वन स्टेशन वन प्रोडक्ट: रेलवे स्टेशनों पर बिकेंगे दिव्यांग कारीगरों के उत्पाद, 28 लाभार्थियों को मिले स्टॉल
Gaon Connection | Jun 11, 2026, 15:02 IST
पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत एमएसएमई मंत्रालय की ‘वन स्टेशन वन प्रोडक्ट’ (ओएसओपी) पहल दिव्यांग कारीगरों को रेलवे स्टेशनों पर अपने उत्पाद बेचने का अवसर दे रही है। अब तक 12 राज्यों के 28 दिव्यांग लाभार्थियों को स्टॉल आवंटित किए जा चुके हैं। यह पहल उनकी आय, बाजार तक पहुंच और आर्थिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने में मदद कर रही है।
दिव्यांग कारीगरों को मिला कारोबार का नया ठिकाना
पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए केंद्र सरकार की पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत एक नई पहल तेजी से आगे बढ़ रही है। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) मंत्रालय दिव्यांग कारीगरों के उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए "वन स्टेशन वन प्रोडक्ट" (ओएसओपी) योजना लागू कर रहा है। इसके तहत देश के प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर विशेष स्टॉल स्थापित किए जा रहे हैं, जहां दिव्यांग कारीगर अपने उत्पादों की बिक्री कर सकें।
सरकार का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य दिव्यांग कारीगरों को बाजार से जोड़ना, उनकी आय बढ़ाना और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। रेलवे स्टेशनों पर मिलने वाले इन स्टॉलों से कारीगरों को अपने उत्पादों को सीधे ग्राहकों तक पहुंचाने का अवसर मिल रहा है। एमएसएमई मंत्रालय के अनुसार, अब तक विभिन्न राज्यों के 28 दिव्यांग लाभार्थियों को ओएसओपी के तहत स्टॉल आवंटित किए जा चुके हैं। इनमें मोची, मूर्तिकार, बढ़ई, खिलौना निर्माता, धातु शिल्पकार, टोकरी बनाने वाले और दर्जी जैसे विभिन्न व्यवसायों से जुड़े कारीगर शामिल हैं।
एमएसएमई मंत्रालय के अनुसार, मध्य प्रदेश के दिव्यांग मूर्तिकार अतुल क्रिस्टल से बनी मूर्तियां और सजावटी वस्तुएं तैयार करते हैं। पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद उनकी डिजाइन और उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार हुआ। ओएसओपी पहल के तहत उन्हें इंदौर रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-1 पर दुकान आवंटित की गई। जनवरी 2026 में दुकान शुरू होने के बाद से उनकी बिक्री में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है।
एमएसएमई मंत्रालय के अनुसार, झारखंड के धातु शिल्पकार अजीत शर्मा को देवघर रेलवे स्टेशन के पास स्टॉल दिया गया है। अपने हस्तनिर्मित धातु उत्पादों की बिक्री से उन्होंने महज 15 दिनों में 19 हजार रुपये की कमाई की। शारीरिक चुनौतियों के बावजूद अजीत ने अपनी कला के दम पर स्थायी आजीविका का रास्ता बनाया है।
एमएसएमई मंत्रालय के अनुसार, राजस्थान के जयपुर निवासी दिव्यांग बढ़ई घनश्याम कुमावत को गांधीनगर रेलवे स्टेशन के पास स्टॉल आवंटित किया गया है। लकड़ी के उत्पादों की बिक्री से उन्होंने कम समय में अच्छी आय अर्जित की है। गुणवत्तापूर्ण उत्पादों के कारण उन्होंने ग्राहकों का भरोसा भी जीता है, जिससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।
मंत्रालय का कहना है कि ओएसओपी पहल केवल बिक्री का मंच नहीं है, बल्कि यह दिव्यांग कारीगरों को सम्मानजनक आजीविका और आर्थिक स्वतंत्रता प्रदान करने का माध्यम भी बन रही है। पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत कौशल विकास, प्रशिक्षण और बाजार सहायता को जोड़कर सरकार दिव्यांग कारीगरों को मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था से जोड़ने का प्रयास कर रही है। सरकार का मानना है कि इस पहल से दिव्यांग कारीगरों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा और वे आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकेंगे।
सरकार का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य दिव्यांग कारीगरों को बाजार से जोड़ना, उनकी आय बढ़ाना और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। रेलवे स्टेशनों पर मिलने वाले इन स्टॉलों से कारीगरों को अपने उत्पादों को सीधे ग्राहकों तक पहुंचाने का अवसर मिल रहा है। एमएसएमई मंत्रालय के अनुसार, अब तक विभिन्न राज्यों के 28 दिव्यांग लाभार्थियों को ओएसओपी के तहत स्टॉल आवंटित किए जा चुके हैं। इनमें मोची, मूर्तिकार, बढ़ई, खिलौना निर्माता, धातु शिल्पकार, टोकरी बनाने वाले और दर्जी जैसे विभिन्न व्यवसायों से जुड़े कारीगर शामिल हैं।
| व्यापार | कुल आवंटन | शामिल किए गए राज्य |
|---|---|---|
| मोची | 5 | गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, दिल्ली |
| मूर्तिकार | 6 | हरियाणा, ओडिशा, बिहार, मध्य प्रदेश |
| बढ़ई | 5 | महाराष्ट्र, हरियाणा, बिहार, गुजरात, राजस्थान |
| गुड़िया एवं खिलौने बनाने वाले | 6 | महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, पुडुचेरी, मध्य प्रदेश, हरियाणा |
| धातु शिल्पकार | 2 | झारखंड |
| टोकरी बनाने वाले | 2 | मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र |
| दर्जी | 2 | गोवा, हरियाणा |
| कुल स्टॉल | 28 | 12 राज्य/केंद्र शासित प्रदेश |