Digital India: गाँवों तक पहुँची सरकारी सेवाएँ, जानिए 70 हजार से ज्यादा महिला उद्यमी कैसे निभा रहीं बड़ी भूमिका
Mansi | Aug 12, 2026, 17:04 IST
उमंग और डिजिलॉकर मंचों पर करोड़ों लोग पंजीकृत हैं और डिजिटल सेवाओं का लाभ उठा रहे हैं। इन मंचों पर केंद्र और राज्य सरकारों की हजारों सेवाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं। डिजिलॉकर पर लोग अपने महत्वपूर्ण दस्तावेज़ों को डिजिटल रूप में सुरक्षित रख रहे हैं। सामान्य सेवा केंद्रों का विस्तार ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल पहुँच बढ़ा रहा है।
उमंग, डिजिलॉकर और सामान्य सेवा केंद्रों के ज़रिए गाँवों तक आसान डिजिटल सरकारी सेवाएँ पहुँच रही हैं
डिजिटल सेवाएँ अब सिर्फ़ शहरों तक सीमित नहीं रह गई हैं। मोबाइल फोन के ज़रिए सरकारी दस्तावेज़ हासिल करने से लेकर अलग-अलग सरकारी सेवाओं का लाभ लेने तक, लोगों के लिए कई काम घर बैठे करना आसान हुआ है। केंद्र सरकार के डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के तहत शुरू की गई उमंग और डिजिलॉकर जैसी सुविधाओं ने इस बदलाव को गति दी है। 31 जुलाई 2026 तक के आँकड़े बताते हैं कि इन दोनों मंचों पर करोड़ों लोग पंजीकृत हैं और बड़ी संख्या में डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं।
इस बदलाव का असर ग्रामीण भारत में भी दिखाई दे रहा है। सरकार गाँवों, दूरदराज़ और कम सेवा उपलब्धता वाले इलाक़ों में डिजिटल सेवाओं की पहुँच बढ़ाने के लिए ऑनलाइन मंचों के साथ सामान्य सेवा केंद्रों का नेटवर्क भी मजबूत कर रही है। इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 7 अगस्त 2026 को राज्यसभा में दी जानकारी में उमंग, डिजिलॉकर और सामान्य सेवा केंद्रों से जुड़े ये आँकड़े साझा किए। खास बात यह है कि बड़ी संख्या में सामान्य सेवा केंद्रों का संचालन महिला उद्यमियों द्वारा किया जा रहा है, जिससे डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ ग्रामीण महिलाओं के लिए रोज़गार और उद्यमिता के अवसर भी बढ़ रहे हैं।
31 जुलाई 2026 तक उमंग पर देशभर में करीब 2,575 सरकारी सेवाएँ उपलब्ध थीं। इनमें 880 सेवाएँ केंद्र सरकार की और 1,695 सेवाएँ राज्य सरकारों की हैं। उमंग के पंजीकृत उपयोगकर्ताओं की संख्या 11.66 करोड़ से अधिक हो चुकी है। पिछले तीन वर्षों में इस मंच पर करीब 798 करोड़ लेन-देन दर्ज किए गए हैं। वहीं, डिजिलॉकर पर 5,437 तरह के दस्तावेज़ और सेवाएँ उपलब्ध हैं। इनमें 661 केंद्र सरकार और 4,776 राज्य सरकारों से जुड़ी हैं। डिजिलॉकर के पंजीकृत उपयोगकर्ताओं की संख्या 72.43 करोड़ से अधिक है। पिछले तीन वर्षों में लोगों ने करीब 72.86 करोड़ दस्तावेज़ों का अभिगम किया है। इससे पता चलता है कि बड़ी संख्या में लोग अब ज़रूरी दस्तावेज़ों को डिजिटल रूप में सुरक्षित रखने और जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल करने लगे हैं।
सरकार ने ग्रामीण और दूरदराज़ इलाक़ों में डिजिटल सेवाओं की पहुँच बढ़ाने के लिए सामान्य सेवा केंद्रों का नेटवर्क मजबूत किया है। ये केंद्र लोगों को सरकारी सेवाओं के साथ बैंकिंग, वित्तीय, बीमा, पेंशन और उपयोगिता भुगतान जैसी सुविधाएँ भी उपलब्ध कराते हैं। 30 जून 2026 तक ग्राम पंचायत स्तर पर 4,07,122 सामान्य सेवा केंद्र काम कर रहे थे। इनमें से 70,069 केंद्रों का संचालन ग्राम स्तरीय महिला उद्यमियों द्वारा किया जा रहा था। ऐसे केंद्र उन लोगों के लिए खास तौर पर उपयोगी हैं, जिन्हें डिजिटल माध्यम से सरकारी सेवाओं का इस्तेमाल करने में परेशानी होती है। इससे एक तरफ़ ग्रामीण नागरिकों को स्थानीय स्तर पर सेवाएँ मिल रही हैं, वहीं दूसरी तरफ़ महिलाओं को डिजिटल उद्यमिता से जुड़ने का अवसर भी मिल रहा है।
उमंग और डिजिलॉकर को आधार, ई-साइन, एपीआई सेतु और दूसरे डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढाँचे से जोड़ा गया है। इसका उद्देश्य अलग-अलग सेवाओं के बीच बेहतर तालमेल बनाना और लोगों के लिए प्रक्रिया को आसान करना है। मोबाइल ऐप और वेब पोर्टल दोनों के ज़रिए इन सेवाओं का इस्तेमाल किया जा सकता है। डिजिटल दस्तावेज़ों के सत्यापन और सहमति के आधार पर दस्तावेज़ साझा करने जैसी सुविधाओं से कागज़ी प्रक्रिया और सरकारी दफ्तरों के बार-बार चक्कर लगाने की जरूरत कम हो सकती है। साथ ही, सरकार डिजिटल साक्षरता बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान जैसी पहल भी चला रही है। कई भारतीय भाषाओं में सेवाएँ उपलब्ध कराने और उपयोगकर्ता अनुभव को बेहतर बनाने पर भी काम किया जा रहा है, ताकि भाषा या तकनीकी जानकारी की कमी किसी नागरिक के लिए बाधा न बने।
सरकार का डिजिटल इंडिया कार्यक्रम जुलाई 2015 में शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य तकनीक की पहुँच बढ़ाने के साथ सरकारी सेवाओं को अधिक आसान, तेज़ और नागरिक-केंद्रित बनाना है। उमंग और डिजिलॉकर इसी दिशा में महत्वपूर्ण डिजिटल मंच बनकर उभरे हैं। सरकार के अनुसार, इन मंचों पर लगातार नई सेवाएँ और डिजिटल दस्तावेज़ जोड़े जा रहे हैं। केंद्र और राज्य सरकारों के विभागों को भी इनसे जोड़ने का काम जारी है। इसके साथ ही, सामान्य सेवा केंद्रों के विस्तार से उन लोगों तक भी डिजिटल सेवाएँ पहुँचाने की कोशिश हो रही है, जिनके लिए सीधे ऑनलाइन सेवाओं का इस्तेमाल करना आसान नहीं है।
आँकड़े बताते हैं कि सरकारी सेवाओं का डिजिटल दायरा लगातार बढ़ रहा है। अब चुनौती यह सुनिश्चित करने की है कि इन सुविधाओं का लाभ सिर्फ़ इंटरनेट और स्मार्टफोन की बेहतर पहुँच वाले लोगों तक सीमित न रहे। सामान्य सेवा केंद्रों, स्थानीय महिला उद्यमियों, बहुभाषी सेवाओं और डिजिटल साक्षरता के ज़रिए अगर यह पहुँच गाँवों के अंतिम व्यक्ति तक भी बनी रहती है, तो डिजिटल इंडिया का उद्देश्य और मजबूत हो सकता है।
इस बदलाव का असर ग्रामीण भारत में भी दिखाई दे रहा है। सरकार गाँवों, दूरदराज़ और कम सेवा उपलब्धता वाले इलाक़ों में डिजिटल सेवाओं की पहुँच बढ़ाने के लिए ऑनलाइन मंचों के साथ सामान्य सेवा केंद्रों का नेटवर्क भी मजबूत कर रही है। इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 7 अगस्त 2026 को राज्यसभा में दी जानकारी में उमंग, डिजिलॉकर और सामान्य सेवा केंद्रों से जुड़े ये आँकड़े साझा किए। खास बात यह है कि बड़ी संख्या में सामान्य सेवा केंद्रों का संचालन महिला उद्यमियों द्वारा किया जा रहा है, जिससे डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ ग्रामीण महिलाओं के लिए रोज़गार और उद्यमिता के अवसर भी बढ़ रहे हैं।
उमंग पर 2,575 और डिजिलॉकर पर 5,437 सेवाएँ उपलब्ध
गाँवों तक डिजिटल सेवा पहुँचाने में महिला उद्यमियों की बड़ी भूमिका
कागज़ी काम और सरकारी दफ्तरों के चक्कर कम करने पर जोर
डिजिटल इंडिया से नागरिक सेवाओं का बदलता तरीका
आँकड़े बताते हैं कि सरकारी सेवाओं का डिजिटल दायरा लगातार बढ़ रहा है। अब चुनौती यह सुनिश्चित करने की है कि इन सुविधाओं का लाभ सिर्फ़ इंटरनेट और स्मार्टफोन की बेहतर पहुँच वाले लोगों तक सीमित न रहे। सामान्य सेवा केंद्रों, स्थानीय महिला उद्यमियों, बहुभाषी सेवाओं और डिजिटल साक्षरता के ज़रिए अगर यह पहुँच गाँवों के अंतिम व्यक्ति तक भी बनी रहती है, तो डिजिटल इंडिया का उद्देश्य और मजबूत हो सकता है।