PMDDKY: यूपी के 8 ज़िलों में कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने की तैयारी, जानिए किसानों को कैसे मिलेगा लाभ

Mansi | Aug 06, 2026, 15:10 IST
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केंद्र सरकार किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने हेतु फसल भंडारण और कृषि अवसंरचना को सुदृढ़ कर रही है। प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत उत्तर प्रदेश के आठ जिलों को सम्मिलित किया गया है। इस योजना के तहत सहकारी समितियों के माध्यम से भंडारण और प्रसंस्करण सुविधाएं विकसित की जाएंगी, जिससे किसानों को बेहतर मूल्य प्राप्त होगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

बेहतर भंडारण और कृषि अवसंरचना से किसानों को मिलेगा उपज का सही दाम और बढ़ेंगे रोज़गार के अवसर
बेहतर भंडारण और कृषि अवसंरचना से किसानों को मिलेगा उपज का सही दाम और बढ़ेंगे रोज़गार के अवसर
ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों के लिए फसल भंडारण और कृषि अवसंरचना को बेहतर बनाने की दिशा में केंद्र सरकार कई योजनाओं पर काम कर रही है। इसी क्रम में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में बताया कि प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना (PMDDKY) के तहत उत्तर प्रदेश के कई ज़िलों को शामिल किया गया है, जहाँ सहकारी समितियों के माध्यम से कृषि भंडारण और मूल्य संवर्धन से जुड़ी सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा।

योजना का उद्देश्य केवल गोदाम बनाना नहीं, बल्कि किसानों को फसल भंडारण, प्रसंस्करण और कृषि सेवाओं की बेहतर सुविधाएँ उपलब्ध कराना है, ताकि उन्हें अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिल सके और ग्रामीण क्षेत्रों में रोज़गार के अवसर भी बढ़ें।

किन ज़िलों को मिलेगा लाभ?

लोकसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, उन्नाव, सोनभद्र, जौनपुर, महोबा, हमीरपुर, बाँदा, जालौन और झाँसी को प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के अंतर्गत सूचीबद्ध किया गया है। इन ज़िलों में सहकारी समितियों के स्तर पर कृषि अवसंरचना विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। सहकारिता क्षेत्र में विकेंद्रीकृत अन्न भंडारण योजना के तहत प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) और अन्य सहकारी समितियों के माध्यम से गोदाम, शीतगृह, प्रसंस्करण इकाइयाँ, कस्टम हायरिंग सेंटर और उचित मूल्य की दुकान जैसी सुविधाएँ विकसित की जा सकती हैं। इसके लिए कृषि अवसंरचना को बढ़ावा देने वाली विभिन्न सरकारी योजनाओं का समन्वय किया जाता है।

किसानों को कैसे होगा फायदा?

यदि गाँव या क्षेत्र में भंडारण की बेहतर सुविधा उपलब्ध होगी, तो किसानों को फसल बेचने की जल्दबाज़ी नहीं करनी पड़ेगी। वे अपनी उपज सुरक्षित रख सकेंगे और बाज़ार में बेहतर दाम मिलने पर बिक्री कर सकेंगे। वहीं, प्रसंस्करण इकाइयों और अन्य कृषि सुविधाओं के विकास से स्थानीय स्तर पर रोज़गार और स्वरोज़गार के अवसर भी बढ़ने की संभावना है। अमित शाह ने बताया कि 3 मई 2023 से योजना लागू होने के बाद उत्तर प्रदेश से इसके संबंध में कोई शिकायत या विशेष रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि जौनपुर में आधुनिक वेयरहाउस प्रबंधन के लिए अलग से प्रशिक्षण आयोजित कराने का कोई अनुरोध अभी तक नहीं मिला है। आवश्यकता होने पर राज्य सरकार नाबार्ड (NABARD) और वेयरहाउसिंग डेवलपमेंट एंड रेगुलेटरी अथॉरिटी (WDRA) से प्रशिक्षण आयोजित कराने का अनुरोध कर सकती है।

योजना में कैसे शामिल हो सकती हैं सहकारी समितियाँ?

यदि किसी ज़िले की जिला सहकारी विकास समिति (DCDC) से स्वीकृति मिलती है, तो वहाँ की PACS या अन्य सहकारी समितियाँ योजना के तहत परियोजना तैयार कर सकती हैं। विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (DPR) की जाँच संबंधित जिला केंद्रीय सहकारी बैंक (DCCB) करता है, जबकि नाबार्ड अपने पोर्टल के माध्यम से उसका सत्यापन करता है। परियोजना पूरी होने के बाद बैंक और नाबार्ड द्वारा उसका भौतिक सत्यापन भी किया जाता है। इस योजना के माध्यम से सरकार का प्रयास ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि भंडारण क्षमता बढ़ाने, कृषि अवसंरचना को मज़बूत करने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है।
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