अब तीन श्रेणियों में बँटेंगी यूपी की ग्राम पंचायतें, रैंकिंग के आधार पर मिलेगा 2 से 40 लाख रुपये तक का बजट, जानें पूरी खबर

Gaon Connection | Jul 01, 2026, 12:31 IST
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उत्तर प्रदेश में 1 जुलाई से ग्राम पंचायतों के लिए नई व्यवस्था लागू हो गई है। अब पंचायतों को उनके विकास स्तर के आधार पर अच्छी, मध्यम और पिछड़ी श्रेणियों में बाँटा जाएगा। इसी वर्गीकरण के अनुसार बजट आवंटित होगा। ग्राम पंचायतों का श्रेणीवार वर्गीकरण लागू होने के बाद नाली, सड़क, इंटरलॉकिंग, सीसी रोड, खड़ंजा, तालाब, बंधा निर्माण और अन्य आधारभूत विकास कार्यों को पंचायतों की ज़रूरत के अनुसार प्राथमिकता दी जाएगी।

अब रैंकिंग से तय होगा गाँवों का विकास
अब रैंकिंग से तय होगा गाँवों का विकास
उत्तर प्रदेश में एक जुलाई से ग्राम पंचायतों के विकास का नया मॉडल लागू होने जा रहा है। अब हर ग्राम पंचायत को उसके विकास स्तर, उपलब्ध संसाधनों और स्थानीय ज़रूरतों के आधार पर आँका जाएगा। इस मूल्यांकन के बाद पंचायतों को अच्छी, मध्यम और पिछड़ी तीन श्रेणियों में रखा जाएगा। सबसे अहम बदलाव यह है कि अब विकास कार्यों के लिए मिलने वाला बजट पंचायत की श्रेणी और उसकी कार्ययोजना के अनुसार तय होगा। राज्य सरकार का मानना है कि इससे संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और जिन गाँवों को अधिक विकास की ज़रूरत है, उन्हें प्राथमिकता मिल सकेगी।

एक जुलाई से देश में विकसित भारत–गारंटी फ़ॉर रोज़गार एंड आजीविका मिशन (VB-GRAM-G) योजना लागू हो गई है। इसमें ग्रामीण विकास और रोज़गार से जुड़े कई अन्य प्रावधान भी लागू किए जा रहे हैं। ग्रामीण परिवारों को अब एक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों तक रोज़गार उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं मज़दूरी के भुगतान में देरी होने पर 0.5 प्रतिशत की दर से प्रतिकर देने की व्यवस्था भी की गई है। इसके अलावा पंचायतों में कार्ययोजना आधारित बजट, कर्मचारियों के प्रशिक्षण और विकास कार्यों की पारदर्शी निगरानी जैसे प्रावधानों के ज़रिए गाँवों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मज़बूत करने की तैयारी की गई है।

विकास और ज़रूरत के आधार पर होगी पंचायतों की रैंकिंग, उसी हिसाब से मिलेगा बजट

नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक ग्राम पंचायत का मूल्यांकन उसके मौजूदा विकास स्तर, उपलब्ध संसाधनों और स्थानीय आवश्यकताओं के आधार पर किया जाएगा। इसके बाद पंचायतों को अच्छी, मध्यम और पिछड़ी श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाएगा। प्रत्येक पंचायत अपनी कार्ययोजना तैयार करेगी और उसी के अनुरूप बजट आवंटित होगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जिन गाँवों में बुनियादी सुविधाओं की कमी अधिक है, वहाँ विकास कार्यों के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराए जा सकें।

फिलहाल ग्राम पंचायतों को राज्य वित्त आयोग, केंद्रीय वित्त आयोग और मनरेगा जैसी योजनाओं के माध्यम से बजट मिलता है। वर्तमान व्यवस्था में किसी पंचायत को एक वर्ष में न्यूनतम दो लाख रुपये और अधिकतम 40 लाख रुपये तक की राशि मिल सकती है। नई प्रणाली लागू होने के बाद यह धनराशि पंचायत की श्रेणी और उसकी स्वीकृत कार्ययोजना के आधार पर तय की जाएगी, जिससे बजट का उपयोग अधिक प्रभावी और ज़रूरत आधारित हो सके।

भुगतान में देरी पर मिलेगा प्रतिकर

नई व्यवस्था में ग्रामीण परिवारों को एक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों तक रोज़गार उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही यदि श्रमिकों की मज़दूरी का भुगतान तय समय के भीतर नहीं किया जाता है, तो उन्हें 0.5 प्रतिशत की दर से प्रतिकर दिया जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य श्रमिकों के हितों की रक्षा करना और समय पर भुगतान सुनिश्चित करना है।

योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए मनरेगा से जुड़े कर्मचारियों और तकनीकी सहायकों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। इसके लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की जा रही है, ताकि नई व्यवस्था के अनुरूप ग्राम पंचायतों में कार्यों का संचालन बिना किसी बाधा के हो सके।

पिछड़े गाँवों को दी जाएगी प्राथमिकता

ग्राम पंचायतों का श्रेणीवार वर्गीकरण लागू होने के बाद नाली, सड़क, इंटरलॉकिंग, सीसी रोड, खड़ंजा, तालाब, बंधा निर्माण और अन्य आधारभूत विकास कार्यों को पंचायतों की ज़रूरत के अनुसार प्राथमिकता दी जाएगी। इससे पिछड़े क्षेत्रों में विकास कार्यों की गति तेज़ होने और संसाधनों का बेहतर उपयोग होने की उम्मीद है।
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