मछुआरों और किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी! MP में ₹7,430 करोड़ का निवेश, 4 लाख टन बढ़ेगा मछली उत्पादन

Lata Mishra | Jul 07, 2026, 12:29 IST
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मध्य प्रदेश का मत्स्य पालन क्षेत्र अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चमकेगा! कुवैत की ज़बेदी अल कुवैत फिशरीज और इंदौर की कामदार्स केयर के बीच 7,430 करोड़ का बड़ा निवेश और बाय-बैक समझौता हुआ है। इससे 35,000 नई नौकरियां, 4 लाख टन मछली और 1.23 लाख टन सब्जी उत्पादन बढ़ेगा, साथ ही 6,000 करोड़ का निर्यात होगा।

सरकार के मुताबिक, इस परियोजना के जरिए करीब 4 लाख टन अतिरिक्त मछली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।<br>
सरकार के मुताबिक, इस परियोजना के जरिए करीब 4 लाख टन अतिरिक्त मछली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।
मध्य प्रदेश अब केवल खेती ही नहीं, बल्कि मत्स्य पालन (Fisheries) के क्षेत्र में भी देश के बड़े निवेश केंद्र के रूप में उभरने की तैयारी कर रहा है। राज्य सरकार की मौजूदगी में कुवैत की अग्रणी ज़बेदी अल कुवैत फिशरीज कंपनी और इंदौर की कामदार्स केयर के बीच 7,430 करोड़ रुपये के निवेश और बाय-बैक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं। यह निवेश राज्य के मत्स्य पालन क्षेत्र को आधुनिक तकनीक, निर्यात और वैल्यू एडिशन से जोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी में हुए इस समझौते को मध्य प्रदेश एकीकृत मत्स्य उद्योग नीति-2026 के तहत लागू किया जाएगा। सरकार का कहना है कि इससे राज्य में मत्स्य उत्पादन बढ़ेगा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और हजारों युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर बनेंगे।

किन जलाशयों में होगा काम?
इस परियोजना के तहत मध्य प्रदेश के चार बड़े जलाशयों-

  • इंदिरा सागर
  • बरगी
  • बाणसागर
  • बारना
में आधुनिक केज कल्चर (Cage Culture) आधारित मत्स्य पालन विकसित किया जाएगा। इसके अलावा बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंकेज, फिश प्रोसेसिंग, कोल्ड चेन, स्टोरेज और लॉजिस्टिक्स से जुड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर भी तैयार किया जाएगा।

क्या है केज कल्चर?
केज कल्चर ऐसी तकनीक है जिसमें झील या जलाशय के भीतर मजबूत जालदार पिंजरों (केज) में वैज्ञानिक तरीके से मछलियां पाली जाती हैं। इसमें पानी बदलने की आवश्यकता नहीं होती, मछलियों की निगरानी आसान रहती है और कम क्षेत्र में अधिक उत्पादन लिया जा सकता है। यही वजह है कि दुनिया के कई देशों में इस तकनीक का तेजी से इस्तेमाल बढ़ रहा है।

4 लाख टन अतिरिक्त मछली उत्पादन का लक्ष्य
सरकार के मुताबिक, इस परियोजना के जरिए करीब 4 लाख टन अतिरिक्त मछली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही एक्वापोनिक्स, हाइड्रोपोनिक्स और ग्रीनहाउस तकनीक की मदद से 1.23 लाख टन सब्जियों का भी उत्पादन किया जाएगा। मतलब यह परियोजना केवल मत्स्य पालन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि आधुनिक कृषि और मत्स्य पालन को एक साथ जोड़ने का मॉडल भी विकसित करेगी।

35 हजार लोगों को मिलेगा रोजगार
इस निवेश से लगभग 15,000 प्रत्यक्ष और 20,000 अप्रत्यक्ष, यानी कुल 35,000 रोजगार सृजित होने का अनुमान है। रोजगार के अवसर केवल मछली उत्पादन तक सीमित नहीं होंगे। फिश प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, कोल्ड स्टोरेज, परिवहन, फीड निर्माण, मशीन संचालन, गुणवत्ता जांच और निर्यात जैसे क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में नौकरियां पैदा होंगी।

किसानों और मछुआरों को क्या मिलेगा फायदा?
ग्रामीण इलाकों में आज भी बड़ी मात्रा में मछली उत्पादन होने के बावजूद किसानों और मछुआरों को उचित कीमत नहीं मिल पाती। इसकी मुख्य वजह प्रोसेसिंग और कोल्ड स्टोरेज जैसी सुविधाओं का अभाव है।

नई परियोजना के बाद-

  • मछलियों की गुणवत्ता लंबे समय तक सुरक्षित रहेगी।
  • बाजार तक पहुंच आसान होगी।
  • वैल्यू एडिशन होने से बेहतर दाम मिल सकेंगे।
  • निर्यात के अवसर बढ़ेंगे।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय रोजगार पैदा होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे मत्स्य पालन किसानों की अतिरिक्त आय का मजबूत स्रोत बन सकता है।

6,000 करोड़ रुपये के निर्यात का लक्ष्य
राज्य सरकार ने इस परियोजना के माध्यम से करीब 6,000 करोड़ रुपये के मत्स्य उत्पादों के निर्यात का लक्ष्य रखा है। यदि यह लक्ष्य हासिल होता है, तो मध्य प्रदेश देश के प्रमुख अंतर्देशीय मत्स्य निर्यातक राज्यों में अपनी मजबूत पहचान बना सकता है। इससे राज्य में विदेशी मुद्रा अर्जन के साथ-साथ निजी निवेश भी बढ़ने की संभावना है।

क्यों खास है यह निवेश?
मध्य प्रदेश समुद्र तट वाला राज्य नहीं है, लेकिन यहां देश के सबसे बड़े जलाशयों और बांधों का विशाल नेटवर्क मौजूद है। यही वजह है कि राज्य अंतर्देशीय मत्स्य पालन (Inland Fisheries) में लगातार आगे बढ़ रहा है। सरकार का कहना है कि विदेशी निवेश, आधुनिक तकनीक और बेहतर बाजार व्यवस्था के जरिए राज्य के मछुआरों की आय बढ़ाई जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी कहा कि कृषि के साथ मत्स्य पालन किसानों की आय बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है और सरकार इसे वैश्विक स्तर तक ले जाने के लिए काम कर रही है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया सहारा
मत्स्य पालन केवल मछली पकड़ने तक सीमित नहीं है। इससे जुड़ी पूरी वैल्यू चेन-हैचरी, फीड, केज निर्माण, प्रोसेसिंग, कोल्ड चेन, परिवहन, पैकेजिंग और निर्यात-ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा करती है। ऐसे में 7,430 करोड़ रुपये का यह निवेश केवल एक औद्योगिक परियोजना नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था, किसानों और मछुआरा समुदाय के लिए आय बढ़ाने का बड़ा अवसर भी माना जा रहा है। यदि परियोजना तय समय पर लागू होती है, तो मध्य प्रदेश देश के सबसे बड़े आधुनिक मत्स्य उत्पादन और निर्यात केंद्रों में शामिल हो सकता है।
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