Pineapple Farming: जानिए 1.5 साल में कैसे तैयार होता है अनानास का फल? पौधा लगाने से लेकर फल बिकने तक की पूरी जानकारी
Gaon Connection | Apr 24, 2026, 14:02 IST
नक्सलबाड़ी, पश्चिम बंगाल, अनानास की खेती के लिए जाना जाता है, जो कि जमीनी मेहनत और समय की मांग करती है। फसल को तैयार होने में लगभग डेढ़ साल का वक्त लगतें हैं। इस खेती में छोटे बच्चों से पौधे लगाए जाते हैं, और एक एकड़ के क्षेत्र में करीब 12,000 पौधों की व्यवस्था की जा सकती है। जानिए अनानास की खेती की पूरी जानकारी।
पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी क्षेत्र के अनानास किसानों से बातचीत
आज हम बाजार में आसानी से अनानास का जूस पीते हैं, फल खाते हैं और उसका स्वाद लेते हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि अनानास की खेती कैसे होती है। पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी क्षेत्र में किसानों से बातचीत में अनानास की खेती का पूरा तरीका सामने आया। किसानों ने बताया कि अनानास की खेती मेहनत, समय और लगातार देखभाल मांगती है। सही तरीके से खेती की जाए तो यह किसानों के लिए अच्छा मुनाफे वाला फल साबित हो सकता है।
पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी क्षेत्र के किसानों के पास गाँव कनेक्शन की टीम पहुँची और जाना कि बंगाल के इस इलाके में अनानास की खेती क्यों मशहूर है। साथ ही समझा अनानास की खेती करने की पूरी जानकारी। किसानों ने बताया कि अनानास की फसल तैयार होने में करीब 18 महीने लगते हैं, जबकि खेत की तैयारी समेत पूरा चक्र लगभग 22 से 23 महीने का होता है। इसकी खेती बीज से नहीं, बल्कि पुराने पौधे से निकलने वाले छोटे पौधों से की जाती है।
एक एकड़ में करीब 12 हजार पौधे लगाए जाते हैं और नियमित दवा, पोषण व देखभाल से अच्छा उत्पादन मिलता है। सही देखभाल होने पर एक फल का वजन 2 किलो तक हो सकता है। किसान जल्दी उत्पादन के लिए दवा का भी इस्तेमाल करते हैं, जिससे एक साल में फल तैयार हो जाता है। खेती में कीड़े, जानवर और बाजार भाव जैसी चुनौतियां भी रहती हैं, लेकिन सही प्रबंधन से यह खेती किसानों के लिए लाभदायक साबित हो सकती है।
किसानों के बताया कि अनानास की फसल लगाने से लेकर तैयार होने तक करीब 18 महीने का समय लगता है। यानी एक साल छह महीने बाद फल पूरी तरह तैयार होता है। अगर खेत की तैयारी, पौध तैयार करना और रोपाई का समय जोड़ दें तो कुल चक्र लगभग 22 से 23 महीने तक भी जा सकता है। हालांकि कुछ किसान जल्दी उत्पादन के लिए विशेष दवा का उपयोग करते हैं, जिससे लगभग एक साल में फल निकल आता है।
अनानास की खेती बीज से नहीं बल्कि पौधे के छोटे बच्चों या चारे से होती है। मुख्य पौधे के नीचे से छोटे-छोटे नए पौधे निकलते हैं। इन्हीं को निकालकर दोबारा खेत में लगाया जाता है। एक पौधे से दो से तीन नए पौधे मिल सकते हैं। फल कटने के बाद पुराने पौधे से फिर बच्चे निकलते हैं, जिन्हें अगले सीजन के लिए उपयोग किया जाता है।
किसानों के अनुसार एक एकड़ खेत में करीब 12,000 पौधे लगाए जा सकते हैं। एक बीघा में लगभग 4,000 पौधे लगते हैं। पौधों को लगभग 18 इंच की दूरी पर लगाया जाता है ताकि हर पौधे को बढ़ने की जगह मिले। अक्सर पौधों को तिकोने पैटर्न (Triangle Shape) में लगाया जाता है, जिससे खेत की जगह का बेहतर उपयोग हो सके और पौधे बड़े होने के बाद आपस में एक-दूसरे से उलझे ना। क्योंकि अनानास के पौधों की पत्तियाँ नुकीली होती है और चारों दिशाओं में फैलती हैं।
अनानास की खेती में लगातार देखभाल जरूरी होती है। किसानों ने बताया कि जब फल छोटा होता है और लगभग 200 से 400 ग्राम का होता है, तब हर 15 दिन पर दवा और पोषण देना पड़ता है। इससे फल का आकार, वजन और गुणवत्ता बेहतर होती है। सही पोषण मिलने पर फल बड़ा और आकर्षक बनता है।
जब अनानास के ऊपर बने छोटे-छोटे खानों जैसी आंखें बड़ी और साफ दिखने लगती हैं, तब किसान समझ जाते हैं कि फल पक गया है। इसके बाद इसे बाजार में बेचने के लिए काट लिया जाता है। फल का रंग, आकार और बाहरी बनावट देखकर भी परिपक्वता का अंदाजा लगाया जाता है।
अगर पौधे की अच्छी देखभाल की जाए तो एक अनानास का वजन 2 किलो या उससे ज्यादा हो सकता है। सामान्य खेती में फल का वजन 1 किलो से 1.5 किलो तक रहता है। किसानों का कहना है कि “जितना अच्छा पोषण, उतना बड़ा फल।”
कुछ किसान जल्दी पैसा कमाने के लिए पौधों में विशेष रसायन या दवा डालते हैं, जिससे 45 दिन में फूल और फल निकलने लगता है। इस तरीके से लगभग 1 साल में फसल तैयार हो जाती है। हालांकि प्राकृतिक तरीके से उगाया गया फल अधिक समय लेता है, लेकिन उसकी गुणवत्ता बेहतर मानी जाती है।
अनानास की खेती में सबसे बड़ी समस्या जड़ खाने वाले कीड़े होते हैं। ये कीड़े पौधे की जड़ काट देते हैं, जिससे पौधा सूख सकता है। इसके लिए किसानों को समय-समय पर दवा का छिड़काव करना पड़ता है। इसके अलावा मौसम, ज्यादा बारिश, जलभराव और खराब देखभाल से भी नुकसान हो सकता है।
ग्रामीण इलाकों में बकरी, गाय और जंगली जानवर फसल को नुकसान पहुंचाते हैं। छोटे पौधे बकरी खा जाती है, इसलिए किसान खेत के चारों तरफ बाउंड्री लगाते हैं। जंगल के पास वाले क्षेत्रों में हाथियों का भी खतरा रहता है। किसान पटाखे जलाकर या वन विभाग को सूचना देकर उन्हें भगाते हैं।
पश्चिम बंगाल के किसानों ने बताया कि वे अपना अनानास बिधाननगर मार्केट जैसी बड़ी मंडियों में बेचते हैं। बाजार भाव साल के अनुसार बदलता रहता है। एक साल फल ₹48 से ₹50 प्रति पीस तक बिका, जबकि दूसरे साल वही फल ₹12 से ₹30 प्रति पीस तक गया।
अगर एक एकड़ में 12,000 पौधे लगे हों और हर फल का वजन अच्छा हो, तो किसान को अच्छा उत्पादन मिल सकता है। सही बाजार भाव मिलने पर यह खेती काफी लाभदायक साबित होती है। लेकिन कीमत गिरने पर नुकसान भी हो सकता है, इसलिए बाजार और लागत का ध्यान रखना जरूरी है।
नक्सलबाड़ी क्षेत्र के इन किसानों ने बताया कि अनानास की खेती धैर्य और मेहनत वाली खेती है। इसमें समय जरूर लगता है, लेकिन सही तकनीक, देखभाल और अच्छे बाजार के साथ किसान अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। यह खेती खासकर पश्चिम बंगाल, असम, त्रिपुरा, केरल और उत्तर-पूर्व भारत में तेजी से की जाती है। आने वाले समय में अनानास खेती किसानों के लिए बेहतर विकल्प बन सकती है।
पश्चिम बंगाल में अनानास खेती को समझती गाँव कनेक्शन की टीम
एक एकड़ में करीब 12 हजार पौधे लगाए जाते हैं और नियमित दवा, पोषण व देखभाल से अच्छा उत्पादन मिलता है। सही देखभाल होने पर एक फल का वजन 2 किलो तक हो सकता है। किसान जल्दी उत्पादन के लिए दवा का भी इस्तेमाल करते हैं, जिससे एक साल में फल तैयार हो जाता है। खेती में कीड़े, जानवर और बाजार भाव जैसी चुनौतियां भी रहती हैं, लेकिन सही प्रबंधन से यह खेती किसानों के लिए लाभदायक साबित हो सकती है।
अनानास की फसल तैयार होने में कितना समय लगता है?
अनानास का पौधा कैसे लगाया जाता है?
अनानास की खेती
एक एकड़ में कितने पौधे लगते हैं?
अनानास की देखभाल कैसे की जाती है?
फल कब तैयार माना जाता है?
पकने के बाद कटाई के लिए तैयार फल
एक अनानास का वजन कितना होता है?
जल्दी फल लेने के लिए क्या करते हैं किसान?
अनानास की खेती में कौन-कौन सी समस्याएं आती हैं?
पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी में हो रही अनानास की खेती
जानवरों से फसल कैसे बचाते हैं?
अनानास कहाँ बिकता है?
अनानास की खेती में कितना मुनाफा है?
सही बाजार भाव मिलने पर अनानास की खेती काफी लाभदायक
नक्सलबाड़ी क्षेत्र के इन किसानों ने बताया कि अनानास की खेती धैर्य और मेहनत वाली खेती है। इसमें समय जरूर लगता है, लेकिन सही तकनीक, देखभाल और अच्छे बाजार के साथ किसान अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। यह खेती खासकर पश्चिम बंगाल, असम, त्रिपुरा, केरल और उत्तर-पूर्व भारत में तेजी से की जाती है। आने वाले समय में अनानास खेती किसानों के लिए बेहतर विकल्प बन सकती है।