क्या चुनाव के बाद बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम? सरकार ने दिया बड़ा जवाब
Gaon Connection | Apr 28, 2026, 17:16 IST
पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की अटकलों के बीच सरकार ने साफ कर दिया है कि दाम बढ़ाने की कोई योजना नहीं है। पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद कीमतें बढ़ने की चर्चाओं को खारिज करते हुए सरकार ने कहा कि देश में ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता है। लोगों को अफवाहों से बचना चाहिए।
भारत में अभी नहीं बढ़ेंगी पेट्रोल-डीजल की कीमतें
पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर चल रही अटकलों के बीच सरकार ने साफ कर दिया है कि फिलहाल दाम बढ़ाने की कोई योजना नहीं है। पश्चिम बंगाल में 29 अप्रैल को मतदान खत्म होने के बाद कीमतें बढ़ने की चर्चाओं को खारिज करते हुए सरकार ने कहा कि देश में ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता है और लोगों को अफवाहों से बचना चाहिए।
खुदरा स्तर पर पेट्रोल और डीजल की कीमतें रिकॉर्ड चौथे साल भी स्थिर बनी हुई हैं, जबकि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण पिछले दो महीनों में कच्चे तेल की कीमतें 50% से ज्यादा बढ़ चुकी हैं। इनपुट लागत और पंप कीमतों के बीच बढ़ते अंतर के कारण सरकारी तेल कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। कुछ अनुमान के मुताबिक यह नुकसान रोजाना करीब 2,400 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इसके चलते तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, असम, केरल और पुडुचेरी के चुनाव खत्म होने के बाद कीमत बढ़ने की अटकलें लगाई जा रही थीं, लेकिन पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने स्पष्ट किया कि “पेट्रोल और डीजल की कीमत बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है।”
सरकार ने आंध्र प्रदेश समेत कुछ राज्यों में पैनिक बाइंग की खबरों को भी गंभीरता से लिया है। सुजाता शर्मा ने बताया कि कुछ जगहों पर अफवाहों के कारण लोगों ने ज्यादा खरीदारी की, जिससे सप्लाई पर दबाव पड़ा और 400 से ज्यादा पेट्रोल पंप सूख गए। कुछ इलाकों में मांग 30-33% तक बढ़ गई। हालांकि उन्होंने भरोसा दिलाया कि सभी पेट्रोल पंपों की निगरानी की जा रही है और जहां जरूरत है वहां सप्लाई को प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि कहीं भी कमी न हो।
सरकार ने कहा कि देश में पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और एविएशन टरबाइन फ्यूल का पर्याप्त भंडार मौजूद है और सप्लाई में कोई कमी नहीं है। लोगों से अपील की गई है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें।
हालांकि, अधिकारियों के अनुसार सरकारी तेल कंपनियां बाजार दर से कम कीमत पर ईंधन बेच रही हैं, जिससे उन्हें भारी वित्तीय दबाव का सामना करना पड़ रहा है। विश्लेषकों ने पहले संकेत दिया था कि चुनाव के बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 25-28 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ोतरी हो सकती है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी अमेरिका और इजराइल द्वारा 28 फरवरी को ईरान पर हमले और उसके बाद तेहरान की प्रतिक्रिया के कारण आई, जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य प्रभावित हुआ। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है और वैश्विक तेल व्यापार का करीब 20% हिस्सा संभालता है।
पिछले सप्ताह सुजाता शर्मा ने बताया था कि सरकारी तेल कंपनियां पेट्रोल पर करीब 20 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर करीब 100 रुपये प्रति लीटर का नुकसान झेल रही हैं। कच्चे तेल की कीमत पिछले साल 70 डॉलर प्रति बैरल थी, जो अब बढ़कर औसतन 114 डॉलर प्रति बैरल से ज्यादा हो गई है। इसके बावजूद अप्रैल 2022 से पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। इस दौरान जब वैश्विक कीमतें घटीं तो कंपनियों ने मुनाफा कमाया और उसी से बाद में हुए नुकसान की भरपाई की। फिलहाल दिल्ली में पेट्रोल 94.77 रुपये प्रति लीटर और डीजल 87.67 रुपये प्रति लीटर पर मिल रहा है।
चार साल से स्थिर दाम, बढ़ती लागत के बावजूद राहत
सरकार ने दी सफाई
पर्याप्त भंडार, अफवाहों से बचने की अपील
हालांकि, अधिकारियों के अनुसार सरकारी तेल कंपनियां बाजार दर से कम कीमत पर ईंधन बेच रही हैं, जिससे उन्हें भारी वित्तीय दबाव का सामना करना पड़ रहा है। विश्लेषकों ने पहले संकेत दिया था कि चुनाव के बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 25-28 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ोतरी हो सकती है।
वैश्विक कारणों से बढ़ीं कीमतें
पिछले सप्ताह सुजाता शर्मा ने बताया था कि सरकारी तेल कंपनियां पेट्रोल पर करीब 20 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर करीब 100 रुपये प्रति लीटर का नुकसान झेल रही हैं। कच्चे तेल की कीमत पिछले साल 70 डॉलर प्रति बैरल थी, जो अब बढ़कर औसतन 114 डॉलर प्रति बैरल से ज्यादा हो गई है। इसके बावजूद अप्रैल 2022 से पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। इस दौरान जब वैश्विक कीमतें घटीं तो कंपनियों ने मुनाफा कमाया और उसी से बाद में हुए नुकसान की भरपाई की। फिलहाल दिल्ली में पेट्रोल 94.77 रुपये प्रति लीटर और डीजल 87.67 रुपये प्रति लीटर पर मिल रहा है।