Monsoon Animal Disease: मानसून में पशुपालक रहें सतर्क, इस बीमारी से हो सकती है मवेशियों की मौत, समय पर टीकाकरण ही बचाव
Preeti Nahar | Jun 07, 2026, 15:58 IST
मानसून की बारिश जहाँ किसानों के लिए राहत लेकर आती है, वहीं पशुपालकों के लिए कई बीमारियों का खतरा भी बढ़ा देती है। इन्हीं में से एक है गलघोंटू (हेमरेजिक सेप्टीसीमिया) बीमारी, जो गाय, भैंस और अन्य दुधारू पशुओं के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। पशु चिकित्सकों का कहना है कि समय पर टीकाकरण और साफ-सफाई अपनाकर इस बीमारी से बड़े नुकसान को रोका जा सकता है।
गलघोंटू बीमारी-बारिश के मौसम में बढ़ जाता है खतरा
वहीं पशुपालन, किसानों की आय का बड़ा सहारा है। ऐसे में यदि दुधारू पशु बीमार पड़ जाएं या उनकी मौत हो जाए तो परिवार की आमदनी पर सीधा असर पड़ता है। इसलिए मानसून से पहले ही सावधानी बरतना बेहद जरूरी है।
क्या है गलघोंटू बीमारी?
लक्षणों की बात करें तो बीमारी होने पर पशु को तेज बुखार आता है, सांस लेने में परेशानी होती है और गले तथा गर्दन के आसपास सूजन दिखाई देने लगती है। कई मामलों में बीमारी इतनी तेजी से बढ़ती है कि 24 से 48 घंटे के भीतर पशु की मौत भी हो सकती है।
किन पशुओं में अधिक खतरा?
बीमारी के प्रमुख लक्षण
- तेज बुखार आना
- भूख कम लगना
- सांस लेने में कठिनाई
- मुंह और नाक से पानी निकलना
- गले और गर्दन में सूजन
- अत्यधिक कमजोरी और सुस्ती
- यदि इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई दे तो तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।
टीकाकरण ही सबसे प्रभावी बचाव
साफ-सफाई का भी रखें विशेष ध्यान
- टीकाकरण के साथ-साथ पशुशाला की सफाई भी बेहद जरूरी है।
- पशुओं के रहने की जगह पर पानी जमा नहीं होने देना चाहिए।
- इसके अलावा चारे और पीने के पानी को साफ रखना चाहिए।
- बीमार पशु को तुरंत स्वस्थ पशुओं से अलग कर देना चाहिए ताकि संक्रमण अन्य पशुओं तक न फैले।