नेपाल में बाढ़ से मरने वालों की संख्या 469 हुई, 178 भारतीय भी लापता; अब इस नई तबाही का ख़तरा!

Gaon Connection | Aug 28, 2026, 11:33 IST
Share

नेपाल में भीषण बाढ़ से अब तक 469 से अधिक लोगों की जान गई है और करीब 1,500 लोग अभी भी लापता हैं। लापता विदेशी नागरिकों में भारतीयों की संख्या सबसे अधिक है, जिनमें कई पर्यटक शामिल हैं। तिब्बत-नेपाल सीमा पर रसुवागढ़ी सीमा चौकी पूरी तरह नष्ट हो गई है, जिससे नई आपदा का खतरा बढ़ गया है।

नेपाल में बाढ़ से हाहाकार
नेपाल में बाढ़ से हाहाकार
नेपाल में इस सप्ताह आई भीषण बाढ़ में 469 से ज़्यादा लोगों की मौत हो गई है, जबकि क़रीब 1,500 लोग अब भी लापता हैं। NDTV World ने नेपाल और चीन के अधिकारियों के हवाले से रिपोर्ट किया है कि बाढ़ में 469 से ज़्यादा लोगों की मौत हुई है और 1,468 लोग लापता हैं। लापता विदेशी नागरिकों में भारतीयों की संख्या सबसे ज़्यादा है। नेपाल के नए पर्यटन बोर्ड के आँकड़ों के मुताबिक़, भारत के 178 लोग लापता हैं, जबकि 11 अन्य लोगों को बचा लिया गया है। लापता लोगों में बड़ी संख्या विदेशी पर्यटकों की है। इनमें हिमालयी क्षेत्र में ट्रेकिंग करने वाले लोग और तिब्बत के पवित्र बर्फ़ से ढके कैलाश पर्वत की यात्रा पर गए हिंदू तीर्थयात्री भी शामिल हैं।

इस बीच, नेपाल-चीन सीमा के पास एक और प्राकृतिक आपदा का ख़तरा पैदा हो गया है। नई सैटेलाइट तस्वीरों में तिब्बत-नेपाल रसुवागढ़ी सीमा चौकी पूरी तरह नष्ट दिखाई दी है। ग्लेशियर से आई बाढ़ ने घाटी के तल को पूरी तरह बहा दिया है। हवाई तस्वीरों में तिब्बत-नेपाल सीमा के पास एक झील बनती और फैलती हुई दिखाई दी है। चीन के अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि इस झील का बाँध टूट सकता है और इससे नीचे के इलाक़ों में बाढ़ आ सकती है। चीन ने तिब्बत-नेपाल सीमा पर ‘लेवल-IV’ अलर्ट जारी किया है।

469 से ज़्यादा मौतें, 1,468 लोग अब भी लापता

नेपाल और चीन के अधिकारियों के मुताबिक़, बाढ़ में 469 से ज़्यादा लोगों की मौत हुई है और 1,468 लोग लापता हैं। सैकड़ों अन्य लोग हिमालयी क्षेत्र में विस्थापित हुए हैं। चीन के सरकारी मीडिया ने तीन और लोगों की मौत की पुष्टि की है। इसे जोड़ने पर मृतकों की कुल संख्या कम से कम 472 हो जाती है। नेपाल के नए पर्यटन बोर्ड के आँकड़ों के मुताबिक़, भारत के 178 लोग लापता हैं और 11 अन्य भारतीयों को बचा लिया गया है। लापता लोगों में विदेशी पर्यटक शामिल हैं। इनमें हिमालयी क्षेत्र में ट्रेकिंग करने वाले लोग और तिब्बत के पवित्र बर्फ़ से ढके कैलाश पर्वत की यात्रा पर गए बड़ी संख्या में हिंदू तीर्थयात्री भी शामिल हैं।

रसुवागढ़ी सीमा चौकी पूरी तरह नष्ट, सीमा पर बनी झील

नई सैटेलाइट तस्वीरों में तिब्बत-नेपाल रसुवागढ़ी सीमा चौकी पूरी तरह नष्ट दिखाई दी है। ग्लेशियर से आई बाढ़ ने घाटी के तल को पूरी तरह बहा दिया। हवाई तस्वीरों में तिब्बत-नेपाल सीमा के पास एक झील बनती और फैलती हुई दिखाई दी है। चीन के जल संसाधन मंत्रालय ने तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में आपात स्थिति की चेतावनी दी है। यह झील छ़ोछेन खोला और पुरेपु त्सांगपो नदियों के संगम के पास बनी है। ये नदियाँ तिब्बत से निकलती हैं और नेपाल में प्रवेश करने के बाद भोटे कोशी नदी तंत्र का हिस्सा बनती हैं।

झील में 20 लाख घन मीटर पानी, टूटने का ख़तरा

चीन के जल संसाधन मंत्रालय के मुताबिक़, गुरुवार सुबह तक झील में अनुमानित 20 लाख घन मीटर पानी जमा हो चुका था। क्षेत्र में लगातार बारिश के कारण झील में आने वाला पानी क़रीब 30 लाख घन मीटर तक पहुँच सकता है, जिससे इसके टूटने का ख़तरा बढ़ गया है। यह जानकारी चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने दी है। चीन ने तिब्बत-नेपाल सीमा पर ‘लेवल-IV’ अलर्ट जारी किया है। अगर झील का बाँध टूटता है तो बाढ़ का पानी नीचे की ओर जा सकता है और चीन-नेपाल सीमा पर स्थित जिरोंग बंदरगाह तथा नीचे के अन्य इलाक़ों में और नुक़सान हो सकता है। चीन की प्राकृतिक आपदा आपात प्रतिक्रिया प्रणाली में चार स्तर हैं, जिनमें लेवल-I सबसे ऊँचा और लेवल-IV सबसे निचला स्तर है।

सैन्य हेलीकॉप्टरों से लापता लोगों की तलाश

बचाव दल और सैन्य हेलीकॉप्टर नेपाल-चीन की पहाड़ी सीमा के पास लापता सैकड़ों लोगों की तलाश कर रहे हैं। इसी क्षेत्र में ग्लेशियर के ढहने के बाद कई मंज़िला इमारत जितनी ऊँची पानी और कीचड़ की धारा बही, जिसने इस सप्ताह कई बस्तियों को अपनी चपेट में ले लिया। आपदा के वीडियो में लोगों को बाढ़ के पानी से बचने के लिए भागते हुए देखा गया। इसके बाद पानी ने लोगों को अपनी चपेट में ले लिया और इमारतों तथा पुलों को बहा दिया। हिमालय की घाटियाँ बाढ़ और भूस्खलन के लिहाज़ से विशेष रूप से संवेदनशील हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि इंसानों के कारण हो रहे जलवायु परिवर्तन की वजह से ग्लेशियरों के पिघलने की घटनाएँ अधिक आम हो गई हैं।

नेपाल ने विदेशी बचाव दलों की मदद ठुकराई

नेपाल सरकार ने कई देशों की ओर से खोज और बचाव दल भेजने की पेशकश ठुकरा दी है। 'द स्ट्रेट टाइम्स' का कहना है कि प्रधानमंत्री बालेन शाह की सरकार ने कहा है कि नेपाली सुरक्षा एजेंसियाँ खोज और बचाव अभियान संभाल सकती हैं। अधिकारियों के मुताबिक़, नेपाल नक़द सहायता एक ‘वन-डोर’ व्यवस्था के ज़रिये चाहता है। इसके अलावा पुनर्निर्माण के चरण में अतिरिक्त वित्तीय सहायता और अन्य सहयोग लिया जाएगा। कई देशों ने पहले ही वित्तीय सहायता की घोषणा कर दी है। अन्य देशों ने भी खोज, बचाव, पुनर्वास और पुनर्निर्माण के प्रयासों में सहयोग देने की इच्छा जताई है।
Tags:
  • Nepal Flood
  • Nepal Flood Deaths
  • Nepal Flood 2026
  • Nepal India Missing
  • Nepal China Border
  • Rasuwagadhi Border
  • Glacial Flood
  • Barrier Lake
  • Kailash Pilgrims
  • Nepal Rescue