Cyber Fraud Alert: एक गलती और आपका बैंक अकाउंट हो सकता है ब्लॉक! जानिए क्या है Mule Account

Gaon Connection | May 12, 2026, 17:39 IST
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भारत में बढ़ते ऑनलाइन ठगी को रोकने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) और रिजर्व बैंक इनोवेशन हब (RBIH) ने एक समझौता किया है। अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से ऐसे बैंक खातों की पहचान की जाएगी जिनका इस्तेमाल साइबर अपराधी ठगी के पैसों को छिपाने के लिए करते हैं।
AI आधारित फ्रॉड डिटेक्शन सिस्टम
AI आधारित फ्रॉड डिटेक्शन सिस्टम
भारत में बढ़ते साइबर फ्रॉड और ऑनलाइन ठगी के मामलों के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाले भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र यानी I4C और रिजर्व बैंक इनोवेशन हब (RBIH) ने एक समझौता (MoU) किया है। इसका मकसद ऐसे बैंक खातों की पहचान करना है जिनका इस्तेमाल साइबर अपराधी लोगों से ठगे गए पैसे को इधर-उधर भेजने में करते हैं। इन्हें “म्यूल अकाउंट” कहा जाता है।

सरकार अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से ऐसे खातों को जल्दी पकड़ने और बंद करने की तैयारी कर रही है। इससे आम लोगों की मेहनत की कमाई को ऑनलाइन ठगी से बचाने में मदद मिलेगी।

आखिर क्या होते हैं Mule Accounts?

म्यूल अकाउंट ऐसे बैंक खाते होते हैं जिनका इस्तेमाल साइबर अपराधी चोरी या ठगी के पैसों को छिपाने और ट्रांसफर करने के लिए करते हैं। कई बार अपराधी किसी गरीब, छात्र, बेरोजगार युवक या अनजान व्यक्ति को पैसे का लालच देकर उसका बैंक खाता इस्तेमाल करते हैं।

उदाहरण के तौर पर, अगर किसी व्यक्ति के साथ ऑनलाइन फ्रॉड होता है, तो ठगा गया पैसा सीधे अपराधी के खाते में नहीं जाता। वह पहले कई अलग-अलग खातों में घुमाया जाता है ताकि पुलिस और बैंक उसे ट्रैक न कर सकें। यही खाते “म्यूल अकाउंट” कहलाते हैं। कई लोग बिना जानकारी के भी साइबर अपराधियों के जाल में फंस जाते हैं। कुछ लोग अपना ATM कार्ड, बैंक पासबुक या UPI एक्सेस दूसरों को देकर खुद भी कानूनी परेशानी में पड़ जाते हैं।

सरकार ने क्या नया कदम उठाया?

I4C और RBIH के बीच हुए इस समझौते के बाद अब साइबर अपराध से जुड़े संदिग्ध खातों का डेटा AI सिस्टम को दिया जाएगा। RBIH की AI आधारित प्रणाली “MuleHunter.ai” ऐसे खातों की पहचान करेगी जिनमें संदिग्ध लेनदेन हो रहे हैं। सरकार का कहना है कि इससे छिपे हुए म्यूल अकाउंट तेजी से पकड़े जा सकेंगे और साइबर फ्रॉड नेटवर्क को तोड़ने में मदद मिलेगी।

आम लोगों के लिए यह क्यों जरूरी है?

यह पहल सीधे तौर पर आम बैंक ग्राहकों और डिजिटल पेमेंट यूजर्स की सुरक्षा से जुड़ी है। आज UPI, नेट बैंकिंग और डिजिटल पेमेंट तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन साथ ही ऑनलाइन ठगी के मामले भी बढ़े हैं। अगर म्यूल अकाउंट जल्दी पकड़ लिए जाते हैं, तो-

  1. ठगी का पैसा जल्दी ट्रैक हो सकेगा
  2. साइबर अपराधियों तक पहुँचना आसान होगा
  3. लोगों के पैसे वापस मिलने की संभावना बढ़ेगी
  4. बैंकिंग सिस्टम ज्यादा सुरक्षित बनेगा
  5. यानी यह कदम डिजिटल इंडिया को सुरक्षित बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

अमित शाह ने क्या कहा?

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री Amit Shah ने कहा कि मोदी सरकार “साइबर सुरक्षित भारत” बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि म्यूल अकाउंट साइबर अपराध रोकने में बड़ी चुनौती हैं और AI तकनीक की मदद से अब ऐसे खातों को तेजी से पहचानकर खत्म किया जाएगा। उनके अनुसार, यह व्यवस्था नागरिकों को साइबर अपराध के खिलाफ “नेक्स्ट जेनरेशन शील्ड” देने का काम करेगी।

लोगों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

विशेषज्ञों का कहना है कि आम लोगों को कभी भी:

  • अपना बैंक खाता किराए पर नहीं देना चाहिए
  • ATM कार्ड, OTP या UPI PIN साझा नहीं करना चाहिए
  • अनजान लोगों के लिए पैसे ट्रांसफर नहीं करने चाहिए
  • “घर बैठे कमाई” जैसे ऑफर से सावधान रहना चाहिए क्योंकि आपका बैंक खाता अगर साइबर अपराध में इस्तेमाल हुआ, तो जांच एजेंसियां आप तक भी पहुंच सकती हैं।

डिजिटल बैंकिंग को सुरक्षित बनाने की कोशिश

RBIH और I4C का यह सहयोग भारत में डिजिटल बैंकिंग और ऑनलाइन पेमेंट सिस्टम को ज्यादा सुरक्षित बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। AI तकनीक की मदद से अब साइबर अपराधियों के नेटवर्क को तेजी से पहचानने और रोकने की कोशिश की जाएगी, जिससे आम नागरिकों का डिजिटल लेनदेन पर भरोसा और मजबूत हो सके।
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