Nepal Flood: 70 घंटे बाद कीचड़ से निकला 5 साल का बच्चा, 94 शव पहुँचे अस्पताल, सिर्फ़ 9 की पहचान; अपनों की तलाश में परिवार

Mansi | Sept 01, 2026, 17:43 IST
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नेपाल में आई बाढ़ और भूस्खलन के चलते राहत कार्य की गतिविधियाँ तेज हो गई हैं। त्रिभुवन टीचिंग हॉस्पिटल में घायलों से ज्यादा शव प्राप्त हो रहे हैं। अस्पताल ने अनुमान लगाया था कि 200 से 300 मरीज आएंगे, लेकिन केवल 67 ही पहुंचे हैं। अभी तक 94 शव अस्पताल लाए गए हैं, जिनमें से सिर्फ नौ की पहचान हो सकी है।

मरीज कम पहुँचे, शव ज्यादा, 70 घंटे बाद कीचड़ से बचा 5 साल का बच्चा<br>
मरीज कम पहुँचे, शव ज्यादा, 70 घंटे बाद कीचड़ से बचा 5 साल का बच्चा
नेपाल में आई बाढ़ और भूस्खलन के बाद राहत और बचाव का काम जारी है, लेकिन तबाही के बीच अस्पतालों की तस्वीर इस आपदा के दूसरे पहलू को दिखा रही है। गाँव कनेक्शन की ग्राउंड रिपोर्ट में काठमांडू के त्रिभुवन टीचिंग हॉस्पिटल में घायलों से ज्यादा शव पहुँचने की स्थिति सामने आई है। कई परिवार अब भी अपने लापता परिजनों की तलाश में अस्पतालों के चक्कर लगा रहे हैं।

अस्पताल के डिप्टी डायरेक्टर डॉ.जी गोपाल सिडन ने गाँव कनेक्शन से बातचीत में बताया कि अस्पताल ने बड़ी संख्या में घायलों के इलाज की तैयारी की थी, लेकिन अब तक अपेक्षा से काफी कम मरीज पहुंचे हैं। इसके उलट, शवों की संख्या लगातार बढ़ी है।

200-300 मरीजों के लिए तैयार था अस्पताल, पहुँचे 67

डॉ.जी गोपाल सिडन के मुताबिक़, आपदा की जानकारी मिलते ही अस्पताल की आपदा प्रबंधन समिति सक्रिय हो गई थी। इमरजेंसी, आईसीयू और गंभीर मरीजों के इलाज से जुड़े विभागों को तैयार रखा गया था। अस्पताल ने 200 से 300 से ज्यादा मरीजों को संभालने की तैयारी की थी, लेकिन अब तक यहां 67 मरीज पहुँचे हैं। शुरुआती दिनों में कई गंभीर मरीज भी आए और उनमें से करीब 6-7 मरीजों को आईसीयू में रखा गया। इन मरीजों में एक 5 साल का बच्चा भी था, जो बाढ़ के बाद कीचड़ में फंस गया था। उसे करीब 70 घंटे बाद रेस्क्यू किया गया। बच्चे के चेहरे और सीने पर चोटें थीं और उसे इलाज के लिए अस्पताल लाया गया।

डॉ. जी. गोपाल सिडन
डॉ. जी. गोपाल सिडन

94 शव पहुँचे, सिर्फ़ 9 की पहचान

डॉ. गोपाल ने बताया कि अस्पताल में सुबह तक 94 शव पहुँच चुके थे। इनमें से केवल 9 शवों की पहचान हो सकी और उन्हें उनके परिवारों को सौंप दिया गया। उनके मुताबिक़, इस आपदा की एक बड़ी चुनौती यह है कि लापता लोगों की संख्या मरीजों और मृतकों की संख्या की तुलना में अधिक है। बाढ़ में कई पुल बह गए और प्रभावित इलाक़ों में संपर्क व्यवस्था टूट गई। इसके कारण लोगों की जानकारी समय पर अस्पतालों और प्रशासन तक नहीं पहुंच पा रही है।
यही वजह है कि अस्पताल में घायलों के इलाज के साथ अब अज्ञात शवों की पहचान और सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी भी बड़ी चुनौती बन गई है।

शवों को -5 डिग्री के फ्रीजर में रखा गया

त्रिभुवन टीचिंग हॉस्पिटल में पहुँचे शवों को करीब -5 डिग्री सेल्सियस तापमान वाले फ्रीजर में रखा जा रहा है। लेकिन अस्पताल की क्षमता सीमित है। जैसे-जैसे दूसरे प्रभावित इलाक़ों से शव आने की संभावना बनी हुई है, अस्पताल ने अधिक क्षमता वाले फ्रीजर की सुविधा रखने वाले दूसरे अस्पतालों के साथ भी समन्वय शुरू किया है। इसका मकसद शवों को सुरक्षित रखना और उनकी पहचान की प्रक्रिया को जारी रखना है।

94 शवों में सिर्फ 9 की पहचान
94 शवों में सिर्फ 9 की पहचान

पहचान के लिए तस्वीर और डीएनए सैंपल

जिन शवों की तत्काल पहचान नहीं हो पा रही है, उनकी पहचान के लिए प्रशासन तस्वीरें और डीएनए सैंपल सुरक्षित कर रहा है। डॉ. सेदाईं के मुताबिक़, कुछ शवों को विशेष पहचान नंबर देकर दफनाया जा रहा है। भविष्य में अगर कोई परिवार अपने लापता सदस्य की तलाश में सामने आता है, तो डीएनए मिलान के जरिए पहचान की जा सकती है। पहचान होने के बाद शव को निकालकर परिवार को सौंपने और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी। यह व्यवस्था उन परिवारों के लिए महत्वपूर्ण है, जिन्हें बाढ़ के बाद से अपने परिजनों के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पाई है।

सेना और अस्पताल संभाल रहे घायलों को

राहत और इलाज का काम सिर्फ़ काठमांडू तक सीमित नहीं है। नुवाकोट में सेना का बेस और दो अस्पताल काम कर रहे हैं। प्रभावित इलाक़ों से वहां पहुँचाए गए मरीजों का इलाज किया जा रहा है। जिन मरीजों को विशेषज्ञ इलाज की जरूरत पड़ रही है, उन्हें काठमांडू रेफर किया जा रहा है। इस तरह स्थानीय स्तर पर शुरुआती इलाज और जरूरत पड़ने पर बड़े अस्पतालों तक मरीजों को पहुँचाने की व्यवस्था के जरिए राहत कार्य आगे बढ़ रहा है।

डॉ. गोपाल के मुताबिक़, अस्पताल बड़ी संख्या में मरीजों को संभालने के लिए तैयार था, लेकिन इस आपदा में स्थिति अपेक्षा से अलग रही। घायलों की संख्या कम रही, जबकि मृतकों के शव अधिक संख्या में अस्पताल तक पहुँचे। इसका मतलब यह नहीं है कि आपदा का असर कम है। बल्कि कई लोगों के लापता होने और संपर्क टूटने की वजह से प्रभावित परिवारों तक सही जानकारी पहुँचाना बड़ी चुनौती बनी हुई है।

शवों की नंबरिंग
शवों की नंबरिंग

अस्पताल में इलाज के साथ अपनों की तलाश

त्रिभुवन टीचिंग हॉस्पिटल में डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी घायलों का इलाज कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ़ कई परिवार अपने लापता परिजनों की पहचान की उम्मीद में जानकारी तलाश रहे हैं। बाढ़ के बाद की यह तस्वीर बताती है कि राहत अभियान सिर्फ़ घायलों को बचाने तक सीमित नहीं है। जिन लोगों का अभी तक पता नहीं चला है, उनके परिवारों के लिए हर तस्वीर, हर पहचान नंबर और हर डीएनए सैंपल एक उम्मीद है।

गाँव कनेक्शन की ग्राउंड रिपोर्ट में त्रिभुवन टीचिंग हॉस्पिटल से सामने आई यह स्थिति बताती है कि नेपाल में बाढ़ की तबाही के बाद राहत और बचाव के साथ-साथ शवों की पहचान और लापता लोगों को उनके परिवारों तक पहुँचाना भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।
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