यूपी में 18 से 27 जुलाई तक लगेंगे समृद्धि, कपि, ऊर्जा और समरस वन; जानिए किस वन का क्या होगा काम

Gaon Connection | Jul 17, 2026, 17:49 IST
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उत्तर प्रदेश में पौधरोपण महायज्ञ-2026 के तहत वन विभाग 18 से 27 जुलाई के बीच चार विशिष्ट वन स्थापित करेगा। इसके तहत 18 जुलाई को समृद्धि वन, 21 जुलाई को कपि वन, 23 जुलाई को ऊर्जा वन और 27 जुलाई को समरस वन विकसित किए जाएंगे। इन वनों का उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना, मानव-वानर संघर्ष कम करना, जलाऊ लकड़ी की उपलब्धता सुनिश्चित करना और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देना है। अभियान में कृषि, ग्राम्य विकास, पंचायती राज और समाज कल्याण विभाग भी सहयोग करेंगे।

यूपी में शुरू होगा विशेष पौधरोपण अभियान
यूपी में शुरू होगा विशेष पौधरोपण अभियान
उत्तर प्रदेश में पौधरोपण महायज्ञ-2026 के तहत वन विभाग आषाढ़ मास में चार विशेष प्रकार के वनों की स्थापना करने जा रहा है। गुरु पूर्णिमा (29 जुलाई) से पहले 18 से 27 जुलाई के बीच पूरे प्रदेश में चरणबद्ध तरीके से समृद्धि वन, कपि वन, ऊर्जा वन और समरस वन विकसित किए जाएंगे। इन सभी वनों की स्थापना का उद्देश्य केवल हरित क्षेत्र बढ़ाना नहीं, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने, मानव-वानर संघर्ष कम करने, ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देना भी है।

वन विभाग के अनुसार, इन विशिष्ट वनों की स्थापना 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के तहत की जाएगी। इसके लिए ग्राम्य विकास, पंचायती राज, कृषि और समाज कल्याण सहित कई विभागों का सहयोग लिया जाएगा। प्रत्येक वन को उसके निर्धारित उद्देश्य के अनुरूप विकसित किया जाएगा, ताकि पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ समाज और किसानों को भी इसका प्रत्यक्ष लाभ मिल सके।

18 जुलाई से शुरू होगा अभियान, अलग-अलग तारीखों पर स्थापित होंगे चार विशिष्ट वन

वन विभाग के कार्यक्रम के अनुसार, 18 जुलाई को प्रदेश के प्रत्येक विकास खंड में समृद्धि वन स्थापित किया जाएगा। इसका उद्देश्य कृषि वानिकी को बढ़ावा देकर किसानों की आय बढ़ाना और उन्हें कार्बन क्रेडिट जैसे अतिरिक्त लाभ उपलब्ध कराना है। इसके लिए प्रत्येक जनपद में कृषि भूमि पर कम से कम एक स्थान चिह्नित किया गया है। समृद्धि वन न्यूनतम एक हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित होगा और इसकी स्थापना में कृषि विभाग भी सहयोग करेगा।

21 जुलाई को प्रदेश के सभी 17 नगर निगमों के साथ नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों में कपि वन स्थापित किए जाएंगे। इनका उद्देश्य शहरों में बढ़ते मानव-वानर संघर्ष को कम करना है। इसके लिए शहर की आबादी से बाहर कम से कम एक हेक्टेयर क्षेत्र में बड़हल, आम, जामुन, अमरूद, बेल, गुलर, कटहल, बेर, शहतूत, पीपल और अंजीर जैसी फलदार प्रजातियों के पौधे लगाए जाएंगे, ताकि वानरों को प्राकृतिक भोजन उपलब्ध हो सके।

ऊर्जा जरूरतों और सामाजिक समरसता पर रहेगा विशेष फोकस

23 जुलाई को प्रत्येक विकास खंड में ऊर्जा वन स्थापित किया जाएगा। वन विभाग के अनुसार, वनों के आसपास रहने वाले ग्रामीण औसतन हर वर्ष 226 किलोग्राम जलाऊ लकड़ी का उपयोग करते हैं। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए ऊर्जा वन में सिरस, बबूल, सुबबूल, गुटेल, पॉपुलर और कदंब जैसी तेजी से बढ़ने वाली प्रजातियों का पौधरोपण किया जाएगा। इस कार्यक्रम में ग्राम्य विकास और पंचायती राज विभाग की भी भागीदारी रहेगी।

इसके बाद 27 जुलाई को प्रदेश के सभी वन प्रभागों में समरस वन स्थापित किए जाएंगे। इनका उद्देश्य सामाजिक न्याय, समानता और संवैधानिक मूल्यों के प्रति लोगों को जागरूक करना तथा समाज के सभी वर्गों को एक मंच पर लाकर पौधरोपण कराना है। इस अवसर पर जनपद, तहसील मुख्यालय और विकास खंड स्तर पर पौधरोपण कार्यक्रम के साथ संगोष्ठियों का भी आयोजन किया जाएगा। इसमें समाज कल्याण विभाग भी सक्रिय भूमिका निभाएगा।

मुख्य वन संरक्षक (प्रचार/प्रसार) अदिति शर्मा ने बताया कि वन विभाग ने आषाढ़ माह में इन चारों विशिष्ट वनों की स्थापना की पूरी तैयारी कर ली है। उन्होंने कहा कि इन वनों का उद्देश्य सीधे आमजन से जुड़ा है और इन्हें जनसहभागिता के साथ विकसित किया जाएगा, ताकि पर्यावरण संरक्षण के साथ सामाजिक और आर्थिक लाभ भी सुनिश्चित किए जा सकें।
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