हफ्तेभर में 40% तक बढ़े प्याज़ के दाम, पकौड़ी दुकानदार का हिसाब बिगड़ा, जानिए लागत बढ़ने के बाद भी क्यों नहीं बढ़ा सकता कीमतें
Umang | Aug 22, 2026, 15:36 IST
त्योहारी सीज़न से पहले प्याज़ की कीमतों में तेज़ बढ़ोतरी ने आम लोगों के साथ छोटे दुकानदारों और सब्ज़ी विक्रेताओं की परेशानी बढ़ा दी है। 21 अगस्त को देश में प्याज़ की औसत खुदरा कीमत 40.79 रुपये किलो रही, जो एक महीने पहले 34.87 रुपये थी। सालाना आधार पर कीमत 42 प्रतिशत से अधिक बढ़ी है। कई शहरों में भाव 50-60 रुपये किलो तक पहुँच गया है। देरी से हुई बुआई और नई फसल की आवक में कमी से कीमतों पर दबाव बढ़ा है।
त्योहार से पहले प्याज़ ने बढ़ाई टेंशन
त्योहारी सीज़न से पहले प्याज़ की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों के साथ छोटे दुकानदारों और सब्ज़ी विक्रेताओं की परेशानी भी बढ़ा दी है। एक तरफ़ कई शहरों में प्याज़ का खुदरा भाव 50 से 60 रुपये किलो तक पहुँच गया है, वहीं दूसरी तरफ़ इसकी बढ़ी कीमत का असर उन छोटे कारोबारियों पर पड़ रहा है, जिनके रोज़मर्रा के काम में प्याज़ की खपत ज़्यादा होती है। ईटी नाउ की एक रिपोर्ट में पीटीआई के हवाले से बताया है कि भुवनेश्वर में प्याज़ की कीमत कुछ ही दिनों में 25-30 रुपये से बढ़कर 55-60 रुपये किलो तक पहुँच गई। वहीं, कुछ जगहों पर दो दिनों में ही कीमत लगभग दोगुनी हो गई है।
देशभर के औसत आँकड़े भी प्याज़ की बढ़ती कीमत की तस्वीर दिखा रहे हैं। 21 अगस्त को प्याज़ की औसत खुदरा कीमत 40.79 रुपये प्रति किलो पहुँच गई, जबकि 21 जुलाई को यह 34.87 रुपये प्रति किलो थी। यानी एक महीने में करीब 17 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। एक साल पहले 21 अगस्त 2025 को औसत खुदरा कीमत 28.72 रुपये किलो थी, जिसके मुकाबले इस साल कीमत 42 प्रतिशत से अधिक बढ़ चुकी है। महाराष्ट्र की लासलगाँव मंडी में भी एक सप्ताह के दौरान थोक कीमतों में 30 से 42 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस बढ़ोतरी का सीधा असर रसोई के साथ-साथ प्याज़ का इस्तेमाल करने वाले छोटे कारोबारियों की लागत पर पड़ रहा है।
अयोध्या (उत्तर प्रदेश) के साकेतपुरी में चाय-पकौड़ी की दुकान चलाने वाले पप्पू कुमार ने गाँव कनेक्शन को बताया कि प्याज़ महंगा होने से उनके लिए दुकान चलाना मुश्किल हो रहा है। उनके मुताबिक़, करीब एक सप्ताह पहले जो प्याज़ 25-30 रुपये किलो में मिल रहा था, अब उसके लिए करीब 60 रुपये किलो तक चुकाना पड़ रहा है।
पप्पू कुमार ने बताया कि पकौड़ी बनाने में प्याज़ का इस्तेमाल काफी अधिक होता है, इसलिए कीमत बढ़ने का सीधा असर उनकी लागत पर पड़ा है लेकिन वो ग्राहकों से पकौड़ी के लिए ज्यादा पैसे भी नहीं ले सकते। उनका कहना है कि अगर कीमत बढ़ाई गई तो ग्राहक कम हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि उनकी दुकान से सामान्य तौर पर दिनभर में करीब 300-400 रुपये ही बचते हैं और लगातार बढ़ी लागत के कारण लंबे समय तक घाटा सहना उनके लिए संभव नहीं होगा। अगर प्याज़ के दाम जल्द नीचे नहीं आते हैं तो उन्हें पकौड़ी की जगह कोई दूसरा सामान बेचने के बारे में सोचना पड़ सकता है।
साकेतपुरी में ही सब्ज़ी बेचने वाले मोहम्मद इस्माइल ने गाँव कनेक्शन को बताया कि प्याज़ महंगा होने का असर ग्राहकों की खरीदारी पर साफ़ दिखाई दे रहा है। उनके मुताबिक़, पहले कई ग्राहक एक बार में 2-3 किलो प्याज़ खरीद लेते थे, लेकिन दाम बढ़ने के बाद अब ज़्यादातर लोग आधा-आधा किलो प्याज़ ही ले रहे हैं।मोहम्मद इस्माइल के अनुसार, मात्रा कम होने से उनकी बिक्री भी प्रभावित हुई है। ग्राहक पहले जितनी मात्रा में प्याज़ खरीदते थे, अब उतनी नहीं खरीद रहे हैं। इससे सब्ज़ी विक्रेताओं की रोज़ की कमाई पर भी असर पड़ा है और बढ़ती कीमत के बावजूद उन्हें कोई खास अतिरिक्त मुनाफ़ा नहीं मिल रहा है।
प्याज़ की बढ़ती कीमत का असर थोक मंडियों में भी दिखाई दे रहा है। 21 अगस्त को देश में प्याज़ की औसत थोक कीमत 3,299.85 रुपये प्रति क्विंटल रही, जबकि 21 जुलाई को यह 2,745.58 रुपये प्रति क्विंटल थी। एक साल पहले 21 अगस्त 2025 को औसत थोक कीमत 2,257.69 रुपये प्रति क्विंटल थी।
महाराष्ट्र की लासलगाँव मंडी में प्याज़ का थोक भाव बढ़कर करीब 3,195 से 3,600 रुपये प्रति क्विंटल यानी 32-36 रुपये किलो तक पहुँच गया है। वहीं, दिल्ली की आज़ादपुर मंडी में अच्छी गुणवत्ता वाले प्याज़ का थोक भाव 45-50 रुपये किलो से ऊपर बताया गया है।
21 अगस्त को प्रमुख शहरों में प्याज़ के खुदरा भाव भी ऊँचे रहे। दिल्ली में करीब 55 रुपये, मुंबई में 37 रुपये, कोलकाता में 50 रुपये और चेन्नई में 58 रुपये किलो भाव दर्ज किया गया। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के मूल्य निगरानी विभाग के आँकड़ों के अनुसार, अलग-अलग बाज़ारों में प्याज़ का भाव 21 रुपये से लेकर 73 रुपये किलो तक रहा। दिल्ली में कीमत 55 रुपये किलो, उत्तर प्रदेश में 35.97 रुपये, बिहार में 37.46 रुपये, मध्य प्रदेश में 33.44 रुपये और राजस्थान में 37.47 रुपये किलो दर्ज की गई।
प्याज़ की कीमतों में बढ़ोतरी की एक वजह खरीफ़ प्याज़ की नई फसल की आवक में देरी बताई जा रही है। देश के कुछ हिस्सों में बुआई देर से शुरू होने के कारण नई फसल की आवक भी प्रभावित हुई है। दूसरी ओर, त्योहारी सीज़न से पहले प्याज़ की माँग बढ़ने से माँग और आपूर्ति के बीच अंतर बढ़ गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक़, बढ़ी कीमतों से राहत देने के लिए सरकार सितंबर से अपने सुरक्षित प्याज़ भंडार यानी बफर स्टॉक से प्याज़ मंडियों में उतारने की योजना बना रही है। अगर नई फसल की आवक बढ़ती है और सरकारी भंडार से प्याज़ की आपूर्ति शुरू होती है, तो आने वाले समय में कीमतों पर दबाव कम होने की उम्मीद की जा सकती है।
देशभर के औसत आँकड़े भी प्याज़ की बढ़ती कीमत की तस्वीर दिखा रहे हैं। 21 अगस्त को प्याज़ की औसत खुदरा कीमत 40.79 रुपये प्रति किलो पहुँच गई, जबकि 21 जुलाई को यह 34.87 रुपये प्रति किलो थी। यानी एक महीने में करीब 17 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। एक साल पहले 21 अगस्त 2025 को औसत खुदरा कीमत 28.72 रुपये किलो थी, जिसके मुकाबले इस साल कीमत 42 प्रतिशत से अधिक बढ़ चुकी है। महाराष्ट्र की लासलगाँव मंडी में भी एक सप्ताह के दौरान थोक कीमतों में 30 से 42 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस बढ़ोतरी का सीधा असर रसोई के साथ-साथ प्याज़ का इस्तेमाल करने वाले छोटे कारोबारियों की लागत पर पड़ रहा है।
अयोध्या में पकौड़ी बेचने वाले दुकानदार की बढ़ी लागत
पप्पू कुमार ने बताया कि पकौड़ी बनाने में प्याज़ का इस्तेमाल काफी अधिक होता है, इसलिए कीमत बढ़ने का सीधा असर उनकी लागत पर पड़ा है लेकिन वो ग्राहकों से पकौड़ी के लिए ज्यादा पैसे भी नहीं ले सकते। उनका कहना है कि अगर कीमत बढ़ाई गई तो ग्राहक कम हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि उनकी दुकान से सामान्य तौर पर दिनभर में करीब 300-400 रुपये ही बचते हैं और लगातार बढ़ी लागत के कारण लंबे समय तक घाटा सहना उनके लिए संभव नहीं होगा। अगर प्याज़ के दाम जल्द नीचे नहीं आते हैं तो उन्हें पकौड़ी की जगह कोई दूसरा सामान बेचने के बारे में सोचना पड़ सकता है।
ग्राहकों ने प्याज़ की खरीद घटाई
लासलगाँव और आज़ादपुर मंडी में भी बढ़े दाम
महाराष्ट्र की लासलगाँव मंडी में प्याज़ का थोक भाव बढ़कर करीब 3,195 से 3,600 रुपये प्रति क्विंटल यानी 32-36 रुपये किलो तक पहुँच गया है। वहीं, दिल्ली की आज़ादपुर मंडी में अच्छी गुणवत्ता वाले प्याज़ का थोक भाव 45-50 रुपये किलो से ऊपर बताया गया है।
अलग-अलग शहरों में 50 से 60 रुपये किलो तक भाव
देरी से हुई बुआई और बढ़ी माँग से दबाव
रिपोर्ट के मुताबिक़, बढ़ी कीमतों से राहत देने के लिए सरकार सितंबर से अपने सुरक्षित प्याज़ भंडार यानी बफर स्टॉक से प्याज़ मंडियों में उतारने की योजना बना रही है। अगर नई फसल की आवक बढ़ती है और सरकारी भंडार से प्याज़ की आपूर्ति शुरू होती है, तो आने वाले समय में कीमतों पर दबाव कम होने की उम्मीद की जा सकती है।