पंचायतों से शुरू होगा महिला सम्मान और सुरक्षा का नया अभियान, 17.5 लाख पुरुष जनप्रतिनिधियों को मिलेगा प्रशिक्षण
Gaon Connection | Jun 19, 2026, 13:38 IST
महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और लैंगिक समानता को बढ़ावा देने के लिए पंचायती राज मंत्रालय ने "निर्भय चेतना" पहल शुरू की है। इसके तहत 17.5 लाख से अधिक पुरुष निर्वाचित प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। साथ ही "निर्भय नेत्री" के माध्यम से 14.5 लाख महिला प्रतिनिधियों को प्रशिक्षित किया जाएगा और "निर्भय दृष्टि" के तहत पंचायतों में सुरक्षा अवसंरचना को मज़बूत किया जाएगा।
‘निर्भय चेतना’ से महिलाओं को मिलेगा सशक्त माहौल
महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और लैंगिक समानता को पंचायतों के विकास एजेंडे के केंद्र में लाने के लिए पंचायती राज मंत्रालय ने "निर्भय चेतना" पहल शुरू की है। "निर्भय रहो" कार्यक्रम के तहत संचालित इस राष्ट्रीय अभियान का उद्देश्य ग्रामीण भारत में महिलाओं के लिए अधिक सुरक्षित, सम्मानजनक और समावेशी सामाजिक वातावरण तैयार करना है।
इस पहल के तहत देशभर की पंचायतों से जुड़े 17.5 लाख से अधिक पुरुष निर्वाचित प्रतिनिधियों को महिलाओं के अधिकारों, लैंगिक समानता, संवैधानिक मूल्यों और महिला सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए राज्य, ज़िला और ब्लॉक स्तर पर 28,500 मास्टर ट्रेनर्स का नेटवर्क भी तैयार किया जा रहा है।
पंचायती राज मंत्रालय का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत प्रतिनिधि केवल जनप्रतिनिधि नहीं बल्कि सामाजिक नेतृत्वकर्ता भी होते हैं। उनकी सोच और निर्णय स्थानीय समाज पर गहरा प्रभाव डालते हैं। ऐसे में "निर्भय चेतना" के माध्यम से पुरुष जनप्रतिनिधियों को महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान के समर्थक के रूप में सशक्त बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
अभियान के तहत देश के सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की पंचायतों तक पहुँच बनाते हुए 17.5 लाख से अधिक पुरुष निर्वाचित प्रतिनिधियों को प्रशिक्षित किया जाएगा। प्रशिक्षण में महिलाओं की गरिमा, सुरक्षा, समान अवसर और संवैधानिक अधिकारों से जुड़े विषय शामिल होंगे।
नई दिल्ली स्थित भारतीय लोक प्रशासन संस्थान (IIPA) में आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर पंचायती राज मंत्रालय के सचिव विवेक भारद्वाज ने कहा कि विकसित भारत का सपना महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और समान भागीदारी के बिना पूरा नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि पंचायतें सामाजिक और लोकतांत्रिक परिवर्तन की सबसे व्यापक संस्थागत संरचनाओं में से एक हैं। उन्होंने कहा कि "निर्भय चेतना" स्थानीय नेतृत्व को इस दृष्टिकोण से सशक्त बनाने का प्रयास है कि महिलाओं की गरिमा, सुरक्षा और अवसर विकास की अनिवार्य शर्त हैं।
मंत्रालय के अपर सचिव सुशील कुमार लोहानी ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान केवल प्रशासनिक विषय नहीं बल्कि समाज की सामूहिक ज़िम्मेदारी है। जब स्थानीय नेतृत्व लैंगिक समानता और महिला सुरक्षा के प्रति संवेदनशील होता है, तब पंचायतें महिलाओं और बालिकाओं के लिए अधिक सुरक्षित और अवसर-संपन्न वातावरण उपलब्ध करा सकती हैं।
"निर्भय चेतना" के साथ-साथ "निर्भय नेत्री" कार्यक्रम के तहत देशभर की 14.5 लाख से अधिक महिला निर्वाचित प्रतिनिधियों को कानूनी साक्षरता और क्षमता निर्माण का प्रशिक्षण दिया जाएगा। वहीं "निर्भय दृष्टि" पहल के माध्यम से पंचायत स्तर पर सीसीटीवी जैसी सुरक्षा व्यवस्थाओं को बढ़ावा दिया जाएगा।
पंचायती राज मंत्रालय का कहना है कि "निर्भय रहो" कार्यक्रम के तीनों घटक—निर्भय चेतना, निर्भय नेत्री और निर्भय दृष्टि—महिलाओं की सुरक्षा, नेतृत्व, भागीदारी और सशक्तिकरण को एक समग्र दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ाने का काम करेंगे। इससे पंचायतों को अधिक संवेदनशील, उत्तरदायी और समावेशी संस्थानों के रूप में विकसित करने में मदद मिलेगी।
इस पहल के तहत देशभर की पंचायतों से जुड़े 17.5 लाख से अधिक पुरुष निर्वाचित प्रतिनिधियों को महिलाओं के अधिकारों, लैंगिक समानता, संवैधानिक मूल्यों और महिला सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए राज्य, ज़िला और ब्लॉक स्तर पर 28,500 मास्टर ट्रेनर्स का नेटवर्क भी तैयार किया जा रहा है।