मानसून और युद्ध का डबल असर! खाद सब्सिडी का 20% बजट सिर्फ दो महीने में खर्च, अब सरकार ने उठाया यह कदम
Gaon Connection | Jun 02, 2026, 11:23 IST
खाद सब्सिडी पर दबाव बढ़ने के बीच सरकार ने खरीफ सीजन के लिए उर्वरकों की मांग का अनुमान घटा दिया है। दो महीनों में ही सब्सिडी बजट का 20 प्रतिशत खर्च हो चुका है। सामान्य से कम मानसून और एल नीनो की आशंका को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। वहीं सरकार ने किसानों से रासायनिक खाद का संतुलित उपयोग करने की अपील की है।
खाद सब्सिडी पर बढ़ा दबाव
पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और मानसून को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच केंद्र सरकार ने खरीफ सीजन के लिए उर्वरकों की मांग का अनुमान घटा दिया है। सरकार को आशंका है कि सामान्य से कम बारिश और एल नीनो का असर कृषि गतिविधियों पर पड़ सकता है। वहीं चालू वित्त वर्ष के पहले दो महीनों में ही खाद सब्सिडी के लिए आवंटित बजट का 20 प्रतिशत खर्च हो चुका है, जिससे सब्सिडी पर दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है।
उर्वरक विभाग की अतिरिक्त सचिव अपर्णा एस. शर्मा ने बताया कि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए खाद सब्सिडी मद में आवंटित राशि का करीब 20 प्रतिशत पहले दो महीनों में ही खर्च हो चुका है। हालांकि उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर वित्त मंत्रालय से अतिरिक्त धनराशि की मांग की जाएगी। केंद्रीय बजट 2026-27 में उर्वरक सब्सिडी के लिए 1.70 लाख करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया गया है। इसमें यूरिया क्षेत्र के लिए 1.16 लाख करोड़ रुपये और फॉस्फोरस एवं पोटाश आधारित उर्वरकों के लिए 54 हजार करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
सरकारी अधिकारियों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक बना रहता है और कच्चे माल व तैयार उर्वरकों की वैश्विक कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो चालू वित्त वर्ष में खाद सब्सिडी 3 लाख करोड़ रुपये से भी अधिक हो सकती है। यदि हालात और बिगड़ते हैं तथा होरमुज जलडमरूमध्य में व्यवधान जारी रहता है, तो यह आंकड़ा 3.5 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।
भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने इस वर्ष मानसून को सामान्य से कम रहने का अनुमान जताया है। हाल ही में विभाग ने वर्षा के अनुमान को दीर्घकालिक औसत (LPA) के 92 प्रतिशत से घटाकर 90 प्रतिशत कर दिया है। इसी को देखते हुए कृषि मंत्रालय ने खरीफ सीजन के लिए उर्वरकों की मांग का अनुमान कम कर दिया है। यूरिया की मांग, जो पहले 1.94 करोड़ टन आंकी गई थी, उसे घटाकर 1.90 करोड़ टन कर दिया गया है। सरकार का मानना है कि कमजोर मानसून की स्थिति में उर्वरकों की खपत प्रभावित हो सकती है।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को मध्य प्रदेश के रामसिया गांव से "खेत बचाओ अभियान" की शुरुआत की। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का अंधाधुंध इस्तेमाल न करें। उन्होंने कहा कि मिट्टी परीक्षण की रिपोर्ट के आधार पर ही खाद का उपयोग किया जाना चाहिए, ताकि मिट्टी की सेहत बनी रहे और लागत भी कम हो।
सरकार के अनुसार खरीफ सीजन की जरूरत के मुकाबले वर्तमान में उर्वरकों का भंडार 51 प्रतिशत तक पहुंच चुका है, जबकि सामान्य तौर पर 33 प्रतिशत स्टॉक बनाए रखा जाता है। बेहतर लॉजिस्टिक्स और अग्रिम भंडारण के कारण इस बार स्थिति अपेक्षाकृत मजबूत बताई जा रही है। पश्चिम एशिया संकट के बाद मार्च से मई के बीच देश में 1.04 करोड़ टन उर्वरकों का घरेलू उत्पादन हुआ, जबकि 27.6 लाख टन आयात किया गया। इस तरह कुल उपलब्धता 1.32 करोड़ टन रही।
उपभोक्ता मामलों के विभाग के अनुसार अनाज, दाल और चीनी की कीमतें फिलहाल स्थिर बनी हुई हैं। आलू, प्याज और टमाटर की कीमतों में भी कोई असामान्य उतार-चढ़ाव नहीं देखा गया है। सरकार के पास दालों का बफर स्टॉक 43 लाख टन तक पहुंच गया है, जो पहले 18 लाख टन था। इसके चलते दालों की कीमतों में स्थिरता रहने की उम्मीद जताई गई है। वहीं सरकार के पास 1 जुलाई के लिए निर्धारित 1.35 करोड़ टन के बफर मानक के मुकाबले 6.95 करोड़ टन चावल का भंडार मौजूद है। खाद्य तेलों की उपलब्धता भी पर्याप्त बताई गई है, क्योंकि इंडोनेशिया, मलेशिया, रूस, यूक्रेन, अर्जेंटीना और ब्राजील से आयात सामान्य रूप से जारी है।