गाँवों की बदलती तस्वीर: PAI 2.0 में 3,635 पंचायतें बनीं ‘फ्रंट रनर’, देशभर में 97% से ज्यादा भागीदारी, पंचायती राज मंत्रालय की रिपोर्ट में खुलासा

Gaon Connection | Apr 29, 2026, 19:40 IST
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देश के गांवों में विकास अब जमीनी स्तर पर दिख रहा है। पंचायती राज मंत्रालय की PAI 2.0 रिपोर्ट ने 3,635 ग्राम पंचायतों को 'फ्रंट रनर' श्रेणी में रखा है। यह गांवों के विकास का रिपोर्ट कार्ड है, जिसमें रोजगार और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में सुधार हुआ है।
​<strong>गांवों में बड़ा बदलाव</strong>​
​गांवों में बड़ा बदलाव​
देश के गाँवों में विकास अब सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जमीनी स्तर पर साफ नजर आने लगा है। पंचायती राज मंत्रालय की PAI 2.0 (पंचायत एडवांसमेंट इंडेक्स) रिपोर्ट में यह सामने आया है कि देशभर की 3,635 ग्राम पंचायतें ‘फ्रंट रनर’ यानी A ग्रेड में पहुंच गई हैं। खास बात यह है कि इस बार करीब 97.3% पंचायतों ने इसमें भाग लिया, जो अब तक की सबसे बड़ी भागीदारी है और यह दिखाता है कि गांवों में विकास को लेकर जागरूकता और सहभागिता तेजी से बढ़ रही है।

PAI 2.0: गाँवों का रिपोर्ट कार्ड और भागीदारी का रिकॉर्ड

PAI 2.0 को गाँवों के विकास का एक तरह का रिपोर्ट कार्ड माना जा रहा है, जिसमें रोजगार, स्वास्थ्य, शिक्षा, पानी, स्वच्छता और महिला सशक्तिकरण जैसे कई मानकों पर पंचायतों का आकलन किया जाता है। देश की कुल करीब 2.66 लाख पंचायतों में से 2,59,867 पंचायतों ने इसमें हिस्सा लिया, जो करीब 97.3% भागीदारी को दर्शाता है। इस रिपोर्ट के जरिए यह समझना आसान हो गया है कि कौन-सी पंचायतें बेहतर काम कर रही हैं और किन क्षेत्रों में सुधार की जरूरत है।

कैसे तय होती है पंचायतों की रैंकिंग

PAI 2.0 में पंचायतों की रैंकिंग उनके कुल प्रदर्शन यानी कॉम्पोजिट स्कोर के आधार पर तय होती है। 90 से ज्यादा अंक पाने वाली पंचायतें A+ यानी ‘Achiever’ कहलाती हैं, 75 से 90 अंक वाली A यानी ‘Front Runner’, 60 से 75 अंक वाली B यानी ‘Performer’, 40 से 60 अंक वाली ‘Aspirant’ और 40 से कम अंक पाने वाली पंचायतें ‘Beginner’ श्रेणी में आती हैं। यह स्कोर करीब 150 अलग-अलग पैमानों के आधार पर दिया जाता है, जिसमें रोजगार, स्वास्थ्य, पोषण, साफ-सफाई, पानी, बिजली और महिलाओं की भागीदारी जैसे पहलू शामिल हैं।

रिपोर्ट के आंकड़े: कितनी पंचायतें किस श्रेणी में

रिपोर्ट के मुताबिक 3,635 पंचायतें A ग्रेड यानी ‘फ्रंट रनर’ बन चुकी हैं, जबकि करीब 1.18 लाख पंचायतें B ग्रेड यानी ‘परफॉर्मर’ श्रेणी में हैं। इसके बावजूद बड़ी संख्या में पंचायतें अभी भी C और D श्रेणी में हैं, जहां विकास की रफ्तार को और तेज करने की जरूरत है। यह रिपोर्ट साफ संकेत देती है कि देश के कई गांव तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, लेकिन अभी भी काफी काम बाकी है।

रोजगार और स्वास्थ्य में सबसे ज्यादा सुधार

PAI 2.0 के अनुसार गाँवों में सबसे ज्यादा सुधार रोजगार और स्वास्थ्य के क्षेत्र में देखने को मिला है। रिपोर्ट में 3,313 पंचायतों को रोजगार बढ़ाने में A+ मिला है, जबकि 1,015 पंचायतों को स्वास्थ्य सेवाओं में A+ ग्रेड दिया गया है। इससे यह साफ होता है कि गांवों में अब रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं और स्वास्थ्य सुविधाओं में भी सुधार हो रहा है।

राज्यों की स्थिति: कहीं तेज रफ्तार, कहीं अभी भी चुनौती

रिपोर्ट में राज्यों के प्रदर्शन में भी बड़ा अंतर देखने को मिला है। केरल, गुजरात, तेलंगाना और त्रिपुरा जैसे राज्य बेहतर प्रदर्शन करने वालों में शामिल हैं, जहां पंचायतों का कामकाज मजबूत नजर आता है। वहीं महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, पंजाब और हरियाणा मध्यम स्तर पर हैं। दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे बड़े राज्यों में अभी भी कई पंचायतें पीछे हैं, जहां विकास की रफ्तार बढ़ाने की जरूरत है।

यूपी की स्थिति: बड़ा राज्य, बड़ी चुनौती

उत्तर प्रदेश में कुल 57,678 ग्राम पंचायतें हैं, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार केवल 51 पंचायतें ही A ग्रेड में पहुंच पाई हैं। इसके अलावा 18,905 पंचायतें B ग्रेड, 32,598 पंचायतें C ग्रेड और 6,124 पंचायतें D ग्रेड में हैं। इससे साफ है कि राज्य में विकास का काम बड़े स्तर पर हो रहा है, लेकिन उसे बेहतर परिणामों में बदलने की जरूरत अभी भी बनी हुई है।

क्यों अहम है PAI 2.0 रिपोर्ट

PAI 2.0 अब सिर्फ एक सर्वे नहीं, बल्कि देश के गाँवों का असली रिपोर्ट कार्ड बन चुका है। इससे सरकार को यह समझने में मदद मिलती है कि किन क्षेत्रों में विकास अच्छा हो रहा है और कहां ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। बेहतर प्रदर्शन करने वाली पंचायतों को मॉडल के रूप में अपनाया जा सकता है, जबकि पिछड़ी पंचायतों में योजनाओं को और मजबूत करने की दिशा में काम किया जा सकता है।
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