नेपाल में आए सैलाब से अब तक 626 मौतें, 3000 लोग लापता; उजड़े इलाक़ों को दोबारा बसाने के लिए 5 अरब डॉलर की ज़रूरत

Umang | Aug 29, 2026, 13:28 IST
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नेपाल-तिब्बत सीमा पर विनाशकारी बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। इस आपदा में अब तक 626 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। नेपाल और तिब्बत में करीब 3,000 लोग लापता हैं और बचाव कार्य जारी है। बाढ़ से करीब 93,000 लोग प्रभावित हुए हैं और 3,700 से अधिक लोगों को बचाया गया है। पुनर्निर्माण के लिए देश को 5 अरब डॉलर तक की आवश्यकता पड़ सकती है।

बाढ़ ने नेपाल में मचाई भारी तबाही
बाढ़ ने नेपाल में मचाई भारी तबाही
नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बुधवार को आई विनाशकारी बाढ़ ने पूरे इलाक़े में भारी तबाही मचा दी है। अचानक आई बाढ़ के बाद अब तक नेपाल में 626 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि नेपाल और तिब्बत में लापता लोगों की संख्या करीब 3,000 पहुंच गई है। बचावकर्मी और सैन्यकर्मी चौथे दिन भी लगातार राहत और तलाश अभियान में जुटे हैं। ख़राब मौसम के कारण नेपाल में हवाई बचाव अभियान भी प्रभावित हुआ है। इस आपदा से नेपाल में करीब 93,000 लोग प्रभावित हुए हैं और 3,700 से अधिक लोगों को अब तक बचाया जा चुका है।

नेपाल की आपदा एजेंसी ने शनिवार को नेपाल की तरफ़ 2,426 लोगों के लापता होने की जानकारी दी है, जबकि चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक़ तिब्बत में लापता लोगों की संख्या 554 हो गई है। चीन में सात लोगों की मौत की पुष्टि की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक़ नेपाल में कम से कम 517 विदेशी और चीन के अधिकारियों के अनुसार तिब्बत में 260 विदेशी लापता हैं। इस तरह कुल 777 से अधिक विदेशी नागरिकों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वाग्ले ने कहा है कि बाढ़ के बाद पुनर्निर्माण के लिए देश को 5 अरब डॉलर तक की ज़रूरत पड़ सकती है, हालांकि उन्होंने इसे शुरुआती अनुमान बताया है।

बाढ़ ने छीने घर, परिवार और रोज़गार

बाढ़ की चपेट में आने वालों में रसुवा ज़िले के मेलुंग गांव की 61 वर्षीय सांगके डोल्मा तामांग भी शामिल हैं। उन्होंने 'द गार्जियन' से उस भयावह पल को याद करते हुए बताया कि उनके पति बाढ़ के तेज़ बहाव में बह गए और उनका घर और पूरा गांव तबाह हो गया। तामांग ने बताया कि वह उस समय ख़ुशी-ख़ुशी नाश्ता बना रही थीं, जब अचानक बिना किसी चेतावनी के बाढ़ आ गई। जान बचाने के लिए पूरा परिवार पहाड़ी की ऊंचाई की ओर भागा। इसी दौरान जब उन्होंने अपने पति को पकड़ने की कोशिश की, तो उनका हाथ छूट गया और वह तेज़, अंधेरे पानी के बहाव में बह गए।

उन्होंने कहा, “दूसरों ने उन्हें बचाने और सुरक्षित खींचने की कोशिश की, लेकिन बाढ़ उन्हें बहाकर ले गई।”। उन्होंने बताया कि अब उनके गांव में कुछ भी नहीं बचा है। उन्होंने एक रात ऊंचाई वाले स्थान पर शरण लेकर बिताई। इसके बाद सेना का एक हेलीकॉप्टर उन्हें वहां से सुरक्षित बैरक तक ले गया। उनका बेटा भी आपदा के बाद से लापता है और वह उसके बारे में किसी ख़बर का बेसब्री से इंतज़ार कर रही हैं। तामांग ने कहा, “अब मेरे पास जीने के लिए कुछ भी नहीं बचा है। पूरा घर चला गया। हम कुछ भी बचा नहीं सके।”

3,700 से ज़्यादा लोगों को बचाया गया

रिपोर्ट्स के अनुसार, नेपाल में अब तक 3,700 से अधिक लोगों को बचाया जा चुका है। हालांकि, ख़राब मौसम के कारण हवाई बचाव अभियान में मुश्किलें आ रही हैं। बाढ़ ने कई इलाक़ों को एक-दूसरे से काट दिया है। रेड क्रॉस के अनुसार, कई पुल बह गए हैं और प्रमुख सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं। इसके कारण सबसे अधिक प्रभावित इलाक़ों तक पहुंचना बेहद मुश्किल हो गया है। नेपाल सरकार अब राहत और पुनर्निर्माण के लिए आर्थिक मदद की अपील कर रही है। संयुक्त राष्ट्र बाल कोष के अनुसार, कम से कम 18 स्कूल पूरी तरह नष्ट हुए हैं और 20 अन्य स्कूलों को नुक़सान पहुंचा है। इससे करीब 10,000 स्कूली बच्चे प्रभावित हुए हैं।

नेपाल में 2426, तिब्बत में 554 लोग लापता

नेपाल की आपदा एजेंसी के अनुसार, देश की तरफ़ 2,426 लोग अब भी लापता हैं। वहीं, चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने तिब्बत में 554 लोगों के लापता होने की जानकारी दी है। इस तरह दोनों तरफ़ लापता लोगों की कुल संख्या करीब 3,000 हो गई है। द गार्जियन के अनुसार, नेपाल में 517 विदेशी नागरिकों के लापता होने की जानकारी दी गई है। चीन के अधिकारियों ने तिब्बत में 260 विदेशी नागरिकों के लापता होने की बात कही है। इनमें पर्यटक और विदेशी कामगार शामिल हो सकते हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल में बाढ़ से कम से कम 93,000 लोग प्रभावित हुए हैं। राहत और तलाश अभियान के बीच सरकार के सामने अब प्रभावित इलाक़ों तक पहुंचने, लापता लोगों की तलाश करने और विस्थापित परिवारों के लिए व्यवस्था करने की बड़ी चुनौती है।

5 अरब डॉलर तक पुनर्निर्माण की ज़रूरत का अनुमान

नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वाग्ले ने रॉयटर्स से कहा कि बाढ़ के बाद देश को पुनर्निर्माण के लिए 5 अरब डॉलर तक की ज़रूरत पड़ सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह अभी सिर्फ़ अनुमान है और नुक़सान का आकलन किया जा रहा है। रिपोर्ट में बताया गया है कि यह आपदा पिछले साल 8-9 सितंबर को हुए बड़े भ्रष्टाचार-विरोधी प्रदर्शनों की बरसी से कुछ समय पहले आई है। इन प्रदर्शनों के बाद नेपाल में सरकार बदली थी। अब देश की कमान 36 वर्षीय प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के हाथों में है, जो काठमांडू पूर्व मेयर हैं और उन्हें “बालेन” के नाम से भी जाना जाता है।
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