कपास पर नया आकलन: आयात बढ़ा, निर्यात घटा; किसानों और टेक्सटाइल उद्योग पर क्या होगा असर?
Mansi | Jul 30, 2026, 12:14 IST
कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने कपास के आयात और खपत के आंकड़ों में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। आयात को 47 लाख गांठ से बढ़ाकर 60 लाख गांठ किया गया है, जबकि घरेलू खपत का अनुमान 338 लाख गांठ से 348 लाख गांठ कर दिया गया है। निर्यात में कमी आई है, अब यह 15 लाख गांठ है।
कपास बदलाव में आया बड़ा बदलाव
देश में कपास की माँग और उपलब्धता को लेकर नया आकलन सामने आया है। कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीएआई) ने 2025-26 कपास सीज़न के लिए अपने अनुमान संशोधित करते हुए आयात, घरेलू खपत और कपास प्रेसिंग के आँकड़ों में बढ़ोतरी की है। वहीं, निर्यात के अनुमान में कटौती की गई है। संस्था का मानना है कि घरेलू वस्त्र उद्योग की बढ़ती ज़रूरत और आयात शुल्क में मिली अस्थायी राहत का असर अब कपास के व्यापार पर साफ़ दिखाई दे रहा है।
संशोधित अनुमान बताते हैं कि इस सीज़न देश में पहले की तुलना में अधिक कपास उपलब्ध रह सकती है। हालांकि, आयात बढ़ने और निर्यात घटने से बाज़ार की दिशा और किसानों को मिलने वाले दामों पर भी असर पड़ सकता है।
सीएआई ने कपास आयात का अनुमान 47 लाख गांठ से बढ़ाकर 60 लाख गांठ कर दिया है। यानी पहले के अनुमान की तुलना में 13 लाख गांठ अधिक कपास विदेशों से आने की संभावना है। संस्था का कहना है कि केंद्र सरकार द्वारा जून से अक्टूबर तक आयात पर 11 प्रतिशत शुल्क में दी गई छूट का लाभ उठाते हुए घरेलू वस्त्र मिलों ने बड़े पैमाने पर विदेशी कपास की खरीद की है। इसी कारण आयात के अनुमान में संशोधन करना पड़ा।
सीएआई के अनुसार जून के अंत तक भारतीय बंदरगाहों पर लगभग 51 लाख गांठ कपास पहुँच चुकी थी। संस्था का अनुमान है कि शुल्क छूट की अवधि समाप्त होने से पहले मिलें और अधिक कपास आयात कर सकती हैं। ऐसे में सीज़न के अंत तक 10 से 15 लाख गांठ अतिरिक्त आयात होने की संभावना जताई गई है। आयात बढ़ने के साथ ही कपास निर्यात का अनुमान 18 लाख गांठ से घटाकर 15 लाख गांठ कर दिया गया है। जून के अंत तक लगभग 11.25 लाख गांठ कपास का निर्यात हो चुका था। इससे संकेत मिलता है कि इस बार अधिक कपास घरेलू बाज़ार और वस्त्र उद्योग के उपयोग में आएगी।
मंडियों में कपास की आवक को देखते हुए सीएआई ने कपास प्रेसिंग का अनुमान 334 लाख गांठ से बढ़ाकर 337 लाख गांठ कर दिया है। इससे पहले के अनुमान की तुलना में अधिक कपास की उपलब्धता का संकेत मिलता है।
कंफेडरेशन ऑफ इंडियन टेक्सटाइल इंडस्ट्री (सीआईटीआई) के आँकड़ों के आधार पर सीएआई ने 2025-26 सीज़न में कपास की घरेलू खपत का अनुमान 338 लाख गांठ से बढ़ाकर 348 लाख गांठ कर दिया है। जून के अंत तक लगभग 261 लाख गांठ कपास की खपत होने का अनुमान है। यह दर्शाता है कि देश के वस्त्र उद्योग में कपास की माँग लगातार मज़बूत बनी हुई है।
संशोधित आकलन के अनुसार, चालू सीज़न में देश में कुल कपास उपलब्धता 452.59 लाख गांठ रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष की तुलना में काफ़ी अधिक है। इसमें 55.59 लाख गांठ का शुरुआती भंडार, 337 लाख गांठ की प्रेसिंग और 60 लाख गांठ का आयात शामिल है। वहीं, पिछले सीज़न की अधिक खपत को देखते हुए शुरुआती भंडार के अनुमान में पाँच लाख गांठ की कमी भी की गई है।
घरेलू खपत में बढ़ोतरी वस्त्र उद्योग की मज़बूत माँग को दर्शाती है, जबकि आयात में तेज़ वृद्धि उद्योग को पर्याप्त कच्चा माल उपलब्ध कराने में मदद कर सकती है। दूसरी ओर, अधिक आयात का असर घरेलू बाज़ार की कीमतों पर भी पड़ सकता है। ऐसे में आने वाले महीनों में कपास की कीमतों, किसानों की आय और वस्त्र उद्योग की गतिविधियों पर सभी की नज़र बनी रहेगी।
संशोधित अनुमान बताते हैं कि इस सीज़न देश में पहले की तुलना में अधिक कपास उपलब्ध रह सकती है। हालांकि, आयात बढ़ने और निर्यात घटने से बाज़ार की दिशा और किसानों को मिलने वाले दामों पर भी असर पड़ सकता है।
आयात अनुमान में क्यों हुआ बड़ा बदलाव?
जून तक क्या रही स्थिति?
मंडियों में कपास की आवक को देखते हुए सीएआई ने कपास प्रेसिंग का अनुमान 334 लाख गांठ से बढ़ाकर 337 लाख गांठ कर दिया है। इससे पहले के अनुमान की तुलना में अधिक कपास की उपलब्धता का संकेत मिलता है।
घरेलू खपत क्यों बढ़ाई गई?
कुल उपलब्धता में भी इज़ाफ़ा
घरेलू खपत में बढ़ोतरी वस्त्र उद्योग की मज़बूत माँग को दर्शाती है, जबकि आयात में तेज़ वृद्धि उद्योग को पर्याप्त कच्चा माल उपलब्ध कराने में मदद कर सकती है। दूसरी ओर, अधिक आयात का असर घरेलू बाज़ार की कीमतों पर भी पड़ सकता है। ऐसे में आने वाले महीनों में कपास की कीमतों, किसानों की आय और वस्त्र उद्योग की गतिविधियों पर सभी की नज़र बनी रहेगी।