PMFBY Scheme: क्या आपकी फसल जंगली जानवरों से होती है खराब? अब PMFBY में मिलेगा बीमा का विकल्प, जानिए सरकार के नए नियम
Mansi | Aug 05, 2026, 14:49 IST
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना खासतौर पर किसानों के लिए डिज़ाइन की गई है और यह प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षा सुनिश्चित करती है। यह योजना बुवाई से लेकर कटाई के बाद तक फसल को होने वाले नुकसान का ध्यान रखती है। सूखा, बाढ़, चक्रवात और ओलावृष्टि जैसे खतरों को इसमें शामिल किया गया है। इसके अतिरिक्त, जंगली जानवरों द्वारा उत्पन्न होने वाले नुकसान के लिए अतिरिक्त बीमा कवर प्राप्त है।
PMFBY में जंगली जानवरों से फसल नुकसान पर भी बीमा विकल्प
कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि वर्ष 2016-17 से लागू प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) राज्यों और किसानों दोनों के लिए स्वैच्छिक है। यह योजना संबंधित राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित फसलों और क्षेत्रों में बुवाई पूर्व से लेकर कटाई के बाद तक प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले फसल नुकसान के विरुद्ध व्यापक बीमा सुरक्षा प्रदान करती है। उन्होंने बताया कि योजना का उद्देश्य किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान की स्थिति में आर्थिक सुरक्षा उपलब्ध कराना है।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को लेकर किसानों के मन में अक्सर यह सवाल रहता है कि किन-किन जोखिमों और प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान का बीमा मिलता है। सरकार ने लोकसभा में स्पष्ट किया कि योजना के तहत प्राकृतिक आपदाओं के साथ कुछ विशेष परिस्थितियों में अतिरिक्त बीमा कवर का भी प्रावधान किया गया है, जिससे किसानों को अधिक सुरक्षा मिल सके।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत अधिसूचित फसलों को बुवाई पूर्व से लेकर कटाई के बाद तक प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान का बीमा कवर मिलता है। इसमें सूखा, बाढ़, चक्रवात, ओलावृष्टि, अतिवृष्टि, तूफ़ान और अन्य अप्रत्याशित प्राकृतिक आपदाओं से फसल को होने वाले नुकसान को शामिल किया जाता है। योजना के तहत पात्र किसानों को निर्धारित नियमों के अनुसार फसल नुकसान होने पर बीमा दावा (क्लेम) का लाभ दिया जाता है।
रामनाथ ठाकुर ने बताया कि पहले जंगली जानवरों द्वारा फसलों को होने वाले नुकसान को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में शामिल नहीं किया गया था, क्योंकि इसे रोके जा सकने वाले जोखिम की श्रेणी में रखा गया था। हालांकि, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और विभिन्न राज्य सरकारों के अनुरोध पर अब राज्यों को यह अनुमति दी गई है कि वे जंगली जानवरों से होने वाले फसल नुकसान को अतिरिक्त बीमा कवर के रूप में अधिसूचित कर सकते हैं। इस अतिरिक्त बीमा का पूरा खर्च संबंधित राज्य सरकार वहन करेगी। इसके लिए विस्तृत प्रावधान योजना के परिचालन दिशा-निर्देशों में दिए गए हैं।
सरकार के अनुसार, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में जलभराव से होने वाले नुकसान का भी प्रावधान है। योजना के तहत अधिसूचित सभी फसलों को इस जोखिम का कवर मिलता है। हालांकि, धान, जूट, मेस्ता और गन्ना जैसी जल-प्रिय फसलों के लिए जलभराव से होने वाले नुकसान का दावा केवल स्थानीय आपदा (Localized Calamity) के मामलों में ही स्वीकार किया जाता है।
सरकार ने स्पष्ट किया कि जंगली जानवरों से फसल नुकसान को अतिरिक्त बीमा कवर के रूप में लागू करने का निर्णय संबंधित राज्य सरकारें अपने स्तर पर ले सकती हैं। इसके लिए उन्हें योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार अधिसूचना जारी करनी होगी और अतिरिक्त बीमा का पूरा व्यय भी राज्य सरकार को ही वहन करना होगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य उन क्षेत्रों के किसानों को राहत देना है, जहाँ जंगली जानवरों से फसलों को बार-बार नुकसान पहुँचता है।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को लेकर किसानों के मन में अक्सर यह सवाल रहता है कि किन-किन जोखिमों और प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान का बीमा मिलता है। सरकार ने लोकसभा में स्पष्ट किया कि योजना के तहत प्राकृतिक आपदाओं के साथ कुछ विशेष परिस्थितियों में अतिरिक्त बीमा कवर का भी प्रावधान किया गया है, जिससे किसानों को अधिक सुरक्षा मिल सके।