Nepal Flood: तीन लहरों ने देखते ही देखते उजाड़ दिया त्रिशूली बाजार, ‘जो भाग नहीं सके, उन्हें बहा ले गई बाढ़’ | Ground Report
Mansi | Aug 31, 2026, 13:33 IST
त्रिशूली बाजार में आई विनाशकारी बाढ़ ने इस क्षेत्र के जनजीवन को पूरी तरह से प्रभावित कर दिया है। बाढ़ की तीन तेज लहरों ने दुकानों और इमारतों को नष्ट कर दिया है। लोग अपनी जान बचाने के लिए जंगलों और ऊंचाई वाले स्थानों की ओर भाग रहे हैं। कई पुलों और सड़कों को क्षति पहुंचने से राहत कार्य में रुकावट आई है।
बाढ़ के बाद त्रिशूली बाजार में चारों तरफ़ मलबा दिखाई दे रहा है
कुछ दिन पहले तक जहाँ सुबह होते ही दुकानों के शटर खुल जाते थे, सड़क पर बसें और गाड़ियां दिखाई देती थीं और बाजार लोगों की आवाजाही से गुलज़ार रहता था, आज वहीं चारों तरफ़ मलबा और तबाही दिखाई देती है। त्रिशूली बाजार की ज़मीन पर बाढ़ के निशान साफ़ दिख रहे हैं। टूटी इमारतें, बिखरी दुकानें और क्षतिग्रस्त पुल उस दिन की भयावहता की कहानी कह रहे हैं।
ग्राउंड ज़ीरो पर रिपोर्टिंग के दौरान टीम ने बीरू लामा से बात की और उनके मुताबिक़, बाढ़ एक बार नहीं, बल्कि लगातार तीन तेज़ लहरों के साथ आई। पहली लहर ने लोगों को संभलने का मौका दिया, लेकिन उसके बाद आई दूसरी और तीसरी लहर ने हालात पूरी तरह बदल दिए। पानी और मलबा इतनी तेज़ी से आगे बढ़ा कि लोगों को अपनी जान बचाने के लिए बस दौड़ना पड़ा। जो समय रहते भाग पाए, वे जंगल और ऊंचाई वाले इलाक़ों की तरफ़ निकल गए। कुछ लोगों ने छलांग लगाकर अपनी जान बचाई, लेकिन जो पीछे रह गए, उन्हें तेज़ बहाव अपने साथ ले गया।
बीरू लामा उस दिन को याद करते हुए बताते हैं कि बाढ़ की लहर बेहद ख़तरनाक थी। उनके मुताबिक़, एक के बाद एक तीन लहरें आईं। तीसरी लहर के समय हालात इतने डरावने हो गए कि लोगों को समझ नहीं आया कि कहाँ जाएं। वह बताते हैं कि लोग अपनी जान बचाने के लिए भाग रहे थे। कुछ लोग किसी तरह छलांग लगाकर सुरक्षित जगह पहुँच गए। बीरू खुद भी जंगल की तरफ़ भागकर अपनी जान बचाने में कामयाब रहे। उस वक्त किसी के पास सामान समेटने या दुकान बचाने का समय नहीं था। सामने सिर्फ़ एक ही सवाल था जान कैसे बचाई जाए।
![बाढ़ के डरावने मंजर]()
बीरू लामा के अनुसार त्रिशूली बाजार सुबह करीब 6-7 बजे से ही खुलने लगता है। यह आसपास के इलाक़ों के लिए एक अहम बाजार है। काठमांडू से आने वाली बसें भी यहाँ रुकती हैं और दिनभर लोगों की आवाजाही बनी रहती है। बीरू बताते हैं कि बाढ़ वाले दिन भी बाजार में काफी लोग मौजूद थे। सूचना मिलने के बाद कई लोगों ने बाजार खाली करना शुरू कर दिया और सुरक्षित जगहों की तरफ़ भागे। लेकिन अचानक बढ़े पानी और तेज़ बहाव ने कई लोगों को संभलने का मौका नहीं दिया।
![जान बचाने के लिए भागे लोग]()
त्रिशूली बाजार की सबसे बड़ी चिंता यह है कि जिस नदी को लोग नीचे गहराई में देखते थे, वह अचानक उनके घरों और दुकानों तक कैसे पहुँच गई। बीरू बताते हैं कि पहले नदी काफी नीचे थी। बाजार के आसपास खेत और जमीन थी। लोगों के घर नदी के बिल्कुल किनारे नहीं थे। लेकिन जब ऊपर से तेज़ लहर आई, तो पानी और मलबा पूरे इलाके में फैल गया। देखते ही देखते वह जगह, जहां पहले खेत और सड़क दिखाई देती थी, पानी से भर गई। स्थानीय लोग बताते हैं कि बाढ़ की लहर ने पूरे मैदान को जैसे समुद्र में बदल दिया। चेतावनी मिली तो लोग भागे, लेकिन सबको मौका नहीं मिला बीरू बताते हैं कि उस दिन अपनी जान बचाना भी मुश्किल हो गया था। वह जंगल की तरफ़ भागे और किसी तरह सुरक्षित जगह पहुंचे। आज बाजार में मौजूद तबाही को देखकर अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि पानी का बहाव कितना तेज़ रहा होगा।
![बीरू लामा ने सुनाई त्रिशूली बाजार में आई बाढ़ की आंखों-देखी।]()
जब इस तबाह हुए बाजार को दोबारा बनाने की बात आती है, तो स्थानीय लोगों के पास कोई आसान जवाब नहीं है। कई दुकानें और इमारतें पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। जगह-जगह मलबा जमा है। बाढ़ ने सिर्फ़ लोगों की रोज़ी-रोटी को नुकसान नहीं पहुंचाया, बल्कि उस जगह को भी बदल दिया है, जहां लोगों ने वर्षों से अपना जीवन बनाया था। अब सवाल सिर्फ़ यह नहीं है कि दुकानें कब खुलेंगी या सड़क कब बनेगी। सवाल यह भी है कि जिन लोगों के घर और रोज़गार इस बाढ़ में चले गए, वे अपनी ज़िंदगी फिर से कैसे शुरू करेंगे।
त्रिशूली बाजार और आसपास के इलाक़ों में कई पुलों को नुकसान पहुँचा है। कई रास्ते बंद हैं और नीचे बसे घरों तक पहुँचना मुश्किल है। जिन इलाक़ों तक सड़क से पहुँचना संभव नहीं है, वहां लोगों को हेलीकॉप्टर के जरिए सुरक्षित स्थानों तक लाया जा रहा है। राहत और बचाव के लिए भी हवाई रास्ते का सहारा लिया जा रहा है। ऊंचाई से देखने पर तबाही का दायरा और साफ़ दिखाई देता है। दूर तक कई घर क्षतिग्रस्त नज़र आते हैं और कई जगहों पर सिर्फ़ मलबा बचा है।
त्रिशूली बाजार से होकर आगे जाने वाला मुख्य रास्ता कैलाश मानसरोवर की दिशा से जुड़ा है। बाढ़ ने इस रास्ते को भी प्रभावित किया है। जहाँ से रोज़ाना लोगों और वाहनों की आवाजाही होती थी, वहाँ अब रास्ता बंद है। पुलों और सड़कों को नुकसान पहुंचने से सामान्य आवाजाही के साथ-साथ राहत और बचाव अभियान भी प्रभावित हो रहा है।
पानी का स्तर कम हो गया है, लेकिन त्रिशूली बाजार के लोगों के मन से उस दिन का डर नहीं गया है। लोग उस पल को भूल नहीं पा रहे, जब उन्हें अपनी दुकान, घर और सामान छोड़कर सिर्फ़ अपनी जान बचाने के लिए भागना पड़ा था।
ग्राउंड ज़ीरो पर रिपोर्टिंग के दौरान टीम ने बीरू लामा से बात की और उनके मुताबिक़, बाढ़ एक बार नहीं, बल्कि लगातार तीन तेज़ लहरों के साथ आई। पहली लहर ने लोगों को संभलने का मौका दिया, लेकिन उसके बाद आई दूसरी और तीसरी लहर ने हालात पूरी तरह बदल दिए। पानी और मलबा इतनी तेज़ी से आगे बढ़ा कि लोगों को अपनी जान बचाने के लिए बस दौड़ना पड़ा। जो समय रहते भाग पाए, वे जंगल और ऊंचाई वाले इलाक़ों की तरफ़ निकल गए। कुछ लोगों ने छलांग लगाकर अपनी जान बचाई, लेकिन जो पीछे रह गए, उन्हें तेज़ बहाव अपने साथ ले गया।
कुछ ही पलों में मची तबाही, जान बचाने को भागे लोग
बाढ़ के डरावने मंजर
सुबह से ही भीड़ से भर जाता है त्रिशूली बाजार
जान बचाने के लिए भागे लोग
नदी इतनी पास नहीं थी, फिर पानी यहाँ तक कैसे पहुँचा?
बीरू लामा ने सुनाई त्रिशूली बाजार में आई बाढ़ की आंखों-देखी।
बाजार दोबारा बसाना आसान नहीं
त्रिशूली बाजार और आसपास के इलाक़ों में कई पुलों को नुकसान पहुँचा है। कई रास्ते बंद हैं और नीचे बसे घरों तक पहुँचना मुश्किल है। जिन इलाक़ों तक सड़क से पहुँचना संभव नहीं है, वहां लोगों को हेलीकॉप्टर के जरिए सुरक्षित स्थानों तक लाया जा रहा है। राहत और बचाव के लिए भी हवाई रास्ते का सहारा लिया जा रहा है। ऊंचाई से देखने पर तबाही का दायरा और साफ़ दिखाई देता है। दूर तक कई घर क्षतिग्रस्त नज़र आते हैं और कई जगहों पर सिर्फ़ मलबा बचा है।
कैलाश मानसरोवर जाने वाला मुख्य रास्ता भी बंद
पानी का स्तर कम हो गया है, लेकिन त्रिशूली बाजार के लोगों के मन से उस दिन का डर नहीं गया है। लोग उस पल को भूल नहीं पा रहे, जब उन्हें अपनी दुकान, घर और सामान छोड़कर सिर्फ़ अपनी जान बचाने के लिए भागना पड़ा था।