हर 6 सेकेंड में हो रही एक गधे की हत्या! अभी नहीं चेते तो सिर्फ तस्वीर में दिखेंगे गधे, इसके पीछे है चीन की ये 'सनक'

Umang | May 09, 2026, 18:37 IST
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दुनिया भर में गधों की खाल के लिए बड़े पैमाने पर हत्या हो रही है। चीन की पारंपरिक दवा इजियाओ की बढ़ती मांग के कारण यह व्यापार तेजी से फैल रहा है। पाकिस्तान जैसे देश भी इस कारोबार में उतर आए हैं। केन्या जैसे देशों में गधों की संख्या तेजी से घट रही है।
गधों की घटती आबादी
गधों की घटती आबादी
दुनिया के गरीब और ग्रामीण इलाकों में गधा केवल बोझ ढोने वाला जानवर नहीं, बल्कि लाखों परिवारों की जिंदगी का आधार है। खेतों तक पानी पहुंचाना हो, लकड़ी और अनाज ढोना हो, बच्चों को स्कूल ले जाना हो या छोटे किसानों की रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करनी हों-गधे आज भी एशिया और अफ्रीका के करोड़ों लोगों के लिए जीवनरेखा बने हुए हैं लेकिन अब यही गधे अंतरराष्ट्रीय तस्करी और पारंपरिक दवाओं के बढ़ते कारोबार की वजह से बड़े पैमाने पर मारे जा रहे हैं। ब्रिटेन की अंतरराष्ट्रीय पशु कल्याण संस्था Brooke – Action for Working Horses and Donkeys के अनुसार दुनिया में “हर छह सेकेंड में एक गधे की हत्या की जा रही है।” यह आंकड़ा केवल पशु क्रूरता की कहानी नहीं, बल्कि उन गरीब समुदायों के भविष्य पर भी खतरे की घंटी है, जिनकी रोजी-रोटी इन जानवरों पर टिकी है। Brooke ने इस संकट को “हमारे समय के सबसे घातक पशु नरसंहारों में से एक” बताया है। संस्था के मुताबिक हर साल दुनिया भर में 60 लाख से अधिक गधों को उनकी खाल के लिए मार दिया जाता है। यह पूरा कारोबार “डंकी स्किन ट्रेड” के नाम से जाना जाता है, जो तेजी से कई देशों में फैल रहा है। अगर अभी इस पर रोक नहीं लगाई गई तो वो दिन दूर नहीं है जब गधे केवल तस्वीरों में देखने को मिले।

क्या है इजियाओ जिसकी वजह से बढ़ रही है हत्या?

इजियाओ (Ejiao) चीन की पारंपरिक दवा है, जिसे गधों की खाल से बनने वाले जिलेटिन से तैयार किया जाता है। चीन में इसे खून बढ़ाने, त्वचा बेहतर करने, नींद सुधारने और एंटी-एजिंग दवा के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि वैज्ञानिक रूप से इसके कई दावों की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक इजियाओ उद्योग को हर साल लगभग 59 लाख गधों की खाल की जरूरत पड़ती है। चीन में गधों की संख्या घटने के बाद अब अफ्रीका, पाकिस्तान और दूसरे देशों से बड़े पैमाने पर गधों की खाल और मांस आयात किया जा रहा है।

रात के अंधेरे में चोरी हो रहे गधे

पशु अधिकार संगठनों का कहना है कि अफ्रीका और एशिया के कई देशों में गधों को रात के अंधेरे में चुरा लिया जाता है। इसके बाद उन्हें बेहद खराब परिस्थितियों में ट्रकों में भरकर लंबी दूरी तक ले जाया जाता है। कई बार उन्हें बिना खाना-पानी दिए रखा जाता है। Brooke संस्था के मुताबिक कई मामलों में गधों की जिंदा खाल तक उतार दी जाती है। संस्था ने कहा है कि “ऐसी क्रूरता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।” संस्था दुनिया भर में इस व्यापार को रोकने के लिए अभियान चला रही है।

चीन की मांग और पाकिस्तान का नया कारोबार

हाल ही में पाकिस्तान और चीन के बीच एक समझौता हुआ है, जिसके तहत पाकिस्तान हर साल करीब 2.16 लाख गधों की खाल और मांस चीन को निर्यात करेगा। इसके लिए कराची और ग्वादर के पास नए स्लॉटरहाउस बनाए जा रहे हैं। पाकिस्तान में इस समय लगभग 52 लाख गधे हैं और इसे दुनिया में गधों की तीसरी सबसे बड़ी आबादी वाला देश माना जाता है। आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान को इस व्यापार से करोड़ों डॉलर की कमाई की उम्मीद है। चीन पहले भी नाइजीरिया, इथियोपिया, बोत्सवाना और दूसरे अफ्रीकी देशों से गधों की खाल आयात करता रहा है। चीन में गधों की संख्या घटने के बाद विदेशी बाजारों पर उसकी निर्भरता तेजी से बढ़ी है।

अफ्रीका में तेजी से खत्म हो रहे गधे

बीबीसी न्यूज़ की रिपोर्ट के मुताबिक केन्या में 2016 से 2019 के बीच लगभग आधे गधे इस व्यापार की वजह से खत्म हो गए। पशु अधिकार संगठन The Donkey Sanctuary ने इसे “क्रूर और अस्थिर व्यापार” बताया है। विशेषज्ञों के मुताबिक अफ्रीका और एशिया के गरीब समुदायों में गधे केवल जानवर नहीं, बल्कि आर्थिक सहारा हैं। कई परिवारों की खेती, पानी ढोने और रोजमर्रा की कमाई पूरी तरह इन पर निर्भर है। गधों की तेजी से घटती संख्या अब सीधे इन परिवारों की जिंदगी और आजीविका को प्रभावित कर रही है।

अफ्रीकी यूनियन ने लगाया प्रतिबंध

बढ़ते विरोध और पशु क्रूरता की चिंताओं के बीच फरवरी 2024 में अफ्रीकी यूनियन ने पूरे महाद्वीप में गधों को उनकी खाल के लिए मारने पर प्रतिबंध लगा दिया। इथियोपिया में आयोजित अफ्रीकी यूनियन शिखर सम्मेलन में यह फैसला लिया गया। पशु अधिकार कार्यकर्ताओं ने इसे ऐतिहासिक कदम बताया है। उनका कहना है कि अगर समय रहते इस व्यापार को नहीं रोका गया तो आने वाले वर्षों में कई देशों में गधों की आबादी गंभीर संकट में पहुंच सकती है।

केवल पशु संरक्षण नहीं, इंसानी संकट भी

विशेषज्ञों का कहना है कि यह मुद्दा केवल पशु संरक्षण तक सीमित नहीं है। गधों की कमी का सीधा असर गरीब ग्रामीण परिवारों की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। जिन इलाकों में गधे खत्म हो रहे हैं, वहां किसानों और मजदूरों की रोजमर्रा की जिंदगी कठिन होती जा रही है। पशु कल्याण संस्थाओं ने दुनिया भर की सरकारों से अपील की है कि गधों की अवैध तस्करी, हत्या और खाल के अंतरराष्ट्रीय कारोबार पर सख्त कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि अगर अभी कदम नहीं उठाए गए तो यह संकट आने वाले समय में और भी भयावह रूप ले सकता है।
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