारिश के बाद अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन से 11 लोगों की जान चली गई। भारत मौसम विभाग ने उत्तराखंड में सोमवार को, जम्मू-कश्मीर में अगले तीन दिनों तक और हिमाचल प्रदेश में अगले दो दिनों तक भारी से अत्यधिक भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। विभाग ने चेतावनी दी है कि इन राज्यों में भूस्खलन, अचानक बाढ़ और नदियों का जलस्तर बढ़ने की आशंका बनी हुई है।
पूर्वोत्तर भारत में भी बारिश का दौर तेज़ है। सोमवार सुबह 5:30 बजे तक असम और मेघालय के कुछ इलाक़ों में अत्यधिक भारी बारिश दर्ज की गई, जबकि पूर्वोत्तर के पहाड़ी ज़िलों में भारी से बहुत भारी वर्षा हुई। बिहार के कुछ हिस्सों में भी भारी बारिश रिकॉर्ड की गई।
मौजूदा समय में पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी और उससे लगे आंध्र प्रदेश तट के ऊपर ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय है। इसके साथ मौसमी मानसूनी ट्रफ राजस्थान के गंगानगर से दिल्ली, लखनऊ, रांची और दीघा होते हुए उत्तर-पूर्व बंगाल की खाड़ी तक फैली हुई है। इसी दौरान उत्तर भारत और आसपास के क्षेत्रों में एक साथ आठ चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय हैं। इन सभी प्रणालियों ने मिलकर बंगाल की खाड़ी से उत्तर भारत और हिमालय की तराई तक नमी का एक लगातार मार्ग तैयार कर दिया है। यही वजह है कि उत्तर-पश्चिम, पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में मानसून पूरे सप्ताह सक्रिय बने रहने की संभावना है।
मौसमीय परिस्थितियाँ बंगाल की खाड़ी में एक और निम्न दबाव क्षेत्र बनने के लिए भी अनुकूल हैं। यदि ऐसा होता है तो यह मौजूदा श्रृंखला का तीसरा निम्न दबाव क्षेत्र होगा, जिससे पूर्वी और उत्तर-पश्चिम भारत में बारिश का दौर और लंबा खिंच सकता है।
मौजूदा तेज़ बारिश के बावजूद पूरे मानसून सीज़न की तस्वीर अलग दिखाई दे रही है। वैश्विक मौसम मॉडल संकेत दे रहे हैं कि मानसून का सबसे सक्रिय चरण जुलाई के पहले सप्ताह में ही पूरा हो चुका हो सकता है। मौजूदा बारिश का दौर समाप्त होने के बाद देश के बड़े हिस्से में वर्षा सामान्य या सामान्य से कम रहने की संभावना है। इस बदलाव की बड़ी वजह अल नीनो का लगातार मज़बूत होना है। इसका प्रभाव मानसून पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। भले ही बंगाल की खाड़ी में आगे भी नए निम्न दबाव क्षेत्र बनते रहें, लेकिन जुलाई के पहले सप्ताह जैसी देशव्यापी तेज़ बारिश दोबारा देखने की संभावना कम मानी जा रही है।
उत्तर-पश्चिम भारत: अगले सात दिनों तक हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर-लद्दाख और उत्तराखंड में व्यापक बारिश होने का अनुमान है। हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली और पंजाब में अगले चार दिन तथा उत्तर प्रदेश में अगले पाँच दिन तक बारिश जारी रह सकती है। पूर्वी राजस्थान में गुरुवार से बारिश की गतिविधियाँ बढ़ेंगी। जम्मू-कश्मीर-लद्दाख में गुरुवार, हिमाचल प्रदेश में बुधवार, उत्तराखंड में मंगलवार तथा हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, पंजाब और उत्तर प्रदेश में अगले तीन दिनों तक कहीं-कहीं बहुत भारी बारिश हो सकती है।
मध्य भारत: मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और विदर्भ में बारिश धीरे-धीरे तेज़ होगी। पूर्वी मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में पूरे सप्ताह व्यापक वर्षा का अनुमान है।
पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत: सोमवार को असम, मेघालय और पश्चिम बंगाल के पहाड़ी क्षेत्रों में बहुत भारी बारिश हो सकती है। बिहार में सप्ताह के दूसरे हिस्से में, ओडिशा में अगले तीन दिनों तक तथा अरुणाचल प्रदेश समेत अधिकांश पूर्वोत्तर राज्यों में लगभग पूरे सप्ताह बारिश जारी रहने का अनुमान है।
पश्चिम और दक्षिण भारत: कोंकण-गोवा में पूरे सप्ताह व्यापक बारिश जारी रहेगी। मध्य महाराष्ट्र और पूर्वी गुजरात में भी भारी बारिश की संभावना है। वहीं केरल, माहे और लक्षद्वीप में व्यापक वर्षा होगी, जबकि तटीय आंध्र प्रदेश, रायलसीमा, तेलंगाना, तमिलनाडु और आंतरिक कर्नाटक में अगले सात दिनों तक हल्की से मध्यम और कई स्थानों पर अच्छी बारिश होने का अनुमान है।
यह बारिश कई राज्यों में खरीफ़ फसलों के लिए फ़ायदेमंद साबित होगी और जलाशयों का जलस्तर भी बढ़ाएगी। हालांकि हिमालयी राज्यों में पहले से भीगी ढलानों के कारण भूस्खलन, अचानक बाढ़ और बुनियादी ढाँचे को नुकसान पहुँचने का ख़तरा अभी भी बना हुआ है।
देशभर में मानसून की इस नई सक्रियता के पीछे एक साथ बने आठ चक्रवाती सिस्टम (Cyclonic Circulations) और अनुकूल स्थिति में मौजूद मौसमी मानसूनी ट्रफ (Monsoon Trough) को प्रमुख वजह माना जा रहा है। यही मौसमीय व्यवस्था बंगाल की खाड़ी से लगातार नमी खींचकर उत्तर-पश्चिम, पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत तक पहुँचा रही है। हालांकि यह बारिश खरीफ़ फसलों और जलाशयों के लिए राहत लेकर आएगी, लेकिन पहाड़ी राज्यों में पहले से पानी से संतृप्त ढलानों के कारण हालात और गंभीर हो सकते हैं।
हिमालयी राज्यों में तबाही जारी, 16 लोगों की मौत
पूर्वोत्तर भारत में भी बारिश का दौर तेज़ है। सोमवार सुबह 5:30 बजे तक असम और मेघालय के कुछ इलाक़ों में अत्यधिक भारी बारिश दर्ज की गई, जबकि पूर्वोत्तर के पहाड़ी ज़िलों में भारी से बहुत भारी वर्षा हुई। बिहार के कुछ हिस्सों में भी भारी बारिश रिकॉर्ड की गई।
8 चक्रवाती सिस्टम और मानसूनी ट्रफ ने बदला मौसम, बंगाल की खाड़ी से लगातार पहुँच रही नमी
मौसमीय परिस्थितियाँ बंगाल की खाड़ी में एक और निम्न दबाव क्षेत्र बनने के लिए भी अनुकूल हैं। यदि ऐसा होता है तो यह मौजूदा श्रृंखला का तीसरा निम्न दबाव क्षेत्र होगा, जिससे पूर्वी और उत्तर-पश्चिम भारत में बारिश का दौर और लंबा खिंच सकता है।
अल नीनो का असर रहेगा बरकरार, जुलाई जैसी देशव्यापी बारिश दोबारा मिलने की उम्मीद कम
कहाँ होगी सबसे ज़्यादा बारिश? जानिए पूरे सप्ताह का मौसम पूर्वानुमान
मध्य भारत: मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और विदर्भ में बारिश धीरे-धीरे तेज़ होगी। पूर्वी मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में पूरे सप्ताह व्यापक वर्षा का अनुमान है।
पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत: सोमवार को असम, मेघालय और पश्चिम बंगाल के पहाड़ी क्षेत्रों में बहुत भारी बारिश हो सकती है। बिहार में सप्ताह के दूसरे हिस्से में, ओडिशा में अगले तीन दिनों तक तथा अरुणाचल प्रदेश समेत अधिकांश पूर्वोत्तर राज्यों में लगभग पूरे सप्ताह बारिश जारी रहने का अनुमान है।
पश्चिम और दक्षिण भारत: कोंकण-गोवा में पूरे सप्ताह व्यापक बारिश जारी रहेगी। मध्य महाराष्ट्र और पूर्वी गुजरात में भी भारी बारिश की संभावना है। वहीं केरल, माहे और लक्षद्वीप में व्यापक वर्षा होगी, जबकि तटीय आंध्र प्रदेश, रायलसीमा, तेलंगाना, तमिलनाडु और आंतरिक कर्नाटक में अगले सात दिनों तक हल्की से मध्यम और कई स्थानों पर अच्छी बारिश होने का अनुमान है।
यह बारिश कई राज्यों में खरीफ़ फसलों के लिए फ़ायदेमंद साबित होगी और जलाशयों का जलस्तर भी बढ़ाएगी। हालांकि हिमालयी राज्यों में पहले से भीगी ढलानों के कारण भूस्खलन, अचानक बाढ़ और बुनियादी ढाँचे को नुकसान पहुँचने का ख़तरा अभी भी बना हुआ है।