20 मौतों के बाद जागी व्यवस्था! अब मगरमच्छ दिखते ही इस गाँव के लोगों को अलर्ट करेगा AI, लग रहा स्मार्ट वॉर्निंग सिस्टम

Gaon Connection | Jun 15, 2026, 12:22 IST
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ओडिशा के केंद्रपाड़ा ज़िले के कुसुनपुर गाँव को 'स्मार्ट विलेज' के रूप में विकसित किया जा रहा है। परियोजना के तहत मानव-मगरमच्छ संघर्ष कम करने के लिए एआई आधारित चेतावनी प्रणाली लगाने की योजना है। साथ ही बुनियादी ढाँचे के विकास, हरित रोज़गार सृजन, ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने और विभिन्न वैज्ञानिक तकनीकों के ज़रिए गाँव के समग्र विकास पर फ़ोकस किया जाएगा।

मगरमच्छों के आतंक पर लगेगी लगाम
मगरमच्छों के आतंक पर लगेगी लगाम
ओडिशा के केंद्रपाड़ा जिले के कुसुनपुर गाँव को 'स्मार्ट विलेज' के रूप में विकसित किया जा रहा है। इस पहल के तहत गाँव में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित चेतावनी प्रणाली (वॉर्निंग सिस्टम) लगाने की तैयारी है जो मगरमच्छों की मौजूदगी का पता लगाकर ग्रामीणों को समय रहते अलर्ट करेगी। केंद्रपाड़ा राज्य के उन इलाक़ों में शामिल है जहाँ मानव-मगरमच्छ संघर्ष की घटनाएं सबसे ज़्यादा सामने आती हैं। पिछले चार वर्षों में यहाँ 20 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।

सीएसआईआर की विभिन्न प्रयोगशालाएं गाँव के दो प्रमुख प्रवेश मार्गों पर AI आधारित वन्यजीव पहचान और वॉर्निंग सिस्टम स्थापित करने की योजना बना रही हैं। इसका उद्देश्य मगरमच्छों की गतिविधियों पर नज़र रखना और लोगों की सुरक्षा बढ़ाना है।

गाँव के बुनियादी ढाँचे का होगा कायाकल्प

स्मार्ट विलेज परियोजना के तहत कुसुनपुर में कई आधारभूत सुविधाओं का विकास किया जाएगा। इसके तहत जल निकासी द्वार का नवीनीकरण, भूमिगत ड्रेनेज सिस्टम, सामुदायिक भवन का पुनर्निर्माण, सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण और श्मशान घाट का आधुनिकीकरण किया जाएगा। इसके अलावा गाँव की सड़कों का निर्माण कोल्ड मिक्स तकनीक, वेस्ट प्लास्टिक रोड तकनीक और सीमेंट ग्राउटेड बिटुमिनस मिक्स जैसी आधुनिक विधियों से किया जाएगा, जिससे बेहतर और टिकाऊ सड़कें तैयार की जा सकें।

रोज़गार और आय बढ़ाने वाली गतिविधियों को मिलेगा बढ़ावा

परियोजना के तहत गाँव में हरित आजीविका को बढ़ावा देने पर भी ज़ोर दिया जाएगा। सूखे फूलों का प्रसंस्करण, फ़्रीज-ड्राइड फलों का उत्पादन और पौष्टिक खाद्य उत्पादों का निर्माण जैसी गतिविधियों के ज़रिए ग्रामीणों के लिए रोज़गार के नए अवसर पैदा करने की योजना है। इसके अलावा बायोडिग्रेडेबल टेबलवेयर, हर्बल फ़्लोर क्लीनर, मच्छर रोधी लोशन और मधुमक्खी के मोम से सुगंधित मोमबत्तियां बनाने जैसे लघु उद्योग भी विकसित किए जाएंगे, जिससे स्थानीय उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा।

17 सीएसआईआर लैब तीन साल तक करेंगी सहयोग

सीएसआईआर-सीबीआरआई के निदेशक प्रदीप कुमार रामनचारला ने कहा कि अगले तीन वर्षों में सीएसआईआर की 17 प्रयोगशालाओं के वैज्ञानिक नियमित रूप से कुसुनपुर का दौरा करेंगे और विभिन्न तकनीकों के सफल क्रियान्वयन में सहयोग देंगे। उन्होंने कहा कि स्मार्ट गाँवों का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों को देश की विकास यात्रा से जोड़ना है, ताकि आर्थिक विकास और रोज़गार सृजन में गाँव भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकें।

जल फ़िल्टर और धुआँ रहित चूल्हे भी मिलेंगे

सीएसआईआर-आईएमएमटी, भुवनेश्वर के निदेशक रामानुज नारायण ने बताया कि उनका संस्थान गाँव के लिए टिकाऊ जल फ़िल्टर और धुआँ रहित चूल्हों की व्यवस्था करेगा। वहीं, परियोजना के नोडल अधिकारी किशोर एस. कुलकर्णी ने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों की मैपिंग, ज़रूरतों का आकलन और ग्रामीणों के साथ परामर्श की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है।
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