धान खरीद पर सरकार का बड़ा फैसला, इस बार 708.64 लाख टन का लक्ष्य; पिछले 3 साल से कम
Mansi | Sept 02, 2026, 18:03 IST
सरकार ने खरीफ विपणन सत्र 2026-27 के लिए धान खरीद का लक्ष्य 708.64 लाख टन तय किया है। यह लक्ष्य पिछले तीन वर्षों की वास्तविक खरीद से कम है, जो किसानों के लिए चिंता का विषय है। इस वर्ष धान की बुआई का रकबा भी पिछले साल की तुलना में कम हुआ है, जिससे उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
सरकार ने KMS 2026-27 के लिए धान खरीद का लक्ष्य 708.64 लाख टन
खरीफ सीज़न शुरू होने से पहले केंद्र सरकार ने धान खरीद को लेकर अपना अनुमान सामने रख दिया है। खरीफ मर्केत्तिंग सीजन (KMS) 2026-27 के लिए सरकार ने 708.64 लाख टन धान खरीदने का लक्ष्य तय किया है। खास बात यह है कि यह लक्ष्य पिछले तीन साल में हुई वास्तविक सरकारी खरीद से कम है। ऐसे में धान की खेती करने वाले किसानों की नज़र इस बार सरकारी खरीद केंद्रों पर रहेगी कि सीज़न में उनकी उपज की खरीद किस रफ़्तार से होती है।
सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है जब इस साल देश में धान की बुआई का रकबा भी पिछले साल के मुकाबले कम हुआ है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि सरकार इससे कम ही धान खरीदेगी। फसल का उत्पादन, मंडियों में धान की आवक और किसान सरकारी एजेंसियों को कितनी उपज बेचते हैं, इन सभी बातों से अंतिम खरीद का आंकड़ा तय होगा।
इस बार तय किए गए 708.64 लाख टन के लक्ष्य को पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों से समझें तो तस्वीर और साफ़ होती है। 2025-26 में 5 अगस्त 2026 तक ही 720.74 लाख टन धान खरीदा जा चुका था। यानी इस बार का पूरा सीज़न का लक्ष्य पिछले साल 5 अगस्त तक हुई खरीद से भी करीब 12 लाख टन कम है। इससे पहले 2024-25 में 708.85 लाख टन और 2023-24 में 689.56 लाख टन धान की सरकारी खरीद हुई थी। यानी पिछले तीन सीज़न में हर बार वास्तविक खरीद इस बार तय किए गए लक्ष्य के आसपास या उससे ऊपर रही है।
धान खरीद का लक्ष्य घटने की एक बड़ी वजह इस साल खेती के रकबे में आई कमी भी मानी जा रही है। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक़, 31 अगस्त 2026 तक देश में 414.10 लाख हेक्टेयर में धान की बुआई हुई थी। पिछले साल इसी समय तक 428.46 लाख हेक्टेयर में धान बोया जा चुका था। एक साल में धान का रकबा करीब 14.36 लाख हेक्टेयर कम हुआ है। हालांकि, किसानों के लिए सिर्फ़ रकबा ही मायने नहीं रखता। प्रति हेक्टेयर पैदावार कितनी रहती है और मंडियों में कितनी फसल आती है, इससे भी सरकारी खरीद प्रभावित होगी।
सरकारी खरीद व्यवस्था किसानों के लिए अपनी उपज बेचने का एक अहम रास्ता है। इसलिए खरीफ सीज़न में धान की आवक शुरू होने के साथ यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्यों में खरीद केंद्र कितनी तेजी से काम करते हैं और किसानों से कितनी मात्रा में धान खरीदा जाता है। अगर इस साल उत्पादन उम्मीद से बेहतर रहा और मंडियों में धान की आवक बढ़ी, तो वास्तविक सरकारी खरीद तय लक्ष्य से ऊपर भी जा सकती है। वहीं कम उत्पादन या कम मंडी आवक होने पर खरीद लक्ष्य के आसपास रह सकती है।
इस बार सिर्फ़ खरीद के आंकड़े ही नहीं बदले हैं, बल्कि चावल की गुणवत्ता को लेकर भी नियम सख़्त किए गए हैं। KMS 2026-27 से इम्प्रोवेड राइस में टूटे हुए चावल यानी ब्रोकन ग्रेन्स की स्वीकार्य सीमा घटाई गई है। कच्चे चावल में टूटे दानों की सीमा 25% से घटाकर 10% कर दी गई है। वहीं पारबॉयल्ड राइस में यह सीमा 16% से घटाकर 5% की गई है। इसका असर चावल मिलों पर भी पड़ेगा। मिलर्स को नई गुणवत्ता सीमा के हिसाब से चावल तैयार करना होगा। यानी धान की सरकारी खरीद के साथ-साथ उसकी मिलिंग और प्रोसेसिंग की गुणवत्ता पर भी पहले से ज्यादा ध्यान देना होगा।
धान का लक्ष्य घटाया गया है, लेकिन मोटे अनाज के मामले में तस्वीर अलग है। KMS 2026-27 के लिए राज्यों ने 18.85 लाख टन मोटा अनाज खरीदने का अनुमान दिया है। पिछले सीज़न में यह आंकड़ा 16.38 लाख टन था। इसमें बाजरा, ज्वार, रागी जैसे मोटे अनाज शामिल हैं। सरकार लगातार इन फसलों को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है। खरीद बढ़ने से इन फसलों की खेती करने वाले किसानों के लिए भी सरकारी खरीद का दायरा बढ़ सकता है।
सरकार ने खाद्यान्न के भंडारण को लेकर भी बड़ी तैयारी की है। नई स्टोरेज पालिसी के तहत 131 लाख टन अतिरिक्त भंडारण क्षमता तैयार करने की योजना है। इसमें राज्यों की ओर से 111 लाख टन और भारतीय खाद्य निगम (FCI) की तरफ़ से 20 लाख टन क्षमता जोड़े जाने का लक्ष्य है। ज्यादा भंडारण क्षमता होने से सरकारी खरीद के बाद अनाज को सुरक्षित रखने और जरूरत के समय उसकी आपूर्ति करने में मदद मिलेगी।
खाद्यान्न की ढुलाई को लेकर भी व्यवस्था मजबूत करने की तैयारी है। सरकार व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम (VLTS) को दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य लेकर चल रही है। GPS आधारित इस व्यवस्था से अनाज लेकर चलने वाले वाहनों की लोकेशन पर नज़र रखने में मदद मिलेगी। इससे खरीद केंद्रों से गोदामों तक अनाज पहुँचाने की प्रक्रिया की निगरानी बेहतर हो सकती है।
धान की सरकारी खरीद का असली आंकड़ा खरीफ सीज़न में फसल आने के बाद ही सामने आएगा। फिलहाल सरकार ने 708.64 लाख टन का लक्ष्य रखा है, लेकिन पिछले वर्षों की खरीद को देखते हुए यह आंकड़ा कम दिखाई देता है। अब धान का उत्पादन, मंडियों में आवक और किसानों की सरकारी खरीद केंद्रों तक पहुँच यह तय करेगी कि इस बार वास्तविक खरीद कितनी रहती है। किसानों के लिए इस सीज़न में एक और बड़ा बदलाव चावल की गुणवत्ता के नए मानक हैं। इसलिए धान की खरीद के साथ-साथ मिलिंग और भंडारण व्यवस्था भी महत्वपूर्ण होगी। सरकार ने खरीद, गुणवत्ता, भंडारण और परिवहन चारों स्तरों पर व्यवस्था मजबूत करने की तैयारी की है।
सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है जब इस साल देश में धान की बुआई का रकबा भी पिछले साल के मुकाबले कम हुआ है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि सरकार इससे कम ही धान खरीदेगी। फसल का उत्पादन, मंडियों में धान की आवक और किसान सरकारी एजेंसियों को कितनी उपज बेचते हैं, इन सभी बातों से अंतिम खरीद का आंकड़ा तय होगा।
पिछले साल लक्ष्य से ज्यादा हुई थी खरीद
धान की बुआई भी हुई कम
सरकारी खरीद व्यवस्था किसानों के लिए अपनी उपज बेचने का एक अहम रास्ता है। इसलिए खरीफ सीज़न में धान की आवक शुरू होने के साथ यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्यों में खरीद केंद्र कितनी तेजी से काम करते हैं और किसानों से कितनी मात्रा में धान खरीदा जाता है। अगर इस साल उत्पादन उम्मीद से बेहतर रहा और मंडियों में धान की आवक बढ़ी, तो वास्तविक सरकारी खरीद तय लक्ष्य से ऊपर भी जा सकती है। वहीं कम उत्पादन या कम मंडी आवक होने पर खरीद लक्ष्य के आसपास रह सकती है।
चावल की गुणवत्ता के नियम भी बदल गए
मोटे अनाज की खरीद का लक्ष्य बढ़ा
सरकार ने खाद्यान्न के भंडारण को लेकर भी बड़ी तैयारी की है। नई स्टोरेज पालिसी के तहत 131 लाख टन अतिरिक्त भंडारण क्षमता तैयार करने की योजना है। इसमें राज्यों की ओर से 111 लाख टन और भारतीय खाद्य निगम (FCI) की तरफ़ से 20 लाख टन क्षमता जोड़े जाने का लक्ष्य है। ज्यादा भंडारण क्षमता होने से सरकारी खरीद के बाद अनाज को सुरक्षित रखने और जरूरत के समय उसकी आपूर्ति करने में मदद मिलेगी।
दिसंबर तक GPS से ट्रैक होंगे अनाज ढोने वाले वाहन
धान की सरकारी खरीद का असली आंकड़ा खरीफ सीज़न में फसल आने के बाद ही सामने आएगा। फिलहाल सरकार ने 708.64 लाख टन का लक्ष्य रखा है, लेकिन पिछले वर्षों की खरीद को देखते हुए यह आंकड़ा कम दिखाई देता है। अब धान का उत्पादन, मंडियों में आवक और किसानों की सरकारी खरीद केंद्रों तक पहुँच यह तय करेगी कि इस बार वास्तविक खरीद कितनी रहती है। किसानों के लिए इस सीज़न में एक और बड़ा बदलाव चावल की गुणवत्ता के नए मानक हैं। इसलिए धान की खरीद के साथ-साथ मिलिंग और भंडारण व्यवस्था भी महत्वपूर्ण होगी। सरकार ने खरीद, गुणवत्ता, भंडारण और परिवहन चारों स्तरों पर व्यवस्था मजबूत करने की तैयारी की है।