नेपाल में तबाही के बाद यूपी-बिहार पर बाढ़ का ख़तरा! नदियों और बैराजों की निगरानी तेज़; जानें किन इलाक़ों पर नज़र

Umang | Aug 28, 2026, 16:33 IST
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नेपाल में भयंकर बाढ़ और मड्स्लाइड की स्थिति ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। सीमावर्ती झील का ओवरफ्लो होने से फिर से बाढ़ आने का खतरा उत्पन्न हो गया है। भारत के सीमावर्ती राज्यों में नजर रखी जा रही है, और एनडीआरएफ की टीमें मदद के लिए तैयार हैं। बिहार में गंडक नदी का स्तर अभी नियंत्रण में है, लेकिन आठ जिलों में अलर्ट जारी किया गया है।

यूपी-बिहार में नदियों के उफान का डर
यूपी-बिहार में नदियों के उफान का डर
नेपाल में भीषण फ्लैश फ्लड के बाद हालात अभी सामान्य नहीं हुए हैं। 26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर से जुड़ी घटना के बाद पानी, मलबे और चट्टानों की तेज़ धारा ने कई बस्तियों, सड़कों, पुलों और दूसरी संरचनाओं को तबाह कर दिया। नेपाल में मृतकों की संख्या 469 तक पहुँच गई है और बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं। इसी बीच सीमा के पास भूस्खलन से बनी एक झील का पानी बढ़कर ओवरफ्लो होने लगा है, जिससे दोबारा बाढ़ आने की आशंका पैदा हो गई है। रॉयटर्स के मुताबिक़, झील का पानी भोटेकोशी नदी में पहुँचने लगा और कुछ इलाक़ों में लोगों को ऊँचे स्थानों की ओर जाने की चेतावनी दी गई।

नेपाल की इस नई स्थिति का असर भारत के सीमावर्ती राज्यों पर भी चिंता बढ़ा रहा है, क्योंकि नेपाल से निकलने वाली नदियाँ उत्तर प्रदेश और बिहार में प्रवेश करती हैं। भारत में अभी तक नेपाल की बाढ़ का कोई बड़ा प्रतिकूल असर नहीं बताया गया है लेकिन NDRF ने यूपी और बिहार में कुल 20 टीमें तैनात की हैं। केंद्रीय जल आयोग और राज्य प्रशासन नदियों तथा बैराजों के जलस्तर और डिस्चार्ज पर लगातार नज़र रख रहे हैं। बिहार में गंडक को लेकर स्थिति फिलहाल नियंत्रण में बताई गई है, जबकि उत्तर प्रदेश में महाराजगंज और कुशीनगर समेत सीमावर्ती इलाक़ों में निगरानी बढ़ाई गई है।

नेपाल में अभी क्या स्थिति है?

नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन के बाद बचाव अभियान जारी है। नेपाल पुलिस के अनुसार, 469 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है और बड़ी संख्या में लोग लापता हैं। सैकड़ों लोगों को बचाया गया है और सुरक्षा बलों की बड़ी संख्या राहत एवं खोज अभियान में लगी है। सबसे बड़ी नई चिंता नेपाल-चीन सीमा के पास बनी बैरियर झील को लेकर है। रॉयटर्स के मुताबिक़, शुक्रवार को झील का पानी 25 लाख घन मीटर से अधिक हो गया और वह भोटेकोशी नदी में ओवरफ्लो होने लगा। इसके बाद प्रभावित इलाक़ों में लोगों को सुरक्षित स्थानों की ओर जाने के लिए कहा गया और कुछ समय के लिए बचाव अभियान भी रोका गया। यह स्थिति इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भोटेकोशी और दूसरी नदियों का पानी आगे नेपाल के नदी तंत्र से होते हुए भारत की तरफ़ आता है। ऐसे में अचानक अतिरिक्त पानी आने पर सीमावर्ती इलाक़ों में नदी का जलस्तर बढ़ सकता है।

बिहार में कहाँ-कहाँ ख़तरा है?

बिहार में सबसे अधिक चिंता गंडक नदी को लेकर है। नेपाल में भारी बारिश और बाढ़ के बाद गंडक के जलप्रवाह में बढ़ोतरी हुई थी। वाल्मीकिनगर बैराज पर भी लगातार निगरानी रखी जा रही है। हालांकि, 28 अगस्त की सुबह आकाशवाणी ने बताया कि गंडक का डिस्चार्ज घट रहा था और बिहार के जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी ने नदी का प्रवाह फ़िलहाल सामान्य बताया। इसके बावजूद गंडक से प्रभावित आठ ज़िलों को एहतियातन अलर्ट पर रखा गया है। जल संसाधन विभाग की टीमें तटबंधों की चौबीसों घंटे निगरानी और पेट्रोलिंग कर रही हैं।

नेपाल से आने वाले पानी को देखते हुए पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सीतामढ़ी, शिवहर, सुपौल, मधुबनी और आसपास के उत्तर बिहार के इलाक़ों पर विशेष नज़र रखी जा रही है। बिहार सरकार ने पहले ही निचले इलाक़ों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाने की तैयारी की थी। इसके अलावा गंगा, कोसी और बागमती जैसी नदियों के जलस्तर पर भी निगरानी बनी हुई है। इसलिए बिहार में ख़तरा केवल गंडक तक सीमित नहीं है।

यूपी में किन इलाक़ों पर ख़तरा?

उत्तर प्रदेश में महाराजगंज और कुशीनगर को लेकर हाई अलर्ट जारी किया गया है। प्रशासन नेपाल से आने वाली नदियों और जलस्रोतों के जलस्तर पर निगरानी कर रहा है तथा संवेदनशील गाँवों में लोगों को सतर्क किया जा रहा है। यूपी में गंडक, राप्ती, शारदा और घाघरा समेत कई नदियों पर नज़र रखी जा रही है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, बलिया के तुर्तीपार में घाघरा का जलस्तर चेतावनी स्तर से ऊपर था, हालांकि उसमें गिरावट दर्ज की जा रही थी। शारदा और राप्ती के जलस्तर पर भी निगरानी जारी है। कुशीनगर क्षेत्र में NDRF की टीम भी तैनात है। प्रशासन ने संवेदनशील गाँवों में लाउडस्पीकर के ज़रिये चेतावनी देने और जलस्तर बढ़ने की स्थिति में लोगों तथा पशुओं को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाने की तैयारी की है।

क्या यूपी-बिहार में अभी बाढ़ आ गई है?

अभी बड़े पैमाने पर नेपाल की बाढ़ का प्रत्यक्ष असर यूपी-बिहार में नहीं बताया गया है। NDRF ने कहा है कि भारतीय हिस्से में फिलहाल कोई बड़ा प्रतिकूल प्रभाव नहीं है, लेकिन किसी भी संभावित बाढ़ या जलभराव से निपटने के लिए टीमें तैयार हैं। बिहार में 28 अगस्त की सुबह गंडक का डिस्चार्ज घटने और प्रवाह सामान्य रहने की जानकारी सामने आई है। फिर भी आठ गंडक प्रभावित ज़िलों में अलर्ट जारी है।

इसलिए अभी स्थिति को तत्काल बड़ी बाढ़ की बजाय संभावित जोखिम और निगरानी की स्थिति के तौर पर देखा जा रहा है। नेपाल में बैरियर झील के पानी और उससे जुड़े नदी प्रवाह में अचानक बढ़ोतरी होने पर भारत के सीमावर्ती इलाक़ों में स्थिति बदल सकती है।
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