बूंद-बूंद को तरसेंगे लोग! नीति आयोग की रिपोर्ट में सामने आई जल संकट की डरावनी तस्वीर! कई राज्यों में हालात बेहद खराब

Preeti Nahar | May 26, 2026, 15:32 IST
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नीति आयोग की ICED-India Climate & Energy Dashboard रिपोर्ट के अनुसार तमिलनाडु, कर्नाटक, तेलंगाना, महाराष्ट्र और राजस्थान जैसे राज्यों में पानी की भारी कमी देखी जा रही है। वहीं पूर्वोत्तर भारत, केरल और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में पानी की उपलब्धता बेहतर बनी हुई है। रिपोर्ट चेतावनी देती है कि अगर पानी बचाने और भूजल recharge पर गंभीर कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में देश के कई बड़े शहरों में जल संकट और गहरा सकता है।
प्यासा होता भारत: कई राज्यों में पानी का स्तर पहुंचा खतरे के निशान पर
प्यासा होता भारत: कई राज्यों में पानी का स्तर पहुंचा खतरे के निशान पर
Absolute Water Scarcity: देश के कई हिस्सों में इस समय पानी का संकट लगातार गहराता जा रहा है। नीति आयोग (NITI Aayog) के India Climate & Energy Dashboard (ICED) की रिपोर्ट ने भारत की जल स्थिति को लेकर चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट के मुताबिक दक्षिण और पश्चिम भारत के कई राज्य गंभीर जल संकट की ओर बढ़ रहे हैं, जबकि कुछ इलाकों में हालात “Absolute Water Scarcity” तक पहुँच चुके हैं। बढ़ती आबादी, भूजल का अत्यधिक इस्तेमाल और अनियमित बारिश ने समस्या को और गंभीर बना दिया है।

कहीं सूखे हैं नल, तो कहीं भूजल पहुँचा खतरे के निशान पर

देश भर में पानी की उपलब्धता 2025 से 2050 तक की- स्त्रोत Central Water Commission CWC
देश भर में पानी की उपलब्धता 2025 से 2050 तक की- स्त्रोत Central Water Commission CWC
देश में गर्मी बढ़ रही है और उसके साथ बढ़ रहा है पानी का संकट। नीति आयोग (NITI Aayog) के India Climate & Energy Dashboard यानी ICED की ताजा रिपोर्ट भारत की एक चिंताजनक तस्वीर दिखाती है। रिपोर्ट बताती है कि देश के कई हिस्से अब “Water Scarcity” यानी पानी की कमी और “Absolute Scarcity” यानी गंभीर जल संकट की ओर बढ़ चुके हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक दक्षिण भारत, पश्चिम भारत और उत्तर-पश्चिम के कई इलाकों में भूजल तेजी से घट रहा है। हालत यह है कि कुछ राज्यों में लोगों के पास पीने और खेती के लिए पर्याप्त पानी तक नहीं बच रहा। दूसरी तरफ पूर्वोत्तर और पश्चिमी घाट के कई हिस्सों में अब भी पानी की स्थिति अपेाकृत बेहतर बनी हुई है।

कैसे मापा जाता है पानी का स्तर?

ICED रिपोर्ट पानी की उपलब्धता को चार हिस्सों में बांटती है:

श्रेणीस्थिति का मतलब
No Stressजहाँ पानी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है
Stressजहाँ पानी पर दबाव बढ़ रहा है
Scarcityजहाँ पानी की कमी होने लगी है
Absolute Scarcityजहाँ गंभीर जल संकट की स्थिति है

कौन से राज्य सबसे ज्यादा संकट में?

आने वाले दिनों में  तमिलनाडु मेंऔर बढ़ सकता है पानी का संकट
आने वाले दिनों में तमिलनाडु मेंऔर बढ़ सकता है पानी का संकट
अगर मैप को देखें तो तमिलनाडु, कर्नाटक, तेलंगाना, महाराष्ट्र और राजस्थान के कई जिले गहरे लाल रंग में दिखाई देते हैं। इसका मतलब है कि वहां “Absolute Water Scarcity” की स्थिति बन चुकी है।

महाराष्ट्र में बढ़ेगी पानी की कमी

तमिलनाडु की स्थिति सबसे ज्यादा चिंता बढ़ाने वाली मानी जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार राज्य के अधिकांश जिलों में पानी की उपलब्धता बेहद कम हो चुकी है। बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे बड़े शहर भी लगातार गिरते भूजल स्तर से जूझ रहे हैं।

महाराष्ट्र का मराठवाड़ा और विदर्भ इलाका हर साल सूखे और पानी की कमी की खबरों में रहता है।

महाराष्ट्र में पानी की उपलब्धता 2025 से 2050 तक की तुलना, जिसमें बढ़ेगा जल संकट
महाराष्ट्र में पानी की उपलब्धता 2025 से 2050 तक की तुलना, जिसमें बढ़ेगा जल संकट

राजस्थान में 2021-22 से 2023-24 तक क्या बदला?

राजस्थान में पोस्ट मानसून 2021-22 और 2023-24 की तुलना देखें
राजस्थान में पोस्ट मानसून 2021-22 और 2023-24 की तुलना देखें
राजस्थान में भी हालात बहुत अच्छे नहीं हैं-

लाल और नारंगी क्षेत्र बढ़े- 2021-22 के मुकाबले 2023-24 के मैप में कई जिलों में लाल और नारंगी रंग ज्यादा दिखाई दे रहे हैं। इसका मतलब है कि उन इलाकों में भूजल स्तर और नीचे गया है

कुछ इलाकों में सुधार भी- कुछ जिलों में हरे रंग का विस्तार दिखता है, जो संकेत देता है कि वहां बारिश या जल संरक्षण की वजह से थोड़ी राहत मिली। लेकिन कुल मिलाकर संकट बढ़ता हुआ नजर आता है।

गुजरात, हरियाणा और पंजाब जैसे खेती प्रधान राज्यों में ट्यूबवेल और भूजल के अत्यधिक इस्तेमाल ने संकट को और बढ़ा दिया है। उत्तर प्रदेश के कई हिस्से भी “Scarcity Zone” में आते हैं।

सबसे ज्यादा पानी की कमी वाले राज्य (Lowest Water Availability)

राज्यस्थिति
Tamil Naduदेश के सबसे ज्यादा जल संकट वाले राज्यों में शामिल, कई जिलों में बेहद कम जल उपलब्धता
Karnatakaखासकर उत्तर और आंतरिक हिस्सों में गंभीर जल संकट
Telanganaबड़े हिस्से में पानी की भारी कमी
Maharashtraमराठवाड़ा और विदर्भ क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित
Rajasthanपश्चिमी जिलों में लगातार जल संकट
Gujaratकई इलाकों में भूजल स्तर लगातार गिरा
Haryanaभूजल दोहन के कारण स्थिति खराब
Punjabखेती में अधिक पानी उपयोग होने से दबाव बढ़ा
Uttar Pradeshकई जिले “Scarcity” श्रेणी में
Andhra Pradeshसूखा प्रभावित हिस्सों में पानी की कमी

किन राज्यों में है अभी राहत?

पूर्वोत्तर राज्यों में हालात अभी बेहतर- तस्वीर CWC
पूर्वोत्तर राज्यों में हालात अभी बेहतर- तस्वीर CWC
देश के पूर्वोत्तर राज्यों में स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है। असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय और सिक्किम जैसे राज्यों में भारी बारिश और नदियों की वजह से पानी की उपलब्धता ज्यादा बनी हुई है।

इसके अलावा केरल, छत्तीसगढ़, झारखंड और ओडिशा में भी कई हिस्सों को “No Stress” श्रेणी में रखा गया है। पश्चिमी घाट वाले क्षेत्रों में अच्छी बारिश होने के कारण वहां जल संकट फिलहाल उतना गंभीर नहीं दिख रहा।

जहाँ पानी की स्थिति सबसे बेहतर (Highest Water Availability)

राज्यस्थिति
Keralaसबसे बेहतर जल उपलब्धता वाले राज्यों में
Assamपूर्वोत्तर में पानी की पर्याप्त उपलब्धता
Arunachal Pradeshभारी वर्षा और नदी नेटवर्क का फायदा
Meghalayaदेश के सबसे ज्यादा बारिश वाले क्षेत्रों में शामिल
Chhattisgarhजल संसाधन अपेक्षाकृत बेहतर
Jharkhandकई हिस्सों में “No Stress” स्थिति
Odishaनदी और बारिश के कारण बेहतर स्थिति
Sikkimहिमालयी जल स्रोतों का लाभ

आखिर क्यों बढ़ रहा है जल संकट?

नीति आयोग पहले भी चेतावनी दे चुका है कि अगर हालात नहीं बदले तो आने वाले वर्षों में भारत की पानी की मांग उपलब्ध पानी से दोगुनी हो सकती है। पानी संकट के पीछे कई वजहें हैं जैसे-

  • भूजल का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल
  • बारिश का अनियमित होना
  • तेजी से बढ़ती आबादी
  • शहरों का विस्तार
  • पानी की बर्बादी
  • पानी बचाने की कमजोर व्यवस्था

सबसे ज्यादा असर किन राज्यों पर?

पानी की कमी का असर सिर्फ पीने के पानी तक सीमित नहीं है। इसका सीधा असर खेती, बिजली उत्पादन, उद्योग और रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ रहा है। कई शहरों में टैंकरों पर निर्भरता बढ़ रही है, तो गाँवों में लोग कई किलोमीटर दूर से पानी लाने को मजबूर हैं। महाराष्ट्र, कर्नाटक और तमिलनाडु के कई इलाकों में गर्मियों के दौरान जल संकट हर साल विकराल रूप लेता जा रहा है। कुछ विशेषज्ञ तो इसे आने वाले समय का सबसे बड़ा संकट मान रहे हैं।

रिपोर्ट साफ इशारा करती है कि अगर अभी से पानी बचाने, वर्षा जल संरक्षण और भूजल recharge पर काम नहीं हुआ, तो आने वाले समय में भारत के कई बड़े शहरों और राज्यों में हालात और गंभीर हो सकते हैं।
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