फसल ऋण के लिए नहीं देखा जाएगा सिबिल स्कोर, CM फडणवीस का बड़ा ऐलान, जानिए महाराष्ट्र में कब तक होगी कर्जमाफी
Gaon Connection | May 21, 2026, 17:30 IST
महाराष्ट्र सरकार ने किसानों को बड़ी राहत देते हुए फसल ऋण को सिबिल स्कोर से न जोड़ने का फैसला लिया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने जल्द कर्जमाफी लागू करने का भरोसा भी दिया। कमजोर मानसून की आशंका के बीच सरकार ने जल संरक्षण, प्रमाणित बीज, डिजिटल खेती, एआई आधारित ऐप और किसानों के लिए डिजिटल भुगतान जैसी कई नई योजनाओं की घोषणा की है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने किसानों को बड़ी राहत देते हुए कहा है कि फसल ऋण मंजूरी को किसानों के सिबिल स्कोर से नहीं जोड़ा जाएगा। उन्होंने बैंकों को साफ निर्देश दिए हैं कि किसी भी किसान को सिबिल स्कोर के आधार पर परेशान न किया जाए। खरीफ सीजन की तैयारियों की समीक्षा बैठक के बाद फडणवीस ने कहा कि बैंक मुख्यालय से लेकर शाखा स्तर तक निर्देश जारी किए गए हैं कि फसल ऋण देने में सिबिल स्कोर की शर्त लागू नहीं होगी। रिजर्व बैंक के अधिकारियों ने भी इस बात की पुष्टि की है। उन्होंने कहा, “कोई भी किसान सिबिल स्कोर की वजह से परेशान नहीं होना चाहिए।”
बैठक में कृषि ऋण और किसान कर्जमाफी से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार जल्द ही घोषित कृषि ऋण माफी योजना लागू करेगी। उन्होंने बताया कि इस संबंध में मंत्रिमंडल में चर्चा हो चुकी है और बाकी जिलों का डेटा मिलते ही 30 जून से पहले कर्जमाफी लागू कर दी जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि महाराष्ट्र में खरीफ खेती का रकबा लगभग 152 लाख हेक्टेयर है, जिसमें सोयाबीन और कपास की हिस्सेदारी करीब 88 लाख हेक्टेयर है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस बार मानसून चुनौतीपूर्ण रह सकता है। शुरुआती अनुमान के मुताबिक बारिश दीर्घकालिक औसत का करीब 88 प्रतिशत रह सकती है। फडणवीस ने कहा कि पश्चिम विदर्भ, मराठवाड़ा और उत्तर महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में बारिश का वितरण असमान हो सकता है, जिससे लंबे सूखे अंतराल और फसलों पर दबाव बढ़ने की आशंका है।
संभावित सूखे जैसी स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने जलयुक्त शिवार योजना के कार्यों को तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए हैं। जिलों को कंटिजेंसी प्लान तैयार करने और बदलते मौसम के अनुकूल बीज उपलब्ध कराने को कहा गया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि सोयाबीन, कपास, मक्का, धान, तूर और बाजरा बीज का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और सरकार प्रमाणित बीजों की आपूर्ति सुनिश्चित करेगी।
फडणवीस ने उर्वरक विक्रेताओं को भी सख्त चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अगर किसान डीएपी खरीदना चाहता है तो उसे जबरन दूसरे उत्पाद खरीदने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यूरिया लेने वाले किसान पर अतिरिक्त सामान खरीदने का दबाव डालना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि ऐसे मामलों में 400 से अधिक उर्वरक विक्रेताओं के लाइसेंस निलंबित या रद्द किए जा चुके हैं।
इस मौके पर मुख्यमंत्री ने डिजिटल कृषि से जुड़ी कई नई पहल भी शुरू कीं। उन्होंने “महाविस्तार 2.0” ऐप लॉन्च किया, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई की मदद से किसानों को स्थानीय भाषा में फसल पैटर्न, कीट नियंत्रण, मौसम पूर्वानुमान और फसल कीमतों की जानकारी देगा। इसके अलावा किसान “क्रॉपसैप” प्लेटफॉर्म पर फसल की तस्वीर अपलोड कर फसल की स्थिति, कीट हमले और इलाज संबंधी जानकारी भी प्राप्त कर सकेंगे।
राज्य सरकार ने डिजिटल फसल सर्वे प्रणाली भी शुरू की है, जिसके जरिए किसान मोबाइल फोन से सीधे फसल का विवरण अपलोड कर सकेंगे। इससे फसल बीमा रिकॉर्ड और दावों में पारदर्शिता बढ़ेगी। दूरदराज और पहाड़ी इलाकों में नेटवर्क नहीं होने पर किसान बाद में फोटो अपलोड कर सकेंगे।
फडणवीस ने बताया कि सरकार ने सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी आधारित भुगतान प्रणाली भी शुरू की है। इसके तहत सरकारी योजनाओं की राशि सीधे किसान के डिजिटल वॉलेट में पहुंचेगी। उन्होंने कहा कि क्यूआर कोड आधारित ट्रैसेबिलिटी से खरीदार यह भी जान सकेंगे कि उत्पाद किस गांव और खेत में उगाया गया है।
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि कृषि निर्यात के मामले में महाराष्ट्र ने बड़ी प्रगति की है। उन्होंने कहा कि देश के कुल अंगूर निर्यात में महाराष्ट्र की हिस्सेदारी 94 प्रतिशत, केले में 86 प्रतिशत और प्याज निर्यात में 85 प्रतिशत है। उन्होंने यह भी बताया कि वर्ष 2025-26 में महाडीबीटी के जरिए किसानों को 91 हजार 659 करोड़ 50 लाख रुपये की सहायता वितरित की गई है।