तिलहन की खेती ने पकड़ी रफ़्तार, मूंगफली और तिल की बुवाई बढ़ी; 200 लाख हेक्टेयर तक पहुँचने की उम्मीद
Gaon Connection | Aug 08, 2026, 16:13 IST
खरीफ़ सीज़न में तिलहन की बुवाई का रकबा धीरे-धीरे सामान्य स्तर पर लौट रहा है। शुक्रवार तक यह 180.20 लाख हेक्टेयर तक पहुँच गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में अधिक है। यदि अगस्त में मानसून अनुकूल रहता है, तो यह रकबा 200 लाख हेक्टेयर तक पहुँचने की उम्मीद है। मूंगफली और तिल की बुवाई में इज़ाफा हुआ है, जबकि अरंडी की बुवाई में कमी देखी जा रही है।
मूंगफली और तिल की बुवाई में तेज़ उछाल
खरीफ़ सीज़न में तिलहन की बुवाई का रकबा शुरुआती लगभग दो महीनों तक पिछड़ने के बाद अब बढ़कर सामान्य स्तर की ओर बढ़ रहा है। शुक्रवार तक देश में तिलहन का कुल रकबा 180.20 लाख हेक्टेयर पहुंच गया, जो पिछले स्तर की तुलना में करीब 3 प्रतिशत अधिक है। अधिकारियों के मुताबिक, अगर अगस्त में मानसून अनुकूल रहता है तो तिलहन का रकबा सामान्य स्तर करीब 200 लाख हेक्टेयर तक पहुँच सकता है। इससे खरीफ़ 2026 में तिलहन की बुवाई का रकबा सरकार के तय लक्ष्य के क़रीब पहुँचने की उम्मीद बढ़ी है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, सरकार ने खरीफ़ 2026 के लिए तिलहन का रकबा 206.45 लाख हेक्टेयर और उत्पादन का लक्ष्य 289.25 लाख टन रखा है। इसमें मूंगफली का उत्पादन लक्ष्य 113.50 लाख टन, सोयाबीन का 148.50 लाख टन, अरंडी का 21.50 लाख टन और तिल का 4.20 लाख टन है। पिछले खरीफ़ सीज़न यानी 2025 में तिलहन का उत्पादन 266.68 लाख टन रहा था और इसका रकबा 196.38 लाख हेक्टेयर था।
आंकड़ों के अनुसार, शुक्रवार तक मूंगफली का रकबा 46.82 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले साल की तुलना में 8.6 प्रतिशत अधिक है। सोयाबीन का रकबा 119.92 लाख हेक्टेयर रहा और इसमें 0.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। वहीं तिल का रकबा 9.96 लाख हेक्टेयर रहा, जो 16.9 प्रतिशत अधिक है। इसके उलट अरंडी के बीज का रकबा 23 प्रतिशत घटकर 2.27 लाख हेक्टेयर रह गया है। अरंडी के सबसे बड़े उत्पादक राज्य गुजरात में इसका रकबा 44 प्रतिशत घटकर 1.3 लाख हेक्टेयर रह गया है।
आंकड़ों के मुताबिक, रबी 2024 में ऑयलसीड्स मिशन शुरू होने के बाद यह चौथा सीज़न है। पहले दो सीज़न में तिलहन का रकबा कम रहा था, जबकि पिछले रबी सीज़न में मंडियों में सरसों की मज़बूत क़ीमतों के कारण तिलहन का रकबा बढ़ा था। इस खरीफ़ सीज़न की शुरुआत में भी रकबा घटने की आशंका थी, लेकिन जुलाई में अच्छी बारिश से शुरुआती कमी पूरी हो गई और अब रकबा पिछले स्तर से ऊपर पहुँच गया है।
जून में बारिश सामान्य से 35 प्रतिशत कम रही थी, जबकि जुलाई में 1 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई। अगस्त के पहले सप्ताह में बारिश सामान्य से 4 प्रतिशत कम रही। 1 जून से 7 अगस्त तक देशभर में मानसून की कुल बारिश सामान्य से 11 प्रतिशत कम दर्ज की गई।
अगस्त के पहले सप्ताह में मध्य प्रदेश में बारिश सामान्य से 56 प्रतिशत कम, महाराष्ट्र में 25 प्रतिशत कम और राजस्थान में 20 प्रतिशत कम रही। हालांकि, अधिकारियों के मुताबिक जुलाई के अंतिम सप्ताह में इन तीनों राज्यों में तिलहन फसलों के लिए पर्याप्त बारिश हुई थी। इसके विपरीत अगस्त के पहले सप्ताह में गुजरात में सामान्य से 60 प्रतिशत अधिक, तमिलनाडु में 45 प्रतिशत अधिक, कर्नाटक में 24 प्रतिशत अधिक और उत्तर प्रदेश में 36 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई। तेलंगाना में अगस्त के पहले सप्ताह में बारिश 22 प्रतिशत कम रही, लेकिन 1 जून से पूरे सीज़न की बारिश सामान्य से सिर्फ़ 5 प्रतिशत कम है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, सरकार ने खरीफ़ 2026 के लिए तिलहन का रकबा 206.45 लाख हेक्टेयर और उत्पादन का लक्ष्य 289.25 लाख टन रखा है। इसमें मूंगफली का उत्पादन लक्ष्य 113.50 लाख टन, सोयाबीन का 148.50 लाख टन, अरंडी का 21.50 लाख टन और तिल का 4.20 लाख टन है। पिछले खरीफ़ सीज़न यानी 2025 में तिलहन का उत्पादन 266.68 लाख टन रहा था और इसका रकबा 196.38 लाख हेक्टेयर था।
मूंगफली और तिल की बुवाई बढ़ी, अरंडी का रकबा घटा
जुलाई की अच्छी बारिश से भरपाई, अगस्त में मानसून अहम
जून में बारिश सामान्य से 35 प्रतिशत कम रही थी, जबकि जुलाई में 1 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई। अगस्त के पहले सप्ताह में बारिश सामान्य से 4 प्रतिशत कम रही। 1 जून से 7 अगस्त तक देशभर में मानसून की कुल बारिश सामान्य से 11 प्रतिशत कम दर्ज की गई।