नन्द बाबा दुग्ध मिशन: UP में बढ़ रही ग्रामीणों की आमदनी, बदल रहीं ज़िंदगियां

Gaon Connection | Oct 19, 2026, 16:29 IST
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उत्तर प्रदेश में शुरू किया गया 'नन्द बाबा दुग्ध मिशन' किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार लाने के साथ-साथ बदलाव की नई कहानी लिख रहा है। इसमें पशुपालकों को स्वदेशी नस्ल की गायों को पालने के लिए आर्थिक सहायता दी जा रही है। ग्रामीण अपनी सुविधानुसार गायों की संख्या चुन सकते हैं।

यूपी में नंद बाबा दुग्ध मिशन से बढ़ रही ग्रामीणों की आमदनी।
यूपी में नंद बाबा दुग्ध मिशन से बढ़ रही ग्रामीणों की आमदनी।
खेती के साथ पशुपालन किसानों की आमदनी बढ़ाने में काफी मददगार रहता है। इससे मजबूत होती है ग्रामीण अर्थव्यवस्था। यूपी में ग्रामीणों की आय बढ़ाने के लिए ‘नन्द बाबा दुग्ध मिशन’की शुरुआत की गई है। जिसका उद्देश्य पशुपालकों को अच्छी नस्ल के पशु, उचित संसाधन और दूध का सही मूल्य उपलब्ध कराना है। करीब एक हजार करोड़ रुपये के निवेश से शुरू इस मिशन के तहत गाँवों में दुग्ध सहकारी समितियों को मजबूत करने पर भी जोर दिया जा रहा है। जिससे पशुपालकों को दूध बेचने के लिए दूर न जाना पड़े और बिचौलियों पर निर्भरता कम हो।

यूपी में पशुपालन से कैसे बदली जिंदगी?

उत्तर प्रदेश के जिला सहारनपुर के रामपुर मनियारण के ग्राम पंचायत महेशपुर की रहने वाली अनुपेक्षा ने क्रॉस-ब्रीड की 50 गायों के साथ डेयरी का काम शुरू किया था। पशुपालन विभाग के अधिकारियों की सलाह पर उन्होंने स्वदेशी नस्ल की गायों की ओर ध्यान दिया और ‘नन्दिनी कृषक योजना’ के तहत आगे बढ़ने का फैसला किया।

अनुपेक्षा बताती हैं, "निवेश और दुग्ध उत्पादन के लिहाज से गायों की छोटी इकाई भी लाभ का अच्छा अवसर बन सकती है। सही नस्ल और बेहतर प्रबंधन के साथ पशुपालन परिवार की आमदनी बढ़ाने का जरिया बन सकता है।"

अनुपेक्षा के पति अमित कुमार भी इस काम में उनका सहयोग करते हैं। अमित बताते हैं, "इस समय हर रोज लगभग 250 किलो दूध का उत्पादन कर रहे हैं। पशुपालन से हमें आय का नियमित आमदनी का जरिया मिल गया है। पहले आमदनी मुख्य रूप से खेती पर निर्भर थी, जिससे पैसा फसल के मौसम के अनुसार मिलता था। अब डेयरी से हर महीने आमदनी होती है।"

गौपालन से बदल गई सहारनपुर की अनुपेक्षा की किस्मत।
गौपालन से बदल गई सहारनपुर की अनुपेक्षा की किस्मत।

सहारनपुर की ही रहने वाली जीविका तोमर भी पशुपालन को केवल दूध उत्पादन तक सीमित नहीं मानतीं। वह बताती हैं, "गोबर और गौमूत्र का उपयोग करके प्राकृतिक खेती में कई उपयोगी उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं, जिससे पशुपालन की उपयोगिता और बढ़ जाती है।"

स्वदेशी नस्लों को बढ़ावा

पशुपालकों को बेहतर नस्ल के पशु पालने और डेयरी गतिविधियों का विस्तार करने में मदद देने के लिए सरकार कई योजनाएँ चला रही है-

मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ-संवर्धन योजना

इसके अंतर्गत दो गायों की इकाई पर निर्धारित लागत का 40 प्रतिशत, अधिकतम 80 हजार रुपये तक अनुदान देने का प्रावधान है। इसका उद्देश्य स्वदेशी और उन्नत नस्ल की गायों को बढ़ावा देना तथा पशुपालकों को डेयरी व्यवसाय शुरू करने में सहायता देना है।

इस संबंध में उत्तर प्रदेश सरकार के अपर मुख्य सचिव, पशुपालन, मुकेश मेश्राम बताते हैं, "योजना में गायों की खरीद के साथ शेड तैयार करने जैसी लागत को ध्यान में रखा गया है। चालू वित्तीय वर्ष में नन्द बाबा दुग्ध मिशन के अंतर्गत 350 करोड़ रुपये उपलब्ध हैं और प्रतीक्षा सूची में शामिल पात्र आवेदकों को भी योजना का लाभ देने की प्रक्रिया की जा रही है।"

योजनाओं की जानकारी देते यूपी के अपर मुख्य सचिव दुग्ध विकास मुकेश मेश्राम।
योजनाओं की जानकारी देते यूपी के अपर मुख्य सचिव दुग्ध विकास मुकेश मेश्राम।

यूपी के पशुपालन निदेशक डॉ. राजेन्द्र प्रसाद के अनुसार, इस योजना में दो गायों की इकाई के लिए प्रावधान है और निर्धारित मानकों के अनुसार अच्छी नस्ल की गायों की खरीद पर 40 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है।

इस योजना के बारे में सहारनपुर के पशुपालक अमित कुमार बताते हैं, "स्वदेशी नस्लों की गायों को पालने से उन्हें पशुओं की देखभाल और स्वास्थ्य संबंधी खर्चों के प्रबंधन में भी मदद मिलती है। उनके अनुसार, स्वदेशी नस्लों में बेहतर रोग प्रतिरोधक क्षमता होने से दवाइयों पर होने वाला खर्च कम रखने में सहायता मिल सकती है।

डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, निदेशक, प्रशासन एवं दुग्ध विकास।
डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, निदेशक, प्रशासन एवं दुग्ध विकास।

छोटे डेयरी व्यवसाय से बड़ी इकाई तक

जो पशुपालक अपने अनुभव और मेहनत के दम पर दूध उत्पादन बढ़ाना चाहते हैं, उनके लिए ‘मुख्यमंत्री प्रगतिशील पशुपालक प्रोत्साहन योजना’ के तहत उच्च उत्पादकता वाली स्वदेशी नस्लों को पालने पर प्रोत्साहन राशि का प्रावधान है।

नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना

इसमें लाभार्थी बड़े स्तर पर डेयरी यूनिट स्थापित कर सकते हैं। इसके अंतर्गत 25 गायों की इकाई के लिए परियोजना लागत पर 50 प्रतिशत तक अनुदान का प्रावधान है। अपर मुख्य सचिव, पशुपालन मुकेश मेश्राम के अनुसार, "योजना के शुरुआती वर्षों में अपेक्षित परिणाम नहीं मिल रहे थे। इसके बाद डेयरी कॉन्क्लेव के माध्यम से योजना की जानकारी अधिक लोगों तक पहुंचाई गई और पशुपालकों के सुझावों के आधार पर संशोधन किए गए। उनके अनुसार, इससे लाभार्थियों की संख्या में वृद्धि हुई है।"

अमित कुमार के परिवार के लिए डेयरी का लाभ दूध की बिक्री तक सीमित नहीं है। वे गायों के गोबर से खाद तैयार करते हैं, और गोमूत्र को एकत्र करके खेती में भी इस्तेमाल करते हैं। इससे उनकी खेती में रासायनिक खादों पर निर्भरता कम हो गई है। अमित कुमार की पत्नी अनुपेक्षा बताती हैं, "डेयरी व्यवसाय से एक महीने में लगभग पाँच लाख रुपये की दूध बिक्री होती है। इसमें चारा, फीड और चोकर सहित करीब साढ़े तीन लाख रुपये तक का खर्च आता है। उनके अनुसार, खर्चों के बाद परिवार को लगभग डेढ़ से दो लाख रुपये तक की मासिक बचत हो जाती है।"

पशुपालन से आत्मनिर्भरता

उत्तर प्रदेश में पशुपालन की ये कहानियां दिखाती हैं कि सही मार्गदर्शन, बेहतर नस्ल के पशु, योजनाओं का सहयोग और व्यवस्थित प्रबंधन ग्रामीण परिवारों के लिए नए अवसर पैदा कर सकते हैं।

गाँवों से शहरों में दूध ले जाती है समितियां।
गाँवों से शहरों में दूध ले जाती है समितियां।

किसी किसान के लिए पशुपालन खेती के साथ अतिरिक्त आमदनी का साधन बन सकता है। किसी महिला के लिए यह परिवार की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने का अवसर है। वहीं, युवाओं के लिए गाँव में रहकर अपना व्यवसाय विकसित करने का रास्ता खुल सकता है।

नन्द बाबा दुग्ध मिशन और इससे जुड़ी योजनाओं का उद्देश्य दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ पशुपालकों की आय और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है। जब गाँव में ही रोजगार और नियमित आमदनी के अवसर बढ़ते हैं, तो पशुपालन केवल आजीविका का साधन नहीं रहता, बल्कि परिवारों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने और ग्रामीण विकास को गति देने का माध्यम भी बनता है।
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