नई कपास की आवक शुरू, मंडियों में 9,200-9,500 रुपये क्विंटल भाव; नवंबर में क्या होगा?
Gaon Connection | Sept 05, 2026, 12:20 IST
देश के कई राज्यों में नई कपास की शुरुआती आवक शुरू हो गई है, लेकिन कच्चे कपास के भाव मज़बूत हैं। प्रमुख मंडियों में भाव 9,200-9,500 रुपये प्रति क्विंटल हैं, जो MSP से ऊपर हैं। अंतरराष्ट्रीय ICE Futures में गिरावट के कारण बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने खरीद भाव घटाए हैं। वहीं यार्न की मांग कमजोर होने से मिलें नई खरीद से बच रही हैं। नवंबर से कपास की आवक बढ़ने की उम्मीद है।
कपास के भाव में मजबूती बरकरार
देश के कई कपास उत्पादक राज्यों में नई खरीफ फसल की शुरुआती आवक शुरू हो गई है, लेकिन कच्चे कपास के भाव अभी भी मज़बूत बने हुए हैं। कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, तेलंगाना, मध्य प्रदेश और गुजरात के कुछ हिस्सों में कपास मंडियों में पहुँचने लगी है। रायचूर, बेल्लारी, अदोनी और यमीनिगुंटूर जैसे बाज़ारों में नमी के आधार पर कच्चे कपास का भाव 9,200 से 9,500 रुपये प्रति क्विंटल चल रहा है। यह सरकार के तय न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से ऊपर है।
दूसरी तरफ़, कपास कारोबार के सामने मांग की चुनौती बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में ICE Cotton Futures का भाव मंगलवार के करीब 93 सेंट से गिरकर लगभग 87 सेंट प्रति पाउंड रह गया है। इसके चलते भारत में बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने करीब 2,000 रुपये प्रति कैंडी (356 किलो) खरीद भाव घटा दिया है, लेकिन कम मांग के कारण इन भावों पर भी खरीदार नहीं मिल रहे हैं। वहीं, जिन कपड़ा मिलों के पास पहले से कपास का स्टॉक है, वे नई खरीदारी करने के बजाय फिलहाल इंतज़ार कर रही हैं।
केंद्र सरकार ने 2026-27 मार्केटिंग सीजन के लिए मध्यम रेशे वाले कपास का MSP 8,267 रुपये और लंबे रेशे वाले कपास का MSP 8,667 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। बिजनेस लाइन ने अपनी एक रिपोर्ट में रायचूर के एक सोर्सिंग एजेंट के हवाले से बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाज़ार के मौजूदा रुझान को देखते हुए कच्चे कपास के भाव MSP से ऊपर बने रहने की संभावना है। अभी रायचूर, बेल्लारी, अदोनी और यमीनिगुंटूर में भाव 9,200-9,500 रुपये प्रति क्विंटल हैं। हालाँकि, ICE Futures में गिरावट के कारण बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने करीब 2,000 रुपये प्रति कैंडी भाव घटाया है। भारतीय कपास निगम (CCI) ने अपनी कीमत में बदलाव नहीं किया है।
कपास के ऊँचे भाव के बीच यार्न यानी कपास से बनने वाले धागे की मांग कमजोर बनी हुई है। ऊँचे भाव पर यार्न खरीदने वाले ग्राहक नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में जिन मिलों के पास पहले से कपास का स्टॉक है, वे नई खरीदारी करने के बजाय बाज़ार की स्थिति पर नज़र रख रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार, बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा घटाए गए भाव पर भी फिलहाल खरीदार नहीं मिल रहे हैं। यानी नई फसल मंडियों में आने लगी है, लेकिन मिलों की कमजोर मांग के कारण कारोबार में अपेक्षित तेजी नहीं आई है।
गुजरात के कुछ हिस्सों में नई कपास की छोटी मात्रा में आवक शुरू हो गई है। राजकोट में कपास का भाव करीब 1,900-2,000 रुपये प्रति मन यानी 20 किलो बताया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल बुवाई में देरी के कारण नई फसल की आवक सामान्य से एक महीने से अधिक देर से शुरू हुई है और नवंबर की शुरुआत से इसमें तेज़ी आने की उम्मीद है। अभी नई फसल की साप्ताहिक आवक करीब 50,000 गांठ है, जबकि अगले दो सप्ताह में यह बढ़कर लगभग 1 लाख गांठ प्रति सप्ताह हो सकती है। एक गांठ का वजन 170 किलो है। पोपट के मुताबिक, फसल को अभी एक-दो दौर की बारिश की ज़रूरत है, जिससे पैदावार बेहतर हो सकती है।
कृषि मंत्रालय के 4 सितंबर के आँकड़ों के अनुसार, 2026 में देश में कपास की बुवाई 109.17 लाख हेक्टेयर में हुई है। पिछले साल इसी अवधि में यह रकबा 109.87 लाख हेक्टेयर था। यानी सालाना आधार पर कपास का बुवाई क्षेत्र थोड़ा कम हुआ है। अब आने वाले दिनों में नई फसल की बढ़ती आवक, ICE Cotton Futures की चाल और घरेलू मिलों की मांग कपास के भाव की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी। फिलहाल, शुरुआती आवक के बावजूद कई प्रमुख मंडियों में कपास MSP से ऊपर कारोबार कर रही है।
दूसरी तरफ़, कपास कारोबार के सामने मांग की चुनौती बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में ICE Cotton Futures का भाव मंगलवार के करीब 93 सेंट से गिरकर लगभग 87 सेंट प्रति पाउंड रह गया है। इसके चलते भारत में बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने करीब 2,000 रुपये प्रति कैंडी (356 किलो) खरीद भाव घटा दिया है, लेकिन कम मांग के कारण इन भावों पर भी खरीदार नहीं मिल रहे हैं। वहीं, जिन कपड़ा मिलों के पास पहले से कपास का स्टॉक है, वे नई खरीदारी करने के बजाय फिलहाल इंतज़ार कर रही हैं।