Nepal Floods: 'बाढ़ के बाद से बड़े पापा लापता हैं', छलका युवक का दर्द; ग्राउंड ज़ीरो से 'गाँव कनेक्शन' की रिपोर्ट
Umang | Aug 29, 2026, 17:06 IST
नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। गाँव कनेक्शन की टीम ग्राउंड ज़ीरो पर मौजूद है। टीम ने त्रिशूली में बाढ़ प्रभावित लोगों से बात की, जिनके परिजन अब भी लापता हैं। विकास मल्ला नामक युवक ने बताया कि उसके बड़े पापा त्रिशूली हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में काम करते थे और बाढ़ के बाद से उनका पता नहीं है। नेपाल में 626 मौतें और 2,426 लोग लापता बताए गए हैं।
नेपाल से गाँव कनेक्शन की ग्राउंड रिपोर्ट
नेपाल में 26 अगस्त को ग्लेशियर टूटने के बाद अचानक आई विनाशकारी बाढ़ ने कई इलाक़ों में भारी तबाही मचाई है। बाढ़ के तेज़ बहाव में घर, सड़कें और पुल प्रभावित हुए हैं, जबकि बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं। राहत और खोज-बचाव अभियान लगातार जारी है। इस आपदा की ज़मीनी स्थिति जानने के लिए गाँव कनेक्शन की टीम नेपाल में ग्राउंड ज़ीरो पर मौजूद है। रिपोर्टर मनीष मिश्रा और कैमरा मैन मोहम्मद सलमान मौके से बाढ़ प्रभावित लोगों और बचाव अभियान की स्थिति को कवर कर रहे हैं।
ग्राउंड ज़ीरो पर रिपोर्टिंग के दौरान टीम ने ऐसे लोगों से बात की, जिनके अपने लोग बाढ़ के बाद से लापता हैं। त्रिशूली में मनीष मिश्रा ने विकास मल्ला नामक युवक से बातचीत की। विकास ने बताया कि उसके बड़े पापा का बाढ़ के बाद से कोई पता नहीं चल रहा है।
विकास ने बताया कि उसके बड़े पापा हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में काम करते थे और बाढ़ आने के बाद से उनका कोई पता नहीं है। विकास के मुताबिक़, उनके बड़े पापा करीब सात साल से हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में काम कर रहे थे। उसने बताया कि इस परियोजना में अलग-अलग देशों के लोग काम करते थे। इनमें चीनी, कोरियाई और नेपाली लोगों के साथ भारत से काम करने गए लोग भी शामिल थे। विकास ने बताया कि बाढ़ के बाद कई लोगों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। परिवार अपने लापता परिजन की जानकारी मिलने का इंतज़ार कर रहा है और उनकी तलाश जारी है।
![मदद में जुटी सेना]()
बाढ़ ने त्रिशूली और आसपास के इलाक़ों में हाइड्रोपावर परियोजनाओं को भी प्रभावित किया है। परियोजनाओं में काम करने वाले लोगों के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है। गाँव कनेक्शन की टीम से बातचीत में सामने आया कि हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में अलग-अलग देशों के कर्मचारी काम करते थे। बाढ़ के बाद कुछ लोगों से संपर्क टूट गया है और उनके परिवार उनकी जानकारी का इंतज़ार कर रहे हैं। प्रभावित इलाक़ों तक पहुंचना भी चुनौती बना हुआ है। कई जगहों पर बाढ़ के कारण रास्ते प्रभावित हुए हैं, जिससे राहत और खोज-बचाव अभियान में मुश्किलें आ रही हैं।
![बचाव अभियान में लगा हेलीकॉप्टर]()
नुवाकोट के त्रिशूली स्थित नेपाली सेना का श्री नं. 1 सैनिक प्रशिक्षण केंद्र बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए राहत और खोज-बचाव अभियान का अहम केंद्र बना हुआ है। प्रभावित और दुर्गम इलाक़ों से बचाकर लाए जा रहे लोगों को यहां सुरक्षित स्थान दिया जा रहा है। केंद्र में बाढ़ से बचे लोगों के लिए रहने, भोजन और प्राथमिक चिकित्सा की व्यवस्था की जा रही है। वहीं, केंद्र के बाहर बड़ी संख्या में लोग अपने लापता परिजनों की जानकारी मिलने की उम्मीद में मौजूद हैं।
परिजन लगातार यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि बचाकर लाए गए लोगों में उनके परिवार का कोई सदस्य तो नहीं है। यहां बचाकर लाए गए लोगों के नामों की जानकारी भी दी जा रही है, जिसके आधार पर परिवार अपने लोगों को खोज रहे हैं।
नेपाल में बाढ़ और मलबे के तेज़ बहाव से बड़े पैमाने पर जान-माल का नुक़सान हुआ है। उपलब्ध ताज़ा जानकारी के अनुसार नेपाल में मृतकों की संख्या 626 पहुंच गई है, जबकि नेपाल की तरफ़ 2,426 लोग अब भी लापता बताए गए हैं। नेपाल में 3,700 से अधिक लोगों को बचाया जा चुका है और करीब 93,000 लोग इस आपदा से प्रभावित हुए हैं। ख़राब मौसम के कारण हवाई बचाव अभियान भी प्रभावित हुआ है। बाढ़ के कारण कई पुल और प्रमुख सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं। संयुक्त राष्ट्र बाल कोष के अनुसार, कम से कम 18 स्कूल नष्ट हुए हैं और 20 अन्य स्कूलों को नुक़सान पहुंचा है। इससे करीब 10,000 स्कूली बच्चे प्रभावित हुए हैं।
ग्राउंड ज़ीरो पर रिपोर्टिंग के दौरान टीम ने ऐसे लोगों से बात की, जिनके अपने लोग बाढ़ के बाद से लापता हैं। त्रिशूली में मनीष मिश्रा ने विकास मल्ला नामक युवक से बातचीत की। विकास ने बताया कि उसके बड़े पापा का बाढ़ के बाद से कोई पता नहीं चल रहा है।
बड़े पापा अब तक लापता
हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट से जुड़े कई लोग प्रभावित
मदद में जुटी सेना
बाढ़ ने त्रिशूली और आसपास के इलाक़ों में हाइड्रोपावर परियोजनाओं को भी प्रभावित किया है। परियोजनाओं में काम करने वाले लोगों के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है। गाँव कनेक्शन की टीम से बातचीत में सामने आया कि हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में अलग-अलग देशों के कर्मचारी काम करते थे। बाढ़ के बाद कुछ लोगों से संपर्क टूट गया है और उनके परिवार उनकी जानकारी का इंतज़ार कर रहे हैं। प्रभावित इलाक़ों तक पहुंचना भी चुनौती बना हुआ है। कई जगहों पर बाढ़ के कारण रास्ते प्रभावित हुए हैं, जिससे राहत और खोज-बचाव अभियान में मुश्किलें आ रही हैं।
त्रिशूली का सैनिक प्रशिक्षण केंद्र बना राहत और तलाश का केंद्र
बचाव अभियान में लगा हेलीकॉप्टर
नुवाकोट के त्रिशूली स्थित नेपाली सेना का श्री नं. 1 सैनिक प्रशिक्षण केंद्र बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए राहत और खोज-बचाव अभियान का अहम केंद्र बना हुआ है। प्रभावित और दुर्गम इलाक़ों से बचाकर लाए जा रहे लोगों को यहां सुरक्षित स्थान दिया जा रहा है। केंद्र में बाढ़ से बचे लोगों के लिए रहने, भोजन और प्राथमिक चिकित्सा की व्यवस्था की जा रही है। वहीं, केंद्र के बाहर बड़ी संख्या में लोग अपने लापता परिजनों की जानकारी मिलने की उम्मीद में मौजूद हैं।
परिजन लगातार यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि बचाकर लाए गए लोगों में उनके परिवार का कोई सदस्य तो नहीं है। यहां बचाकर लाए गए लोगों के नामों की जानकारी भी दी जा रही है, जिसके आधार पर परिवार अपने लोगों को खोज रहे हैं।