बंगाल की खाड़ी में नया सिस्टम सक्रिय, अगले 3 दिन इन राज्यों में भारी बारिश के आसार; जानें दिल्ली, हरियाणा और यूपी में कब होगी बारिश
Gaon Connection | Aug 13, 2026, 13:39 IST
बंगाल की खाड़ी में इस समय एक कम दबाव का क्षेत्र सक्रिय है, जो जल्द ही डिप्रेशन में बदलने की संभावना है। इससे पश्चिम बंगाल, ओडिशा, झारखंड और छत्तीसगढ़ में बारिश की गतिविधियां तेज होंगी। शुक्रवार तक मछुआरों को समुद्र में जाने से परहेज करने की सलाह दी गई है। इसके बाद यह प्रणाली उत्तर-पश्चिम भारत की दिशा में आगे बढ़ सकती है, जिससे मानसून की गतिविधियाँ चालू होंगी।
बंगाल की खाड़ी में बन रहा डिप्रेशन
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने पश्चिम बंगाल, ओडिशा, झारखंड और छत्तीसगढ़ में अगले दो से तीन दिनों के दौरान भारी से बहुत भारी बारिश का पूर्वानुमान जारी किया है। कुछ इलाकों में बेहद भारी बारिश भी हो सकती है। बंगाल की खाड़ी में बना कम दबाव का क्षेत्र गुरुवार को और मजबूत होकर अच्छी तरह चिह्नित निम्न दबाव क्षेत्र में बदल गया है और इसके बाद इसके डिप्रेशन में तब्दील होने की संभावना है।
पश्चिम बंगाल में गुरुवार को भारी से बहुत भारी बारिश के साथ कुछ स्थानों पर अत्यधिक भारी बारिश हो सकती है। शुक्रवार को भी भारी से बहुत भारी बारिश और शनिवार यानी स्वतंत्रता दिवस पर भारी बारिश का अनुमान है। मौसम प्रणाली के प्रभाव को देखते हुए ओडिशा, झारखंड और छत्तीसगढ़ के लिए भी बारिश की चेतावनी बढ़ाई गई है। ओडिशा और पश्चिम बंगाल के तटों पर शुक्रवार तक मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है।
मौसम विभाग के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में सक्रिय यह मौसम प्रणाली आगे बढ़ते हुए तटीय पश्चिम बंगाल और उससे सटे बांग्लादेश तथा उत्तर-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी की ओर जा सकती है। इसके बाद इसके पश्चिम बंगाल के मैदानी हिस्सों से होते हुए झारखंड की ओर बढ़ने का अनुमान है।
इस दौरान पश्चिम बंगाल, ओडिशा, झारखंड और छत्तीसगढ़ में बारिश का दौर तेज रह सकता है। मौसम मॉडल के अनुसार, अगले सप्ताह तक यह प्रणाली कमजोर पड़ने के बाद इसके अवशेष उत्तर-पश्चिम दिशा में मुड़ सकते हैं।
मौसम प्रणाली के कमजोर होने के बाद इसके अवशेष रविवार से दिल्ली-चंडीगढ़-हरियाणा क्षेत्र और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की ओर बढ़ सकते हैं। इससे उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में भी बारिश का एक नया दौर देखने को मिल सकता है।
यूरोपीय EC-AIFS मॉडल के अनुसार, बारिश का क्षेत्र उत्तर-पश्चिम भारत और हिमालय की तलहटी की ओर भी खिसक सकता है। इससे पश्चिमी उत्तर प्रदेश समेत आसपास के इलाकों में आने वाले दिनों में बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है।
मौसम के बदलते पैटर्न के बीच मानसून की बारिश का केंद्र अब पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत के साथ उत्तर-पश्चिमी भारत की ओर सिमटता दिखाई दे रहा है। उत्तर-पश्चिम भारत में पहले सक्रिय कम दबाव का क्षेत्र अब कमजोर पड़ गया है, जबकि बंगाल की खाड़ी में बना नया सिस्टम मानसून की बारिश का प्रमुख कारण बन रहा है।
देश के बाकी हिस्सों में अगले सप्ताह तक मानसून अपेक्षाकृत कमजोर रह सकता है। हालांकि, पूर्वी तट के कुछ हिस्सों में बारिश जारी रहने की संभावना है। पश्चिम भारत में गुजरात के पूर्वी हिस्सों, सौराष्ट्र और कच्छ में भी मध्यम बारिश बढ़ सकती है। इसकी वजह पहले बने कम दबाव वाले क्षेत्र के अवशेष और पाकिस्तान की ओर से आने वाले पश्चिमी विक्षोभ का आपस में प्रभाव डालना हो सकता है।
12 अगस्त तक देश में कुल बारिश सामान्य से करीब 12 प्रतिशत कम रही है। सबसे ज्यादा कमी पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत में दर्ज की गई है, जहां बारिश सामान्य से 26 प्रतिशत कम है। दक्षिणी प्रायद्वीप में बारिश 19 प्रतिशत कम है, हालांकि यह अभी भी IMD की सामान्य बारिश की श्रेणी में है।
उत्तर-पश्चिम भारत में बारिश की कमी 11 प्रतिशत है, जबकि मध्य भारत में बारिश लगभग सामान्य रही है और कमी सिर्फ 1 प्रतिशत है। बंगाल की खाड़ी में बनने वाला नया डिप्रेशन पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत में बारिश की कमी को कुछ हद तक कम कर सकता है। इसके उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ने पर उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में भी बारिश की स्थिति बेहतर होने की उम्मीद है।
कुल मिलाकर, मानसून के इस अपेक्षाकृत कमजोर दौर में बंगाल की खाड़ी का नया सिस्टम पूर्वी भारत में कम समय में तेज बारिश ला सकता है और अगले चरण में उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों में भी बारिश बढ़ा सकता है।
पश्चिम बंगाल में गुरुवार को भारी से बहुत भारी बारिश के साथ कुछ स्थानों पर अत्यधिक भारी बारिश हो सकती है। शुक्रवार को भी भारी से बहुत भारी बारिश और शनिवार यानी स्वतंत्रता दिवस पर भारी बारिश का अनुमान है। मौसम प्रणाली के प्रभाव को देखते हुए ओडिशा, झारखंड और छत्तीसगढ़ के लिए भी बारिश की चेतावनी बढ़ाई गई है। ओडिशा और पश्चिम बंगाल के तटों पर शुक्रवार तक मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है।
बंगाल की खाड़ी में बन रहा डिप्रेशन, इन राज्यों में बढ़ेगा बारिश का असर
इस दौरान पश्चिम बंगाल, ओडिशा, झारखंड और छत्तीसगढ़ में बारिश का दौर तेज रह सकता है। मौसम मॉडल के अनुसार, अगले सप्ताह तक यह प्रणाली कमजोर पड़ने के बाद इसके अवशेष उत्तर-पश्चिम दिशा में मुड़ सकते हैं।
रविवार से उत्तर-पश्चिम भारत में भी बारिश बढ़ने के संकेत
यूरोपीय EC-AIFS मॉडल के अनुसार, बारिश का क्षेत्र उत्तर-पश्चिम भारत और हिमालय की तलहटी की ओर भी खिसक सकता है। इससे पश्चिमी उत्तर प्रदेश समेत आसपास के इलाकों में आने वाले दिनों में बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है।
देश में मानसून का फोकस अब पूर्व और उत्तर-पश्चिम भारत पर
देश के बाकी हिस्सों में अगले सप्ताह तक मानसून अपेक्षाकृत कमजोर रह सकता है। हालांकि, पूर्वी तट के कुछ हिस्सों में बारिश जारी रहने की संभावना है। पश्चिम भारत में गुजरात के पूर्वी हिस्सों, सौराष्ट्र और कच्छ में भी मध्यम बारिश बढ़ सकती है। इसकी वजह पहले बने कम दबाव वाले क्षेत्र के अवशेष और पाकिस्तान की ओर से आने वाले पश्चिमी विक्षोभ का आपस में प्रभाव डालना हो सकता है।
बारिश की कमी 12 प्रतिशत, पूर्वोत्तर भारत में सबसे ज्यादा कमी
उत्तर-पश्चिम भारत में बारिश की कमी 11 प्रतिशत है, जबकि मध्य भारत में बारिश लगभग सामान्य रही है और कमी सिर्फ 1 प्रतिशत है। बंगाल की खाड़ी में बनने वाला नया डिप्रेशन पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत में बारिश की कमी को कुछ हद तक कम कर सकता है। इसके उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ने पर उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में भी बारिश की स्थिति बेहतर होने की उम्मीद है।
कुल मिलाकर, मानसून के इस अपेक्षाकृत कमजोर दौर में बंगाल की खाड़ी का नया सिस्टम पूर्वी भारत में कम समय में तेज बारिश ला सकता है और अगले चरण में उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों में भी बारिश बढ़ा सकता है।