Nepal Flood: नारायणी नदी के किनारे अपनों की तलाश, 320 से ज़्यादा शव बरामद; डीएनए से हो रही पहचान

Mansi | Sept 02, 2026, 13:59 IST
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नारायणी नदी में बाढ़ के परिणामस्वरूप लापता लोगों की खोज एक गंभीर कार्य है। बचाव दल निरंतर ड्रोन और नावों की मदद से शवों की तलाश में जुटा है। अभी तक, तीन सौ से अधिक शव मिल चुके हैं, जिनमें से कई की पहचान करना शेष है। अज्ञात शवों की पहचान के लिए डीएनए जांच की प्रक्रिया तेज़ी से चल रही है।

नारायणी नदी के किनारे लापता लोगों की तलाश में नावों और ड्रोन की मदद से सर्च ऑपरेशन चलाती रेस्क्यू टीम<br>
नारायणी नदी के किनारे लापता लोगों की तलाश में नावों और ड्रोन की मदद से सर्च ऑपरेशन चलाती रेस्क्यू टीम
नारायणी नदी का पानी अब भी अपने साथ उस त्रासदी की निशानियाँ लेकर बह रहा है, जिसने नेपाल के कई परिवारों को अपनों से दूर कर दिया। नदी के किनारे रेस्क्यू टीमें नावों और ड्रोन की मदद से लगातार तलाशी अभियान चला रही हैं। दूसरी ओर, नदी किनारे खड़े परिवारों की निगाहें हर आने वाले शव पर टिक जाती हैं। उन्हें उम्मीद है कि शायद इसी में उनका अपना कोई मिल जाए। गाँव कनेक्शन की ग्राउंड रिपोर्ट में चितवन के नारायणी नदी किनारे ऐसा ही दर्द और तलाश दिखाई देती है।

आर्म्ड पुलिस फोर्स के डीएसपी डीबी थापा ने बताया कि अब तक 320 से ज़्यादा शव बरामद किए जा चुके हैं। इनमें से करीब 280 शवों को देवीघाट नदी के पास जंगल क्षेत्र में प्रबंधित किया गया है। कुछ शवों की पहचान हो चुकी है और उन्हें उनके परिवारों को सौंप दिया गया है। लेकिन कई शव अभी भी ऐसे हैं, जिनकी पहचान नहीं हो पाई है। इनके डीएनए सैंपल लिए जा रहे हैं, ताकि लापता लोगों के परिवारों के डीएनए से मिलान कर पहचान की जा सके।

नदी किनारे हर चेहरा अपनों की तलाश में

चितवन के नारायणी नदी किनारे इस समय सिर्फ़ रेस्क्यू टीमें ही नहीं हैं। यहाँ ऐसे कई लोग भी पहुँच रहे हैं, जिनके परिवार के सदस्य बाढ़ के बाद से लापता हैं। किसी के हाथ में अपने बेटे की तस्वीर है, तो कोई भाई या पिता के बारे में जानकारी लेने के लिए अधिकारियों के संपर्क में है। इन परिवारों के लिए शवों की पहचान की प्रक्रिया बेहद भावुक और मुश्किल है। कई दिनों से कोई ख़बर न मिलने के बाद जब किसी शव के मिलने की जानकारी आती है, तो उम्मीद और डर दोनों साथ खड़े हो जाते हैं। परिवार चाहते हैं कि कम से कम उन्हें अपने अपनों के बारे में आख़िरी जानकारी मिल जाए, ताकि वे उनका अंतिम संस्कार कर सकें। पुलिस के मुताबिक, अब तक 12 से ज़्यादा शवों की पहचान की जा चुकी है और उन्हें उनके रिश्तेदारों को सौंप दिया गया है। बाकी अज्ञात शवों के डीएनए सैंपल सुरक्षित किए गए हैं।

नदी से निकाल रहे शव
नदी से निकाल रहे शव

मानसरोवर गए भारतीय तीर्थयात्रियों की भी तलाश

इस त्रासदी में सिर्फ़ नेपाल के लोग ही प्रभावित नहीं हुए हैं। रेस्क्यू टीम को ऐसे शव भी मिले हैं, जिनकी पहचान अभी नहीं हो पाई है। अधिकारियों के मुताबिक, इनमें भारत के वे तीर्थयात्री भी हो सकते हैं, जो मानसरोवर यात्रा पर गए थे। इसके अलावा हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट, निर्माण स्थलों और सड़कों पर काम करने वाले इंजीनियर, तकनीशियन और दूसरे कर्मचारी भी बाढ़ के बाद से लापता बताए जा रहे हैं। चीन और दूसरे देशों के नागरिकों के परिजन भी अपने लोगों की पहचान के लिए यहां पहुँच रहे हैं। कई परिवार अधिकारियों से संपर्क में हैं और अपने लापता रिश्तेदारों की तस्वीरें तथा दूसरी जानकारी साझा कर रहे हैं। डीएनए जांच के ज़रिए पहचान की प्रक्रिया ऐसे परिवारों के लिए आख़िरी उम्मीद बनी हुई है।

एक शव नहीं, मिल रहे शरीर के हिस्से

रेस्क्यू टीमों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि कई जगहों पर पूरी बॉडी नहीं मिल रही है। नारायणी नदी के अलग-अलग हिस्सों और आसपास के इलाक़ों से शरीर के अलग-अलग हिस्से भी बरामद किए जा रहे हैं। रेस्क्यू टीम इन हिस्सों को सावधानी से इकट्ठा कर रही है। फॉरेंसिक विशेषज्ञ इनके डीएनए सैंपल ले रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक, डीएनए मैच होने के बाद संबंधित अवशेषों को परिवारों को सौंपने की प्रक्रिया की जाएगी, ताकि वे अपने धार्मिक रीति-रिवाज़ के मुताबिक अंतिम संस्कार कर सकें। डीएसपी डीबी थापा कहते हैं कि यह काम बेहद मुश्किल और पीड़ादायक है, लेकिन टीम की कोशिश है कि नदी और आसपास के इलाक़ों से जितने लोगों और शवों को संभव हो, उन्हें खोजा जा सके।

नारायणी नदी के किनारे अपनों की तलाश में जुटे परिवार और लगातार शवों की खोज में लगी रेस्क्यू टीमें
नारायणी नदी के किनारे अपनों की तलाश में जुटे परिवार और लगातार शवों की खोज में लगी रेस्क्यू टीमें

कई एजेंसियां एक साथ चला रही हैं सर्च ऑपरेशन

नारायणी नदी और आसपास के इलाक़ों में चल रहे इस अभियान में नेपाल आर्मी, नेपाल पुलिस, आर्म्ड पुलिस फोर्स, भरतपुर मेट्रोपॉलिटन पुलिस, रेड क्रॉस और आईसीआरसी की टीमें शामिल हैं। रेस्क्यू ऑपरेशन में नावों के साथ ड्रोन का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। नदी के किनारे, जंगल और उन इलाक़ों में तलाशी ली जा रही है, जहां बाढ़ का पानी शवों या लोगों को बहाकर ले गया हो सकता है। शुरुआती दिनों में बरामद होने वाले शवों की संख्या ज़्यादा थी। अब यह संख्या कम हो रही है, लेकिन तलाश बंद नहीं हुई है। टीमें अभी भी हर संभावित जगह पर खोजबीन कर रही हैं।

परिवारों के लिए तलाश अभी ख़त्म नहीं हुई

नारायणी नदी के किनारे खड़े लोगों की कहानी इस आपदा का सबसे दर्दनाक हिस्सा है। बाढ़ का पानी उतरने लगा है, लेकिन जिन परिवारों के अपने लापता हैं, उनके लिए संकट अभी ख़त्म नहीं हुआ है। रेस्क्यू टीम के लिए हर बरामद शव एक ज़िम्मेदारी है पहचान करने, उसे सुरक्षित रखने और सही परिवार तक पहुँचाने की। वहीं परिवारों के लिए हर फ़ोन कॉल, हर सूची और नदी से आने वाली हर ख़बर एक उम्मीद लेकर आती है। चितवन में नारायणी नदी के किनारे यह तलाश अभी जारी है। नदी में रेस्क्यू टीमें अपने अभियान में जुटी हैं और किनारे परिवार अपनों के लौटने या कम से कम उनकी आख़िरी पहचान मिलने का इंतज़ार कर रहे हैं।
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