Manish Mishra

GUEST

Manish Mishra

    Assam Flood 2026: दो हफ़्ते बाद भी बेघर हैं लोग, असम में बाढ़ का ख़ौफ़ बरकरार, जानें 'गाँव कनेक्शन'की टीम ने क्या-क्या देखा
    Assam Flood 2026: दो हफ़्ते बाद भी बेघर हैं लोग, असम में बाढ़ का ख़ौफ़ बरकरार, जानें 'गाँव कनेक्शन'की टीम ने क्या-क्या देखा

    By Manish Mishra

    असम के ऊपरी इलाक़ों में आई भीषण बाढ़ ने व्यापक तबाही मचाई है। दो सप्ताह बाद भी लोग बेघर हैं और राहत कार्य जारी है। शिवसागर ज़िले के नेपालकुटी गाँव में कई घर, मवेशी और आजीविका बह गई। 25 से 30 लोगों के लापता होने की आशंका है। स्थानीय लोगों के अनुसार, जलवायु परिवर्तन, नागालैंड की पहाड़ियों में भारी बारिश और अवैध खनन से आई गाद ने इस आपदा को और गंभीर बना दिया।

    असम के ऊपरी इलाक़ों में आई भीषण बाढ़ ने व्यापक तबाही मचाई है। दो सप्ताह बाद भी लोग बेघर हैं और राहत कार्य जारी है। शिवसागर ज़िले के नेपालकुटी गाँव में कई घर, मवेशी और आजीविका बह गई। 25 से 30 लोगों के लापता होने की आशंका है। स्थानीय लोगों के अनुसार, जलवायु परिवर्तन, नागालैंड की पहाड़ियों में भारी बारिश और अवैध खनन से आई गाद ने इस आपदा को और गंभीर बना दिया।

    पता नहीं कोई ज़िंदा बचेगा या नहीं, हम 20 साल पीछे चले गए, ₹1 से शुरुआत करनी पड़ेगी; जानें बाढ़ में  सब कुछ गँवाने वाली असम की सीमा की कहानी
    पता नहीं कोई ज़िंदा बचेगा या नहीं, हम 20 साल पीछे चले गए, ₹1 से शुरुआत करनी पड़ेगी; जानें बाढ़ में सब कुछ गँवाने वाली असम की सीमा की कहानी

    By Manish Mishra

    असम में आई भीषण बाढ़ ने लाखों लोगों की ज़िंदगी तबाह कर दी है। घर-बार, मवेशी और जीवन भर की कमाई सब कुछ पानी में बह गया है। लोग खुले आसमान के नीचे या सड़कों पर तिरपाल तानकर रहने को मजबूर हैं। भुखमरी और बीमारियों का डर सता रहा है, जबकि लगातार बारिश ने स्थिति को और भयावह बना दिया है।

    असम में आई भीषण बाढ़ ने लाखों लोगों की ज़िंदगी तबाह कर दी है। घर-बार, मवेशी और जीवन भर की कमाई सब कुछ पानी में बह गया है। लोग खुले आसमान के नीचे या सड़कों पर तिरपाल तानकर रहने को मजबूर हैं। भुखमरी और बीमारियों का डर सता रहा है, जबकि लगातार बारिश ने स्थिति को और भयावह बना दिया है।

    हर्बल खेती बनेगी कमाई का ज़रिया! सीखें  स्टीविया, तुलसी और जरेनियम की खेती; यहाँ मिल रही मुफ्त ट्रेनिंग
    हर्बल खेती बनेगी कमाई का ज़रिया! सीखें स्टीविया, तुलसी और जरेनियम की खेती; यहाँ मिल रही मुफ्त ट्रेनिंग

    By Manish Mishra

    कोरोना महामारी के बाद औषधीय पौधों और हर्बल उत्पादों की मांग बढ़ी है, जिससे किसानों के लिए नई संभावनाएं खुल रही हैं। तुलसी, स्टीविया, जरेनियम, हल्दी और बड़ी इलायची जैसी फसलें किसानों की आय बढ़ाने में मदद कर सकती हैं।

    कोरोना महामारी के बाद औषधीय पौधों और हर्बल उत्पादों की मांग बढ़ी है, जिससे किसानों के लिए नई संभावनाएं खुल रही हैं। तुलसी, स्टीविया, जरेनियम, हल्दी और बड़ी इलायची जैसी फसलें किसानों की आय बढ़ाने में मदद कर सकती हैं।

    बंगाल चुनाव परिणाम: मतदाताओं ने जताया नहीं, जिताया, क्या थी ज़मीनी हकीकत, जिससे हुआ परिवर्तन
    बंगाल चुनाव परिणाम: मतदाताओं ने जताया नहीं, जिताया, क्या थी ज़मीनी हकीकत, जिससे हुआ परिवर्तन

    By Manish Mishra

    पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के नतीजे चौंकाने वाले रहे। बीजेपी ने घुसपैठ, महिला सुरक्षा और केंद्र की योजनाओं को लागू करने जैसे मुद्दों को जनता तक पहुंचाया। टीएमसी के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप भी लगे। राज्य में परिवर्तन की लहर दिखी। किसानों और चाय बागान मजदूरों के लिए बीजेपी ने सुविधाएं देने का वादा किया।

    पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के नतीजे चौंकाने वाले रहे। बीजेपी ने घुसपैठ, महिला सुरक्षा और केंद्र की योजनाओं को लागू करने जैसे मुद्दों को जनता तक पहुंचाया। टीएमसी के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप भी लगे। राज्य में परिवर्तन की लहर दिखी। किसानों और चाय बागान मजदूरों के लिए बीजेपी ने सुविधाएं देने का वादा किया।

    Economic Survey 2025-26 : वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य में कृषि की भूमिका रहेगी अहम
    Economic Survey 2025-26 : वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य में कृषि की भूमिका रहेगी अहम

    By Manish Mishra

    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश आर्थिक सर्वेक्षण 2025-2026 के अनुसार पिछले पांच वर्षों में कृषि क्षेत्र ने औसतन 4.4 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि दर्ज़ की है, जिसमें पशुपालन और मत्स्य पालन का प्रमुख योगदान है। वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही में कृषि विकास दर 3.5 प्रतिशत रही।

    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश आर्थिक सर्वेक्षण 2025-2026 के अनुसार पिछले पांच वर्षों में कृषि क्षेत्र ने औसतन 4.4 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि दर्ज़ की है, जिसमें पशुपालन और मत्स्य पालन का प्रमुख योगदान है। वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही में कृषि विकास दर 3.5 प्रतिशत रही।

    Aravali Diaries : धमाके की धमक से रात में चौंक जाते हैं बच्चे, घुट रहीं ज़िंदगियां।
    Aravali Diaries : धमाके की धमक से रात में चौंक जाते हैं बच्चे, घुट रहीं ज़िंदगियां।

    By Manish Mishra

    अंधाधुंध खनन से खोखली हो रही अरावली पहाड़यों के साथ-साथ आस पास के गाँवों में रहने वाले लोगों के सपने बिखर रहे हैं। रात-दिन होने वाले खनन के धमाकों से यहां रहने वाले लोगों के घरों में दरारें आ गई हैं। घरों के पास नियम विरुद्ध खनन से उड़ने वाला धूल के गुबार से जीना दूभर है। तरह तरह की बीमारियां हो रही हैं।

    अंधाधुंध खनन से खोखली हो रही अरावली पहाड़यों के साथ-साथ आस पास के गाँवों में रहने वाले लोगों के सपने बिखर रहे हैं। रात-दिन होने वाले खनन के धमाकों से यहां रहने वाले लोगों के घरों में दरारें आ गई हैं। घरों के पास नियम विरुद्ध खनन से उड़ने वाला धूल के गुबार से जीना दूभर है। तरह तरह की बीमारियां हो रही हैं।

    Air Pollution से बढ़ रहीं कौन सी बीमारियां ?
    Air Pollution से बढ़ रहीं कौन सी बीमारियां ?

    By Manish Mishra

    हवा में बढ़ता प्रदूषण खतरे की घंटी बन रहा है। इससे कई तरह की बीमारियां भी तेजी से लोगों में बढ़ रही हैं। सबसे बड़ी चिंता है देश में हवा के प्रदूषण से होने वाली हर साल 15 लाख लोग जान गंवा देते हैं। ये कितना है खतरनाक और इससे बचाव के लिए क्या उठाने होंगे कदम? इस पर King George Medical University के पल्मोनरी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) वेद प्रकाश से ‘गाँव कनेक्शन’ के मनीष मिश्र की विशेष बातचीत।

    हवा में बढ़ता प्रदूषण खतरे की घंटी बन रहा है। इससे कई तरह की बीमारियां भी तेजी से लोगों में बढ़ रही हैं। सबसे बड़ी चिंता है देश में हवा के प्रदूषण से होने वाली हर साल 15 लाख लोग जान गंवा देते हैं। ये कितना है खतरनाक और इससे बचाव के लिए क्या उठाने होंगे कदम? इस पर King George Medical University के पल्मोनरी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) वेद प्रकाश से ‘गाँव कनेक्शन’ के मनीष मिश्र की विशेष बातचीत।

    खेती की कमाई से बच्चों को पढ़ने विदेश भेजा
    खेती की कमाई से बच्चों को पढ़ने विदेश भेजा

    By Manish Mishra

    भारत के किसान, बदलते मौसम से लेकर बाज़ार तक लगातार संघर्ष करते रहते हैं। इस सब के बीच कई किसान ऐसे भी हैं, जो अपने प्रयोगों और नवाचारों से खेती किसानी में नई परिभाषा लिख रहे हैं।

    भारत के किसान, बदलते मौसम से लेकर बाज़ार तक लगातार संघर्ष करते रहते हैं। इस सब के बीच कई किसान ऐसे भी हैं, जो अपने प्रयोगों और नवाचारों से खेती किसानी में नई परिभाषा लिख रहे हैं।

    130 एकड़ में आलू की खेती से करोड़ों कमाई का गणित
    130 एकड़ में आलू की खेती से करोड़ों कमाई का गणित

    By Manish Mishra

    आलू की खेती को घर-गाँव और खेतों तक सीमित खेती माना जाता है, लेकिन शाहजहांपुर के पुवांया तहसील के प्रगतिशील किसान अमनदीप सिंह ने इसे एक बड़े कृषि व्यवसाय में बदलकर दिखा दिया।130 एकड़ में आलू की खेती, 10+ आलू वैरायटी और हर साल 20,000 कुंतल से अधिक उत्पादन, इन्हें खेती का मैनेजमेंट गुरु कहा जाए तो गलत नहीं होगा।

    आलू की खेती को घर-गाँव और खेतों तक सीमित खेती माना जाता है, लेकिन शाहजहांपुर के पुवांया तहसील के प्रगतिशील किसान अमनदीप सिंह ने इसे एक बड़े कृषि व्यवसाय में बदलकर दिखा दिया।130 एकड़ में आलू की खेती, 10+ आलू वैरायटी और हर साल 20,000 कुंतल से अधिक उत्पादन, इन्हें खेती का मैनेजमेंट गुरु कहा जाए तो गलत नहीं होगा।

    CORPORATE  JOB छोड़ क्यूं बने किसान?
    CORPORATE JOB छोड़ क्यूं बने किसान?

    By Manish Mishra

    जहां एक ओर लोग खेती किसानी से दूर होते जा रहे हैं, वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं जो अपनी लाखों की सैलरी को छोड़कर खेती को चुन रहे हैं। कई मल्टीनेशनल कंपनियों में सीएफओ रह चुके मनीष महेश्वरी ने सुकून के लिए खेती की राह चुनी। आज वो अमरूद की आर्गेनिक तरीके से खेती करते हैं। खेतों को मल्टीक्रॉपिंग के लिए अलग तरह से डिजाइन किया है।

    जहां एक ओर लोग खेती किसानी से दूर होते जा रहे हैं, वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं जो अपनी लाखों की सैलरी को छोड़कर खेती को चुन रहे हैं। कई मल्टीनेशनल कंपनियों में सीएफओ रह चुके मनीष महेश्वरी ने सुकून के लिए खेती की राह चुनी। आज वो अमरूद की आर्गेनिक तरीके से खेती करते हैं। खेतों को मल्टीक्रॉपिंग के लिए अलग तरह से डिजाइन किया है।